काम-ऊर्जा (sexual energy) भी एक महत्वपूर्ण ऊर्जा है
मनुष्य के भीतर कई तरह की ऊर्जाएँ होती हैं, जिनमें काम-ऊर्जा (sexual energy) भी एक महत्वपूर्ण ऊर्जा है। अगर यह ऊर्जा असंतुलित है, दबाई गई है या अधूरी रह जाती है, तो मन में बेचैनी, अशांति और बार-बार विचारों का आना स्वाभाविक है। ऐसे में ध्यान (मेडिटेशन) करना मुश्किल लग सकता है, क्योंकि मन बार-बार उसी दिशा में खिंचता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि जब तक सेक्स पूरी तरह संतुष्ट न हो, तब तक कोई भगवान या ध्यान की ओर नहीं जा सकता। असल बात यह है: 1. काम-ऊर्जा को समझना जरूरी है काम-ऊर्जा को केवल शरीर तक सीमित समझना गलत है। यही ऊर्जा जब जागरूकता के साथ ऊपर उठती है, तो वही प्रेम, करुणा और ध्यान में बदल सकती है। अगर इसे सिर्फ भोग (physical pleasure) तक ही सीमित रखोगे, तो यह बार-बार मांग करती रहेगी। 2. अधूरी इच्छा मन को भटकाती है अगर मन में लगातार कोई इच्छा अधूरी रह जाए, तो वह ध्यान में बाधा बनती है। इसलिए पहले मन को समझना और उसे शांत करना जरूरी है। लेकिन शांति सिर्फ इच्छा पूरी करने से नहीं आती—समझ से आती है। 3. संतोष बाहर नहीं, अंदर से आता है बहुत लोग सोचते हैं कि “जब यह मिल जाएगा, तब मैं शा...