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शनिवार, 9 जुलाई 2022

विश्व की प्रथम वायुयान आधारित प्रेक्षणशाला 'सोफिया' द्वारा प्रथम खगोलिकी प्रेक्षण

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दूरबीन को एक 747 जम्बो जेट वायुयान के अंदर लगाया गया। दूरबीनों को पृथ्वी तथा अंतरिक्ष में स्थापित करके अनेक खगोलिकी प्रेक्षण किए जा चुके हैं। खगोलिकी की समतामंडल प्रेक्षणशाला-सोफिया (स्ट्रैटोस्फेयरिक ऑब्जर्वेटरी फॉर इंफ्रारेड एस्ट्रोनॉमी) प्रथम प्रेक्षणशाला है जिसके अंतर्गत 2.5 मीटर दर्पण व्यास वाली एक है तथा इसके द्वारा प्रथम खगोलिकी प्रेक्षण 26 मई 2010 को किया सोफिया गया । प्रेक्षणशाला अमेरिकी अंतरिक्ष संस्था 'नासा' और जर्मन एरोस्पेस सेंटर की संयुक्त परियोजना है। 'नासा' के अंतरिक्ष भौतिकी विभाग के निदेशक जॉन मोर्स के अनुसार


प्रोसेसिंग कर रहे हैं। इस उड़ान के साथ सोफिया को 20 वर्ष की खगोलिकी यात्रा प्रारंभ हती है जिसके अंतर्गत यह उन दुर्लभ ३ खगोलिकी प्रेक्षणों को संपन्न करनी जो मू और अंतरिक्ष आधारित दूरबीनों के द्वारा संभव नहीं हैं। वैज्ञानिक सोफिया द्वारा प्राप्त प्रथम खगोलिकी डेटा के आधार पर इसका नाम दिया गया है sabhar aviskar  # latest #aajtak.in #amarujala # space #American science 

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शुक्रवार, 8 जुलाई 2022

ब्रह्मांड विज्ञान

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 ब्रह्मांड विज्ञान अभी नहीं जानता कि 23 प्रतिशत पदार्थ का रंग रूप क्या है और शेष 73 प्रतिशत किस प्रकार की ऊर्जा है, अर्थात् विज्ञान अभी ब्रह्मांड का निर्माण करने वाले पदार्थ तथा अपदार्थ (ऊर्जा) का मात्र 4 प्रतिशत ही जानता है। इस घोर अज्ञान के लिए 'विज्ञान' को कोई खेद प्रकट करने की आवश्यकता नहीं है। क्योंकि इस ‘अज्ञान' का जानना भी एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।


ब्रह्मांड विज्ञान ने हमें ज्ञान दिया है कि ब्रह्मांड का उद्भव 13.7 अरब वर्ष पहले हुआ था, कि उसका विकास किस तरह हुआ, अर्थात् किस तरह ग्रह, तारे, मंदाकिनियां, मंदाकिनियों के समूह और किस तरह इन समूहों की चादरें निर्मित हुई; कि ब्रह्मांड में पदार्थ इतनी दूर-दूर क्यों हैं; कि पदार्थ और प्रति पदार्थ का निर्माण हुआ था किंतु अब हमारे देखने में केवल पदार्थ ही है; कि दिक और काल निरपेक्ष नहीं वरन् वेग के सापेक्ष हैं कि वे चार आयामों में गुंथे हुए हैं; कि दिक का वेग के साथ संकुचन होता है और काल का विस्फारण; कि ब्रह्मांड की दशा स्थाई नहीं है वरन् उसका प्रसार हो रहा है और वह भी त्वरण के साथ; कि एक और 'जगत' है जो हमें दिखता नहीं है *


जिसका यहां छोटा सा प्रतिनिधित्व करने वाला नमूना दिया है (इसमें भी काफी कुछ छूट गया है)। इतना जानने के बाद ही तो पदार्थ और ऊर्जा के अदृश्य होने का बोध हमें हुआ है और भी बहुत बड़े-बड़े प्रश्न हमारे सामने हैं। जैसे पदार्थ में द्रव्यमान कैसे आता है?; प्रति-पदार्थ का क्या हुआ?; क्या दिक के तीन से अधिक आयाम हैं?; ब्रह्मांड का भविष्य क्या है? आदि-आदि ।


यदि हम गौर करें तब यह बड़े या गंभीर प्रश्न ही तो आने वाली क्रांति की सूचना देते हैं । विज्ञान में तो अज्ञान का स्वागत होता है। यदि एक रूपक में कहूं तब ज्ञान विज्ञान की प्रगति के लिए दो पैर आवश्यक हैं, एक अज्ञान का पैर तथा दूसरा ज्ञान का पैर । विद्युत चुंबकीय तरंगों के अस्तित्व की भविष्यवाणी करने वाले जेम्स मैक्स्वैल ने कहा था : "सोचा विचारा अज्ञान विज्ञान में अदभुत विकास के लिए जमीन तैयार करता है।"


- अदृश्य पदार्थ क्या केवल कल्पना है या इसके कुछ ठोस प्रमाण भी है? अदृश्य पदार्थ की संकल्पना का जन्म मंदाकिनी समूहों के बीच गुरुत्वाकर्षण बल तथा अपकेंद्री बल के असंतुलन का संतुलन करने के लिए


की गुरुत्वाकर्षण निकट नहीं कर नियत कक्षा में प जो अपकेंद्री बल से उत्पन्न होता का संतुलन कर परिक्रमा हमारा सेकंड के वेग अपनी मंदाकिनीचारों ओर लगान पिंड अपनी कक्ष अर्थात् उन पर तथा उनके अप यदि ऐसा संतुलन तो आएगी। इस समाधान हेतु अ की गई है।


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रविवार, 3 जुलाई 2022

रोनाल्डो हेनरी निक्सनकृष्ण को छोटा भाई कहते थे

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 एक थे रोनाल्डो हेनरी निक्सन. इंग्लैंड निवासी अंग्रेज थे और मात्र 18 वर्ष की उम्र में प्रथम जर्मनी युद्ध में उन्होंने बड़े अफसर के रूप में भाग लिया था. नरसंहार से इतने व्यथित हुए कि सेना छोड़ दी. घूमते हुए एक दिन कैंब्रिज विश्वविद्यालय में पहुंच गये, यहाँ उन्हें सनातन, वेदांत, ईश्वर और महात्मा बुद्ध के बारे में जानकारी मिली तो, भारत आ गए. भारत में टहलते हुए ब्रज आ गये और फिर यहाँ आकर कृष्ण के दिवाने हो गये. कृष्ण को छोटा भाई कहते थे



एक दिन उन्होंने हलवा बनाकर भोग लगाया. पर्दा हटा कर देखा तो, कटोरी में छोटी-छोटी अँगुलियों के निशान थे, जिन्हें देख कर वे आश्चर्य चकित हो कर  रोने लगे कि उन्हें शायद इतना प्रेम करते हैं कि भोग खाने बाल स्वरूप में ही स्वयं आते हैं..


निक्सन कृष्ण को प्रतिदिन भोजन करा कर और सुला कर ही स्वयं सोते थे. कहते हैं कि सर्दियों के मौसम में निक्सन कुटिया के बाहर सो रहे थे तभी, मध्य रात्रि को उन्हें लगा कोई आवाज दे रहा है  .. हो दादा ... हो दादा ... वे उठकर अंदर गये. देखा तो, कोई नहीं दिखा. भ्रम समझ कर पलटे तभी, फिर आवाज सुनाई दी ..ईस बार साफ थी . हो दादा ... हो दादा ... पर्दा हटा कर देखा तो, कृष्ण को रजाई ओढ़ाना भूल गए थे उस दिन. वे कृष्ण के पास बैठ गए और बड़े प्यार से बोले आपको भी सर्दी लगती है क्या? निक्सन का इतना कहना था कि कृष्ण की प्रतिमा की आँखों से आंसुओं की धारा बहती  महसूस हुई. फिर उनके साथ निक्सन भी फफक-फफक कर रोने लगे और रोते-रोते अचेत हो गये. शून्य में विलीन हो गये. पंचतत्व में मिल गये. 


जिसने ब्रज में आकर ही कृष्ण का नाम सुना था, वह कृष्ण का हो गया और कृष्ण उसके हो गये.


 हम कृष्ण के साथ पैदा होते हैं, उनके साथ जीते हैं पर, उनके लिए मरते नहीं. अपने स्वार्थ में लिपट कर मर जाते हैं. 


हम क्यों आये थे, यह पता ही नहीं चल पाता ...


जय श्री कृष्ण...


साभार... soniya Singh Facebook wall

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