सोमवार, 31 मार्च 2025
रविवार, 30 मार्च 2025
स्त्री के स्तनों से जुड़ा होता है स्त्री का सारा व्यक्तित्व
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।स्वर ने स्तन क्यों दिये....?
समझिये...
बिना स्तन कोई स्त्री की कल्पना व्यर्थ है..!!
इसे फैशन या दिखावा ना बनायें... और अगर दिखाना ही है तो आपका पति है दूसरे को क्यों दिखाना...?
स्त्री के स्तनों से जुड़ा होता है स्त्री का सारा व्यक्तित्व । जब तक स्त्री माँ नही बन जाती तब तक उसकी ऊर्जा पूर्णतः स्तनों तक नही पहुँचती..!!
शरीर शास्त्री ये प्रश्न उठाते रहते है। कि पुरूष के शरीर में स्तन क्यों होते है। जब कि उनकी कोई आवश्यकता नहीं दिखाई देती है। क्योंकि पुरूष को बच्चे को दूध तो पिलाना नहीं है। फिर उनकी क्या आवश्यकता है। वे ऋणात्मक ध्रुव है। इसलिए तो पुरूष के मन में स्त्री के स्तनों की और इतना आकर्षण है। वे धनात्मक ध्रुव है।
इतने काव्य, साहित्य, चित्र,मूर्तियां सब कुछ स्त्री के स्तनों से जुड़े है। ऐसा लगता है जैस पुरूष को स्त्री के पूरे शरीर की अपेक्षा उसके स्तनों में अधिक रस है। और यह कोई नई बात नहीं है। गुफाओं में मिले प्राचीनतम चित्र भी स्तनों के ही है। स्तन उनमें महत्वपूर्ण है। बाकी का सारा शरीर ऐसा मालूम पड़ता है कि जैसे स्तनों के चारों और बनाया गया हो। स्तन आधार भूत है।
क्योंकि स्तन उनके धनात्मक ध्रुव है। और जहां तक योनि का प्रश्न है वह करीब-करीब संवेदन रहित है। स्तन उसके सबसे संवेदनशील अंग है। और स्त्री देह की सारी सृजन क्षमता स्तनों के आस-पास है।
यही कारण है कि हिंदू कहते है कि जबतक स्त्री मां नहीं बन जाती, वह तृप्त नहीं होती। पुरूष के लिए यह बात सत्य नहीं है। कोई नहीं कहेगा कि पुरूष जब तक पिता न बन जाए तृप्त नहीं होगा। पिता होना तो मात्र एक संयोग है। कोई पिता हो भी सकता है, नहीं भी हो सकता है। यह कोई बहुत आधारभूत सवाल नहीं है। एक पुरूष बिना पिता बने रह सकता है। और उसका कुछ न खोये।
लेकिन बिना मां बने स्त्री कुछ खो देती है। क्योंकि उसकी पूरी सृजनात्मकता, उसकी पूरी प्रक्रिया तभी जागती है। जब वह मां बन जाती है। जब उसके स्तन उसके अस्तित्व के केंद्र बन जाते है। तब वह पूर्ण होती है। और वह स्तनों तक नहीं पहुंच सकती यदि उसे पुकारने वाला कोई बच्चा न हो।
तो पुरूष स्त्रियों से विवाह करते है ताकि उन्हें पत्नियाँ मिल सके, और स्त्रियां पुरूषों से विवाह करती है ताकि वे मां बन सकें। इसलिए नहीं कि उन्हें पति मिल सके। उनका पूरा का पूरा मौलिक रुझान ही एक बच्चा पाने में है जो उनके स्त्रीत्व को पुकारें।
पश्चिम में बच्चों को सीधे स्तन से दूध न पिलाने का फैशन हो गया है। यह बहुत खतरनाक है। क्योंकि इसका अर्थ यह हुआ कि स्त्री कभी अपनी सृजनात्मकता के केंद्र पर नहीं पहुंच सकेगी। जब एक पुरूष किसी स्त्री से प्रेम करता है तो वह उसके स्तनों को प्रेम कर सकता है। लेकिन उन्हें मां नहीं कह सकता।
केवल एक छोटा बच्चा ही उन्हें मां कह सकता है। साभार Facebook
शनिवार, 29 मार्च 2025
शुक्रवार, 28 मार्च 2025
गुरुवार, 27 मार्च 2025
पुरुष को पर्मार्थप्रश्स्त करने वाली ही महिलाओ की अहम भूमिका रही
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पुरुष को पर्मार्थप्रश्स्त करने वाली ही महिलाओ की अहम भूमिका रही निष्काम भक्ति कुल परिवार समाज राष्ट्र का गौरव बनी,,, ऐसा था वेद आधारित भारतीय चरित्र पुरुषो ने भी अपनी निस्वार्थ भक्ति सदेब नारी का सम्मान व प्रेम से पुष्ट किया
कुटिल व कपटी व कुंठित मांनसीकता वाली स्त्रियो ने पुरुष समाज को दिग्भर्मित किया,,क्योंकि असुरक्षा का भाव आते ही मनुस्य नकरात्मक विचारो से घिर जाता है
तो अनीति का मार्ग चह्यन करता है
कालांतर में ऐसा हि कुछ हुआ
वर्तमान में बोल्ड और जागरूक महिलाये अब बदहजमी उतपन्न कर रही है क्योंकि वह दासी प्रथा का अंत कर रही है
पुरुष को सब कुछ मुफ़्त मिल रहा था तो वैल्यु नही हुई
क्योंकि वैल्यू उसी की मार्किट में होती है जिस प्रोडक्ट की शॉर्टेज हो,, कड़वा सत्य है इसलिए पुरुष की भावनाएं आहत हो सकती है खैर जहां स्त्री की निःस्वार्थ भावनाओं का उचित मूल्यांकन नही हुआ तो ये घटना घटित होनी ही थी पारिवारिक विकृतिकरण कुछ एक का निजी स्वार्थ भी हो सकता है संवेधानिक अधिकारों का दुरुपयोग
और पुरुष कि बनाई अर्थव्यवस्था पर स्वाधिकार समझना महिलाओ की मूर्खता के अतिरिक्त अन्य कुछ नही,,, क्योंकि कर्तव्य पूर्ति के साथ अधिकार प्राप्त होते है
गलत का विरोध खुलकर कीजिये घर है परिवार है अटवा समाज
इसलिए सजग रहे जागरूक रहीये,,
माता पिता बच्चो की परवरिश में समानता पर ध्यान दे ना कि स्त्री पुरुष भेदभाव पूर्ण प्रदूषित वातावरण
माता ही निर्माता है स्ट्री प्रकर्ति है श्रजन करती है समय आने पर दमन भि करती है
विचार को स्वतंत्र कीजिये,, ज्ञान कौशल से स्वयम को भर लीजिये
अपेक्षा समूल दुख का कारण है,,
पश्चिमीकरण हावी है इसे सहजता से स्वीकार कीजिये
क्योंकि इसका उत्तर दाई भी मानव जाति ही है उदासीनता पूर्ण जीवन,,,
क्योंकि मूर्ख शिव व शक्ति की ऊर्जा सन्तुलित करना ही नही सीख पाए
क्योंकि शिव ही अनंत शून्य की अवस्था है जो शक्ति के आगे नतमस्तक है और माया शक्ति उसके आधीन है जो स्वयं पर विजय प्राप्त कर चुका हो
ऐसे स्थिति में स्त्री स्वयम उस परमतत्व सत्य को प्राप्त करने हेतु तप करती है,, और शिव तत्व प्रतीक्षा
निराकार पुरुष व प्रकर्ति का मिलन ही साकार रूप लेकर जन्म मरण के चक्रव्यूह में उलझता है, इससे मुक्त होने हेतु
इसलिए ही मार्ग सुझाये गए,, चार ब्रह्मचर्य ,,ग्रहस्थ,, वानप्रस्थ ,,,सन्यास
धर्म - सत्यपथानुगामिनिबन निष्पक्ष न्याय नीति
अर्थ- जीविकोपार्जन हेतु सीमित संतुलित आय संसाधन
काम - बड़े सपने देखने से ही हमें बड़ी उपलब्धियां मिलती हैं। यह सुविचार हमें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है।
अंततः मोक्ष - आद्यत्मिक चिंतन ध्यान मनन जप तप साभार : ऋतु सिसोदिया Facebook wall
बुधवार, 26 मार्च 2025
मंगलवार, 25 मार्च 2025
नारी प्रत्येक काल में पूजनीय है, थी और रहेंगी :ऋतु सिसोदिया
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कुछ राक्षसी प्रवृत्ति की स्त्रियों के कारण सम्पूर्ण नारी जाति गलत नही हो जाती। जीवन का सबसे महत्वपूर्ण गृहस्थ आश्रम गलत नही हो जाता। नारी जाति के प्रति जो ट्रेंड सेट किया जा रहा है वह समाज राष्ट्रहित में नही है।
नारी प्रत्येक काल में पूजनीय है, थी और रहेंगी।
किन्तु हा पुरुष अहहकर के केंद्र में ही रहेगा तो स्मरण रखे अकड़ मुर्दे में होती है जिंदा जुका हुआ होता है क्योंकि जो झुक सकता है वही झुका सकता है
स्ट्री यदि अपने स्वाभिमान को चुनती है तो वस्य ही खिंकोइ चूक तुमसे अवश्य हुई है प्रिय पुरुषो जिससे उसके आत्मसम्मन को ठेस पहुचाई है
यदि घव तुमने दिए तो बर्न की जिम्मेदारी भी तो तुम्हारी ही होती है किंतु अफसोस तुम स्ट्री के त्याग व समर्पण का सही से मूल्यांकन ही नहि कर पाते,,,
ऐसे सांसारिक सम्बन्धो को निभाने वाली स्तरीय सिर्फ भारतवर्ष में ही पाइ जाती है क्योंकि पुरुषय से उन्हें प्रेम व सममान से पुष्ट किया ताकि प्रकर्ति हरि भरी रहे
सोमवार, 24 मार्च 2025
रविवार, 23 मार्च 2025
शनिवार, 22 मार्च 2025
शुक्रवार, 21 मार्च 2025
गुरुवार, 20 मार्च 2025
नकरात्मकता को समाप्त करने का एक ही माद्यम है सकरात्मकता थिंक :ऋतु सिसोदिया
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नकरात्मकता को समाप्त करने का एक ही माद्यम है सकरात्मकता थिंक be positive,creat हेल्थी enviornment
क्योंकि इसके पीछे तीन मूल उद्द्देस्य ही व्यक्तिके होते है peace पावर, प्रोस्पेरिटी,, व्यक्तिगत तौर पर मनुस्य सुख शांति समरिद्धि पूर्ण जीवन ही बिताना चाहता है,,इसी लालसा में जाने अनजाने अनैतिक कृत्य भी कर बैठता है,, क्योंकि वेदानुकूल जीवन शैली को हम अपनाते नही,, जो प्रकर्ति रक्षण व संरक्षण से जुड़ा है
बौद्ध,जैन और सिख धर्म वैदिक कर्मकांडो के विरोध मे बने या क्षत्रिय उन से अलग हुए हैं अन्यथा मंदिरों में महावीर, बुद्ध, सिख गुरुओं की भी पूजा होती। ये तीनों ही धर्म क्षत्रियों के हैं। आज यही राजपूत वैदिक धर्म के गुलाम है।
क्षत्रिय वह है जो समय की गति को पहचान कर उसी का स्वरूप लेले
सादगी के समय एकदम सरल किन्तु जब विन्रमता काम ना आये तो विकराल वीभत्स स्वरूप धरन कर सत्य का रक्षण करे
स्कक्ति के विभिन्न स्वरूप है,, कुल देवी माँ महाकाली को जो हमारे भीतर ही विद्यमान है साधक बनकर साधना करने उन्हें जाग्रत कर शक्ति प्राप्तकरने के उपरांत ही क्षत्रिय युद्धभूमि में रणक्षेत्र में उतरते थे मानव कल्याण निमित्त
ईश्वर मा आदिशक्ति विकराल रूप धारणकर शत्रु का दमन कर सत्य की विजय सुनिश्चितकर देती
बिना आद्यात्मिक्ता के मानव कल्याण सम्भव नही
सच्चे प्रेम की तलाश में दुनिया पागल है:ऋतु सिसोदिया
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तुम्हारे अंतर्मन की गहराई में जो ह्रदय सतत्त निरंतर धड़क रहा है वह उस पर्मात्मा का अनंत व असीम प्रेम ही तो है जो तुम्हारे ही भीतर विद्यमान है ,ह्रदय ही वह केंद्र है जो हमे भक्ति से जोड़ता है
किन्तु बुद्धि के माध्यम से हम प्रेम भक्ति व आनंद प्राप्त करना चाहते है
ह्रदय से सम्बन्ध को पोषित करना नही
फिर भी सच्चे प्रेम की तलाश में दुनिया पागल है और व्यक्ति विशेष के पीछे ताउम्र भागता है किंतु हाथ कुछ नही,, बल्कि विरह ,तड़प हिस्से आती है दुख और पीड़ा का अनुभव कराती है,,और स्वार्थी मनुस्य प्रेम को ही छल व प्रपंच से प्राप्त करने का प्रयास करता है जबकि प्रेम तो ह्रदय का सम्बन्ध है जहां पारदर्शिता है
मन की अशांति के कारण आपकी खोज सत्य की ओर नही थी आद्यत्मिकता की ओर विरले ही उन्मुक्त होते है जो सुखी व सानन्दित है सांसारिक कुचक्र से मुक्त है
मूल्यांकन करना आसान है,समझना कठिन है।
समझने के लिए करुणा, धैर्य और यह मानने की इच्छा चाहिए कि अच्छे दिल भी कभी-कभी गलत तरीकों का चुनाव कर सकते हैं। यह सामाजिक दृस्टिकोण है
किन्तु एकांतचयन व्यक्तिगत निर्णय है
मूल्यांकन करने से हम अलग हो जाते हैं,
लेकिन समझने से हम बढ़ते हैं …
स्वयम के साथ जब हो तो ह्रदय की प्रत्येक धड़कन को सुने ह्र्दयचक्र की महसूस कीजिये यदि धड़कन बन्द हो जाये तो जीवन की संभावना समाप्त हो जाती है
ईश्वर का धन्यवाद कीजिये खूबसूरत जीवन का जो उपलब्ध है उसका आनंद अनुभव करें
ये संसार एक भरम है यहाँ दिल से अधिक सौदे दिमाग से होते है इसलिए सब दिलजले बस्ते है
स्त्री - मैं सब लेकर गयी निर्मल मन से एक ह्र्दयविहीन दिलजले के प्रेम, समर्पण, सहनशीलता, धैर्य, मर्यादा, विवेक
,अफसोस.!! उसने सिर्फ भौतिकता देखी..पुरुष
ह्रदय नही उसने देह को चाहा रूह को नही,,,,,
उसे खबर ही नही कहानी समाप्त ही चुकी,, क्योंकि उसे लगता था कि जब चाहेगा लौट आएगा अपने किरदार में पर अब ये मुमकिन नहीं,,
क्योंकि एकांत ही आनंद है आत्मोथान आत्महित आत्मकल्याण ही सर्वोपरि आत्मा आनंद से भर जाएगी
जब स्वतंत्र रूप से विचरण करो आत्मनिर्भर होकर चलो
अपने होने का अर्थ यह हरगिज नही की आपको फॉर्ग्रंटेड लिया जाए इससे पूर्व की तुम बंजर हो जाओ स्वयम को संरक्षित करो ,,स्त्री आद्यात्मिक्ता के उच्च शिखर को जीवंत करती है,, वीरांगनाओं की गौरव गतो से आनभिज्ञ हमारा मानव समाज,,,,दम तोड़ते नजर आती भारतीय संस्कृति
हम नायक है अपने सफर के, चलते रहो ना रुकना कभी
चरैवेति चरैवेति साभार ऋतु सिसोदिया
डेटिंग के नियम बदल गए हैं। जो पुरुष 20-30 साल पहले काम करते थे, वह आज नहीं चलते
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यदि आप आधुनिक डेटिंग मार्केट को नहीं समझते, तो आप एक हारने वाला खेल खेल रहे हैं।
डेटिंग के नियम बदल गए हैं। जो पुरुष 20-30 साल पहले काम करते थे, वह आज नहीं चलते।
महिलाओं के पास पहले से कहीं ज्यादा विकल्प हैं, सोशल मीडिया ने उनके अहंकार को बढ़ा दिया है, और अगर आप अब भी "अच्छे होने" और "उसे रानी की तरह ट्रीट करने" के पुराने स्क्रिप्ट पर खेल रहे हैं, तो आप पहले ही हार चुके हैं।
यही कारण है कि ज्यादातर पुरुष महिलाओं को आकर्षित करने में संघर्ष करते हैं, यह इस कारण नहीं कि वे बुरे आदमी हैं, बल्कि इस वजह से कि उन्हें यह नहीं बताया गया कि असल में क्या काम करता है।
आपको यह फ्री में बताता हूँ: आकर्षण "सबसे अच्छे आदमी" बनने के बारे में नहीं है। यह खेल को समझने के बारे में है।
यदि आप नियम नहीं सीखते, तो आप हमेशा खेल जाएंगे।
महिलाएं उतनी जटिल नहीं हैं जितना आप सोचते हैं, लेकिन वे रणनीतिक होती हैं। वे टेस्ट करती हैं, वे मैनिपुलेट करती हैं, वे सबसे मजबूत पुरुष की तलाश करती हैं जो उनके इमोशंस को उत्तेजित करे।
अगर आप नहीं समझते कि महिला साइकोलॉजी कैसे काम करती है, आकर्षण वास्तव में कैसे कार्य करता है, और कैसे खुद को "पुरस्कार" के रूप में प्रस्तुत किया जाए, तो आप हमेशा कमजोर रहेंगे।
आधुनिक डेटिंग मार्केट क्रूर है, महिलाएं सबसे रोमांचक, आत्मविश्वासी और उच्च-स्थिति वाले पुरुष की तलाश करती हैं, जबकि कमजोर पुरुषों को वेलिडेशन के लिए इस्तेमाल करती हैं।
तो, आपसे सवाल है: क्या आप वह आदमी बनना चाहते हैं जिसे वह पीछा करती है, या वह जिसे वह इस्तेमाल करती है?
अपना मानसिकता बदलें, खेल में महारत हासिल करें, और जीतें।
यहां मेरी किताबें आपकी मदद के लिए हैं। प्रत्येक किताब आपको जागरूक करने, ज्ञान से लैस करने और उस पुरुष में बदलने के लिए डिज़ाइन की गई है जो जो चाहता है उसे बिना मिन्नतें किए, "सिंपिंग" किए, या अच्छे होने के बिना प्राप्त कर सके।
👉 Battle of Attraction: Nice Guys vs. Bad Boys – अगर आपको अभी भी लगता है कि "अच्छा होना" महिलाओं के दिल तक पहुंचने का तरीका है, तो यह किताब उस भ्रांति को तोड़ देगी और आपको आकर्षण की असली प्रकृति दिखाएगी।
👉 Chronicle of the Dark Prophecy – यह किताब महिला साइकोलॉजी, आकर्षण और पुरुषत्व के गहरे सच को खोलती है। अगर आप यह समझना चाहते हैं कि महिलाएं ऐसा क्यों करती हैं, तो यह किताब जरूरी है।
👉 Dark Female Psychologies – अगर आप सोचते हैं कि महिलाएं बस चीनी और मसाले जैसी होती हैं, तो आप एक कड़वा सच जानने के लिए तैयार रहें। यह किताब उनके गहरे रणनीतियों, मैनिपुलेशन और मानसिक युद्ध को उजागर करती है।
👉 23 Sentences That Will Make You More Masculine – शब्दों में शक्ति होती है। यह गाइड आपको सम्मान पाने, आकर्षण बनाने और प्रभुत्व स्थापित करने के लिए वर्बल हथियार देती है।
👉 5 Foreplay Techniques That She Will Never Forget – आकर्षण सिर्फ उसे दिलचस्प बनाने तक नहीं रुकता; यह किताब सुनिश्चित करती है कि वह आपको कभी नहीं भूलेगी।
आपका चुनाव: अंधे रहना या जागना।
जो पुरुष आधुनिक डेटिंग मार्केट को नहीं समझते, वे संघर्ष करते हैं, इस्तेमाल होते हैं, और सालों तक उन महिलाओं का पीछा करते हैं जो उनका सम्मान नहीं करतीं। लेकिन जो पुरुष सच्चाई को समझते हैं? वे बिना किसी प्रयास के आकर्षित होते हैं, अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखते हैं, और हमेशा उनके पास विकल्प होते हैं।
अगर आप थक चुके हैं, गुम हो चुके हैं, या अच्छे लड़के के जाल में फंसे हुए हैं, तो अब बदलने का समय है। ज्ञान में निवेश करें, या खेलते रहें। विकल्प आपका है।
#Nice #you #make साभार ऋतु सिसोदिया
अंतरंग प्रेम संबंध केवल शारीरिक संबंधों से नहीं जुड़ी होती है: ऋतु सिसोदिया
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कई लोग सोचते हैं कि अंतरंगता केवल शारीरिक संबंधों से जुड़ी होती है, लेकिन असल में अंतरंगता सत्य के बारे में होती है। जब आप किसी को अपनी सच्चाई बता सकते हैं,झा परकोई पर्दा नही होता आप दोनों परस्प र्बेपर्दा होते है जब आप अपने आप को उनके सामने रख सकते हैं और उनका जवाब होता है – "तुम मेरे पास सुरक्षित हो", तब यही अंतरंगता है।
एक अंतरंग प्रेम संबंध जीवन के सबसे खूबसूरत अनुभवों में से एक होता है क्योंकि हम प्रेम के लिए बने हैं। यही हमारा अस्तित्व है। लेकिन यह आत्म-कार्य करने और एक पूर्ण व्यक्ति बनने का सबसे प्रभावी तरीका भी है। और यह शुरू होता है, जब आप एक-दूसरे के सामने अपने दिल को नंगा कर देते हैं, एक-दूसरे के सामने अपनी संवेदनाओं को खुलकर दिखाते हैं, बिना किसी डर या न्याय के, ताकि संबंध फल-फूल सके। हालांकि यह एक चुनौतीपूर्ण अनुभव हो सकता है।
शर्म, हया, संकोच ,झिझक के साथ स्वार्थवश एक दूसरी करीब आना आपको आत्मानंद आत्मसंतुष्टि से वंचित कर सकता है
किन्तु जब आप सत्य के साथ स्थापित होते है तो सम्पूर्णानंद अनुभव करते है
प्रेम की सारी सुंदरता के साथ-साथ, यह अतीत के दर्द को भी उजागर कर सकता है, जो दिल की सुरक्षा के लिए बनाई गई दीवारों के पीछे छुपा होता है। जब तक आप इन दीवारों को तोड़ने और रोशनी को अंदर आने देने के लिए तैयार नहीं होते, तब तक आपका साथी कभी भी आपको पूरी तरह से जान नहीं पाएगा, और न ही आपके बीच निकटता बढ़ेगी।
सबसे बड़ा दुश्मन आपकी अपनी अंदर की अंधकार है। लेकिन जो चीज आपके लिए अधिक महत्वपूर्ण है: क्या आप उस दीवार को बनाए रखना चाहेंगे, जिसे आपके अहंकार ने बनाया है, या आप अपने रिश्ते को पोषित करना चाहेंगे? प्रेम के सारे पहलुओं का पीछा करना साहस का काम है, और यह एक इच्छाशक्ति से शुरू होता है, जिससे आप नंगे हो जाएं।
अपने जीवन में किसी ऐसे व्यक्ति को आकर्षित करें, जिसके साथ आप नंगे हो सकते हैं... न सिर्फ शारीरिक रूप से, बल्कि आत्मा के स्तर पर भी नंगे हो सकते हैं। कोई ऐसा व्यक्ति जो आपके लिए अपनी सच्चाइयाँ बताए, जो खुद को पूरी तरह से नंगा करेगा क्योंकि वह आपसे सच्चा प्रेम करता है। यही है असली, कच्ची, नंगी अंतरंगता।
साभार 🙏
जीवन में पत्नी का महत्व:ऋतु सिसोदिया
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जीवन में पत्नी का महत्व
पत्नी का जीवन में विशेष स्थान होता है। यह केवल एक साथी का नहीं, बल्कि एक सहयोगी, मित्र, मार्गदर्शक और परिवार की धुरी का स्थान होता है। भारतीय संस्कृति में विवाह को एक पवित्र बंधन के रूप में देखा जाता है, जो न केवल दो व्यक्तियों को जोड़ता है, बल्कि दो परिवारों को भी जोड़ता है। इस बंधन में पत्नी का स्थान अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि वह परिवार की संरचना, सामंजस्य और सुख-शांति को बनाए रखने में एक केंद्रीय भूमिका निभाती है।
1. जीवन की साथी और संजीवनी
पत्नी एक व्यक्ति की जीवनसाथी होती है, जो न केवल अच्छे और बुरे समय में साथ देती है, बल्कि जीवन के विभिन्न उतार-चढ़ावों में एक मजबूत सहारा बनती है। वह अपने पति के साथ दुखों और सुखों को साझा करती है। जीवन के हर मोड़ पर जब व्यक्ति थक कर हार मानने लगे, तब पत्नी का साथ और समर्थन उसे फिर से उम्मीद और साहस देता है। उसके समर्थन से ही व्यक्ति अपने सपनों को साकार कर सकता है और जीवन की कठिनाइयों को पार कर सकता है।
2. घर का सच्चा आधार
घर की शांति, सुख-शांति और समृद्धि की जिम्मेदारी पत्नी के कंधों पर होती है। एक पत्नी अपने घर को एक सजीव और खुशहाल स्थान बनाने के लिए न केवल शारीरिक रूप से, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी प्रयास करती है। वह परिवार के अन्य सदस्यों के बीच सामंजस्य बनाए रखने के लिए अपनी भूमिका निभाती है और यह सुनिश्चित करती है कि घर का माहौल स्नेह और समझ से भरा हो।
3. संस्कारों और परंपराओं की रक्षा करने वाली
पत्नी घर में परिवार की परंपराओं और संस्कारों की रक्षा करती है। खासकर भारतीय समाज में, जहां परंपराओं का अत्यधिक महत्व होता है, पत्नी इन संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य करती है। चाहे वह बच्चों को अच्छी शिक्षा देने की बात हो या फिर पारिवारिक रीति-रिवाजों का पालन करने की बात, पत्नी इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाती है।
4. भावनात्मक समर्थन और समझ
पत्नी का एक बहुत महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वह अपने पति के साथ एक गहरे भावनात्मक संबंध को बनाए रखती है। वह न केवल घर की समस्याओं से निपटने में पति का साथ देती है, बल्कि उसकी मानसिक स्थिति और भावनाओं को भी समझने का प्रयास करती है। जीवन में आने वाली तनावपूर्ण परिस्थितियों में, जब व्यक्ति अकेला महसूस करता है, तब पत्नी उसे भावनात्मक समर्थन देती है और उसे समझने की कोशिश करती है, जिससे वह मानसिक शांति महसूस करता है।
5. माँ बनने का अनुभव और बच्चों के लिए आदर्श
पत्नी के जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका माँ बनने की होती है। जब एक महिला माँ बनती है, तो वह परिवार में न केवल एक मातृत्व संबंधी भूमिका निभाती है, बल्कि बच्चों को अच्छे संस्कार देने, उन्हें शिक्षा देने और उनकी भावनात्मक और शारीरिक देखभाल करने में भी अपनी भूमिका निभाती है। एक पत्नी और माँ के रूप में, वह बच्चों को सही दिशा देने के लिए अपने जीवन का सबसे अच्छा हिस्सा समर्पित करती है। वह अपने बच्चों के लिए आदर्श बनती है और उन्हें जीवन के महत्व को समझाती है।
6. आध्यात्मिक सहयात्रा
पत्नी अपने पति के साथ आध्यात्मिक यात्रा में भी भागीदार होती है। वह दोनों एक दूसरे को सही रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भी पत्नी का महत्व है, क्योंकि वह अपने परिवार को धार्मिक शिक्षाओं और नैतिक मूल्यों के पालन में मार्गदर्शन देती है। एक पत्नी और पति का एक साथ प्रार्थना करना, धार्मिक अनुष्ठान करना और नैतिक जीवन जीने की कोशिश करना उनके संबंध को और भी मजबूत बनाता है।
7. संगठित और समृद्ध परिवार की संरचना
पत्नी न केवल घर के दैनिक कार्यों में मदद करती है, बल्कि वह परिवार की वित्तीय योजनाओं को भी संजीदगी से समझती है। वह घर के बजट, बचत और खर्च की योजना बनाती है, ताकि परिवार का आर्थिक ढांचा मजबूत रहे। एक व्यवस्थित और समृद्ध परिवार की सफलता में पत्नी का योगदान अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है। वह परिवार की जरूरतों का ख्याल रखते हुए, उन्हें बेहतर जीवन देने का प्रयास करती है।
8. सामाजिक दायित्व
पत्नी और पति दोनों मिलकर समाज में अपने दायित्वों को निभाते हैं। परिवार की खुशी और सामूहिक समृद्धि का हिस्सा बनते हुए, पत्नी समाज में अपनी भूमिका निभाती है। वह समाज के विभिन्न पहलुओं में सक्रिय होती है, जैसे कि सामाजिक कार्य, शिक्षा और सामुदायिक विकास, जिससे न केवल उसका परिवार बल्कि समाज भी लाभान्वित होता है।
जीवन में पत्नी का महत्व न केवल घरेलू बल्कि मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक रूप से भी अत्यधिक महत्वपूर्ण है। एक पत्नी अपने पति के जीवन का अभिन्न हिस्सा होती है और उसकी उपस्थिति से घर और परिवार में संतुलन, शांति और सुख-शांति बनी रहती है। उसकी भूमिका सिर्फ एक सहायक की नहीं होती, बल्कि वह परिवार की नींव की तरह होती है, जो इसे मजबूती और स्थिरता प्रदान करती है। अतः पत्नी का सम्मान और उसका मूल्य समझना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है, ताकि वह अपने जीवन में प्रेम और सहयोग की भावना को बनाए रख सके।
#wifeylife #lifepartner #mywifemylife #family
बुधवार, 19 मार्च 2025
मंगलवार, 18 मार्च 2025
ईश्वर की कृति स्त्री व पुरुष दोनों एक दूसरे के पूरक व प्रेरक है
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परिवर्तन संसार का नियम है जागो देवियों खुद को पहचानो जो पुरुष आपके अस्तित्व को नकारते व उपभोग का संसाधन मात्र समझते है सह्योग देना बंद कर दीजिए कमी है आपकी सरलता को कमजोरी समझा आपके समर्पण त्याग को वैल्यू नही किया गया तो त्यग दीजिये ऐसे बुद्धिजीवी पुरुष समाज को नीव रखिये एक सभ्य समाज की अपनी शर्तों पर स्वत्रन्त्र सोच के साथ उल्टी प्रथाओं पर रोक लगाइए की बेटी भी पिता दे दहेज भी पिता दे आजीवन मुफ़्त का नोकर भी उपलब्ध हो ..😂 भयंकर शोषण हुआछल हुआ आपकी भावनाओं के साथ आपके झूठी प्रशंसा करके मुफ़त की सर्विस ली गयी आपसे
पुरुष व्यवसायिक स्तर की सोच के साथ महिला का भरपुरुपयोग करता है तन से मन से धन से
आपको क्या मिलता है भारतीय देवियों कुछ तो सोचो
सिर्फ शोषण
नारी शोषण बन्द होगा आप जागरूक बने
ईश्वर की कृति स्त्री व पुरुष दोनों एक दूसरे के पूरक व प्रेरक है
पुरुष की बनाई सामाजिक व्यवस्था व अर्थ व्यवस्था में नारी को मांनसिक गुलाम बनाकर रखा गया
जो दुख झेल रही निशित ही समाज व्यवस्था की सताई अजागरुक महिला है
क्योंकि प्रहार उसकी मानसिक सोच पर किया गया
सरल के साथ सरल बने जटिल के लिए महाजटिल बने
""खुद को #vailue कीजिये @देवियों
#जिंदगी अपनी शर्तों पर जिये #समझौते पर नही"!! साभार ऋतु सिसोदिया
मूर्ख को मूर्ख भाएंगे,, समझदार को मूर्ख नही भाएंगे
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मूर्ख को मूर्ख भाएंगे,, समझदार को मूर्ख नही भाएंगे
या तो दूरी बनाएंगे या समझाकर सत्य से अवगत कराएंगे,,विफल होने से मौन हो जाएंगे और मूर्खो को उनके हाल पर छोड़ देंगे
मर्यादाएं स्त्री के लिए बनाई गई तो पुरुषो के लिए भी मर्यादाएं सुनिश्चित हो
आत्मनिर्भर व स्वतंत्र सोच की महिला ही गुलामी मानसिकता वाले परिवार के आंखो की किरकिरी होती हैऔर यह भी कटु सत्य है कि स्त्री ही स्त्री की शत्रु भी क्योंकि उस मूर्ख अयोग्य ने ताउम्र मांनसिक गुलामी को स्वीकार किया,,स्वयम के अस्तित्व को समाप्त कर दिया परिवार को एक सूत्र से बंधे रखने के लिए झूट छल प्रपंचो का सहारा लिया,, सत्य के साथ चलने वाली ईश्वरीय न्यायव्यवस्था का अनुपालन करने वाली स्वतंत्र सोच की विकसित नारी जब झूठे आडम्बरो का खंडन करती है तो उनके झूठे अहंकार को ठेस पहुंचती है फिर सत्य को दबाने की नाकाम कोशिशें की जाती है
न्याग नागिन चील गिद्ध कौवे सब एक पक्ष में झुंड में
था सत्य अकेला निष्पक्ष निर्भीक डटा है,, तो उसके मनोबल को गिराने हेतु चरित्र हनन ,, शारीरिक मानसिक यातनाएं ये सब नारी के सहयोग से पुरुष को बल दिया जाता है,,
सत्य को दबाने झुठलाने का प्रयास किया जाता है,,यह ही तो मानसिक अपंगता है महिलाओ की और पुरुष भी भृमित है,, जबकि नारी स्वयम निर्माता है माता है
फिर कुमाता कैसे बन जाती है क्योंकि वह अधर्म अन्याय से लड़ने की बजाय रोटी कपड़ा छत के लिए जीवन व सिद्धात से समझौता कर लेती है और यही गलत धारणा को सत्य समझ जीवन जीती है और पतन को अग्रसर होती है,,
किन्तु जब सत्य का चयन करती है विद्रोही बनना बनकर नितांत अकेली ही रनक्षेत्र में चन्डि बन कर शत्रु का दमन करती है यही श्रेस्ठ स्त्री की पहचान है
ऐसी स्त्री ही सभ्य समाज का निर्माण कर सकती है
साभार ऋतु सिसोदिया
सोमवार, 17 मार्च 2025
क्या आप भी अपने जीवन को व्यवस्थित करने का प्रयास करते हैं
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"क्या आप भी अपने जीवन को फिक्स (व्यवस्थित)
करने का प्रयास करते हैं"..??
दुनिया का हर एक व्यक्ति अपने जीवन को सार्थक राह पर लाने का प्रयास करता है, पर जरूरी नहीं कि हर एक इंसान इसमें सफल भी हो जाएं,
ये जीवन प्रकृति के द्वारा ही चलायमान है, प्रकृति के सामने हम इंसानों को झुकना ही पड़ता है। आप अपने जीवन को जितना भी फिक्स करने का प्रयास करें, ये जीवन कभी भी उस रूप में फिक्स नहीं हो सकता, जैसा आप चाहते हैं,
क्योंकि प्रकृति में ऐसी कोई प्रोग्रामिंग की ही नहीं गई है कि आप उसके द्वारा चलायमान स्थिति को अपने अनुरूप ढाल सकें, उसे बदल सकें।
जब–जब आप जीवन को फिक्स करने का प्रयास करेंगे, ये प्रकृति आपको किसी न किसी प्रकार का कष्ट दुःख देकर ही रहेगी, इसलिए आपको जीवन को फिक्स करने के बजाय इसे सहज रूप से स्वीकार करके "गो विथ द फ्लो" में चलना चाहिए, अन्यथा आप तनाव, मानसिक अवसाद और पीड़ा की स्थिति में प्रवेश कर जाएंगे। साभार ऋतु सिसोदिया
रविवार, 16 मार्च 2025
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