संदेश

स्वामी विवेकानंद – एक क्रांतिकारी सन्यासी

स्वमी विवेकानंद को रामकृष्ण परमहंस ने पहली बार समाधि का अनुभव कराया था। जानते हैं कि गुरु रामकृष्ण परमहंस के साथ रहकर उनमें क्या बदलाव आए और क्या अनुभव हुए...   सौ साल से अधिक समय गुजर जाने के बाद भी आज भी विवेकानंद युवाओं के प्रिय हैं। आखिर कैसे? कैसा था उनका जीवन? क्या खास किया था उन्होंने ? स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में विश्वनाथ दत्ता और भुवनेश्वरी देवी के घर नरेंद्र नाथ दत्त के रूप में हुआ था। 4 जुलाई, 1902 को बेलूर मठ में उनका देहांत हुआ। अपने देहांत तक उन्होंने एक ऐसी क्रांति ला दी थी, जिसकी गूंज आज तक दुनिया भर में है। अपने गुरु के संदेश वाहक के रूप में, वह एक शताब्दी से दुनिया भर के युवाओं के लिए एक प्रेरणास्रोत रहे हैं। इस लेख में, सद्गुरु स्वामी विवेकानंद के जीवन की कुछ घटनाओं के बारे में बता रहे हैं जिनसे यह पता चलता है कि अपने गुरु के साथ उनका क्या रिश्ता था और वह उनका कौन सा संदेश लोगों में फैलाना चाहते थे। रामकृष्ण परमहंस को दिव्यज्ञान प्राप्त होने के बाद, उनके बहुत सारे शिष्य बन गए। उनके एक शिष्य थे, स्वामी विवेकानंद। विवेकानंद अमेरिका जाने वा...

महाकवि कालिदास द्वारा रचित महाकाव्य 'रघुवंशम्'

 महाकवि कालिदास द्वारा रचित महाकाव्य 'रघुवंशम्' (Raghuvaṃśa) लगभग 1,600 वर्ष पुराना है। इसके लेखन का काल और यह किस माध्यम व विषय पर लिखा गया है, उसकी पूरी जानकारी नीचे दी गई है:1. यह कितना पुराना है? (कालखंड)रचना का समय: अधिकांश इतिहासकारों और Encyclopaedia Britannica के अनुसार, कालिदास गुप्त राजवंश के राजा चंद्रगुप्त द्वितीय 'विक्रमादित्य' के समकालीन थे। इस आधार पर 'रघुवंशम्' की रचना 5वीं शताब्दी ईस्वी (लगभग 400-450 ईस्वी) में हुई थी।पांडुलिपियों की आयु: मूल ग्रंथ 1,600 वर्ष पुराना होने पर भी उस समय की भौतिक प्रतियां नष्ट हो चुकी हैं। वर्तमान में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय पुस्तकालय में इसकी सबसे प्रसिद्ध प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपियां सुरक्षित हैं, जिनमें से एक नेपाल से प्राप्त 17वीं शताब्दी (लगभग 300-400 वर्ष पुरानी) की है जो प्रचलित नेवारी लिपि में कागज़ पर लिखी गई है।2. यह किस पर लिखा गया है? (लेखन माध्यम और लिपि)लेखन सामग्री: प्राचीन काल में मूल रूप से यह काव्य भोजपत्रों (Birch-bark) या ताड़पत्रों (Palm-leaves) पर प्राकृतिक स्याही और नरकट की कलम से लिखा गया थ...

अखिलेश बहादुर पाल: अपनी जड़ों की खोज में समर्पित एक इतिहास साधक

  अखिलेश बहादुर पाल: अपनी जड़ों की खोज में समर्पित एक इतिहास साधक भूमिका इतिहास केवल अतीत की घटनाओं का संग्रह नहीं होता, बल्कि वह किसी समाज की पहचान, संस्कृति और गौरव का दर्पण भी होता है। जब कोई व्यक्ति अपने पूर्वजों, अपनी परंपराओं और अपनी विरासत को समझने का प्रयास करता है, तो वह केवल अपने परिवार का नहीं बल्कि पूरे समाज के इतिहास को जीवित रखने का कार्य करता है। ऐसे ही व्यक्तित्वों में अखिलेश बहादुर पाल का नाम उल्लेखनीय है, जिन्होंने कत्यूरी-पाल वंश, अस्कोट राजपरिवार और महुली-हरिहरपुर की ऐतिहासिक विरासत के अध्ययन में विशेष रुचि दिखाई। पारिवारिक पृष्ठभूमि अखिलेश बहादुर पाल उत्तर प्रदेश के महुली-हरिहरपुर क्षेत्र से जुड़े हैं और स्वयं को प्राचीन कत्यूरी-पाल वंश की परंपरा से संबंधित मानते हैं। उनका मानना है कि कत्यूरी साम्राज्य की विभिन्न शाखाएँ समय के साथ उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के अनेक क्षेत्रों में स्थापित हुईं, जिनका इतिहास आज भी शोध का विषय है। इतिहास के प्रति रुचि बचपन से ही उन्हें अपने पूर्वजों और स्थानीय इतिहास के प्रति विशेष जिज्ञासा रही। यही जिज्ञासा आगे चलकर शोध और...

काम-ऊर्जा (sexual energy) भी एक महत्वपूर्ण ऊर्जा है

 मनुष्य के भीतर कई तरह की ऊर्जाएँ होती हैं, जिनमें काम-ऊर्जा (sexual energy) भी एक महत्वपूर्ण ऊर्जा है। अगर यह ऊर्जा असंतुलित है, दबाई गई है या अधूरी रह जाती है, तो मन में बेचैनी, अशांति और बार-बार विचारों का आना स्वाभाविक है। ऐसे में ध्यान (मेडिटेशन) करना मुश्किल लग सकता है, क्योंकि मन बार-बार उसी दिशा में खिंचता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि जब तक सेक्स पूरी तरह संतुष्ट न हो, तब तक कोई भगवान या ध्यान की ओर नहीं जा सकता। असल बात यह है: 1. काम-ऊर्जा को समझना जरूरी है काम-ऊर्जा को केवल शरीर तक सीमित समझना गलत है। यही ऊर्जा जब जागरूकता के साथ ऊपर उठती है, तो वही प्रेम, करुणा और ध्यान में बदल सकती है। अगर इसे सिर्फ भोग (physical pleasure) तक ही सीमित रखोगे, तो यह बार-बार मांग करती रहेगी। 2. अधूरी इच्छा मन को भटकाती है अगर मन में लगातार कोई इच्छा अधूरी रह जाए, तो वह ध्यान में बाधा बनती है। इसलिए पहले मन को समझना और उसे शांत करना जरूरी है। लेकिन शांति सिर्फ इच्छा पूरी करने से नहीं आती—समझ से आती है। 3. संतोष बाहर नहीं, अंदर से आता है बहुत लोग सोचते हैं कि “जब यह मिल जाएगा, तब मैं शा...

इस बजट में किसानों को क्या मिला? नारियल उत्पादन योजना का ऐलान

Budget Kisan: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण नौवीं बार बजट पेश कर रही हैं। उन्होंने देश के किसानों के लिए सौगात दी है। उन्होंने बजट भाषण में कहा कि छोटे और सीमांत किसानों पर विशेष ध्यान देने की बात कही। वित्त मंत्री ने उत्पादकता बढ़ाने के लिए नारियल उत्पादन योजना की घोषणा की।  source https://www.livehindustan.com/business/what-did-farmers-get-in-this-budget-a-coconut-production-scheme-was-announced-201769923182823.html

Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से किसानों को क्या है उम्मीद

Budget 2026: उम्मीद है कि कृषि बजट 2025-26 के 1.37 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा। इसमें पीएम-किसान, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और पीएम कृषि सिंचाई योजना के तहत सिंचाई योजनाओं के लिए अधिक धनराशि शामिल हो सकती है। source https://www.livehindustan.com/business/budget-2026-what-are-farmers-expecting-from-finance-minister-nirmala-sitharaman-201768896854383.html

Budget Expectations: क्या इस बजट में बढ़ेगी पीएम किसान सम्मान निधि की राशि

Budget Expectations Farmers: वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को आम बजट पेश करने वाली हैं। ऐसे में देशभर के किसानों को उनसे बड़ी उम्मीदें हैं। यह उम्मीद पीएम किसान की सहायता राशि को 6000 रुपये से बढ़कार 9000 रुपये सालाना करने को लेकर है। source https://www.livehindustan.com/business/budget-expectations-will-the-amount-of-pm-kisan-samman-nidhi-be-increased-in-this-budget-2026-201768812016268.html

खेत से विदेश तक: जैविक खेती ने बदली किसानों की किस्मत | FPO Success Story

चित्र
Keywords: जैविक खेती, किसान उत्पादक संगठन, FPO, जैविक भिंडी, कृषि निर्यात, देसी बीज संरक्षण, किसानों की आमदनी, जैविक खाद उत्पादन, दुबई निर्यात, भारतीय कृषि सफलता भारत की कृषि तेजी से बदल रही है। अब किसान केवल अनाज पैदा नहीं करते, बल्कि वैश्विक बाजारों में अपनी पहचान बना रहे हैं। इसी बदलाव की शानदार मिसाल है भारत का एक FPO (किसान उत्पादक संगठन) जिसने जैविक खेती के दम पर 613 किसानों की आय को दोगुना कर दिया है और दुबई तक निर्यात कर रहा है। FPO: किसानों के लिए मालिकाना भविष्य यह संगठन किसानों को एक साथ जोड़कर: • उत्पादन • पैकेजिंग • निर्यात • बाज़ार मूल्य निर्धारण सब कुछ किसानों के नाम से कर रहा है। सबसे अच्छी बात यह कि किसानों को बाजार से दोगुना भाव मिल रहा है। अब बिचौलिया नहीं, किसान ही मालिक!  जैविक खेती का चमत्कार इस एफपीओ का मुख्य फोकस है Organic Farming : • मिट्टी की उर्वरता बढ़ाना • रसायनों से छुटकारा • सुरक्षित और पौष्टिक भोजन सबसे बड़ी कामयाबी है जैविक भिंडी का निर्यात। विशेष रूप से राधिका भिंडी की अंतरराष्ट्रीय मांग है। दुबई में चमकी भारतीय भिंडी ...