महाकवि कालिदास द्वारा रचित महाकाव्य 'रघुवंशम्'
महाकवि कालिदास द्वारा रचित महाकाव्य 'रघुवंशम्' (Raghuvaṃśa) लगभग 1,600 वर्ष पुराना है। इसके लेखन का काल और यह किस माध्यम व विषय पर लिखा गया है, उसकी पूरी जानकारी नीचे दी गई है:1. यह कितना पुराना है? (कालखंड)रचना का समय: अधिकांश इतिहासकारों और Encyclopaedia Britannica के अनुसार, कालिदास गुप्त राजवंश के राजा चंद्रगुप्त द्वितीय 'विक्रमादित्य' के समकालीन थे। इस आधार पर 'रघुवंशम्' की रचना 5वीं शताब्दी ईस्वी (लगभग 400-450 ईस्वी) में हुई थी।पांडुलिपियों की आयु: मूल ग्रंथ 1,600 वर्ष पुराना होने पर भी उस समय की भौतिक प्रतियां नष्ट हो चुकी हैं। वर्तमान में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय पुस्तकालय में इसकी सबसे प्रसिद्ध प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपियां सुरक्षित हैं, जिनमें से एक नेपाल से प्राप्त 17वीं शताब्दी (लगभग 300-400 वर्ष पुरानी) की है जो प्रचलित नेवारी लिपि में कागज़ पर लिखी गई है।2. यह किस पर लिखा गया है? (लेखन माध्यम और लिपि)लेखन सामग्री: प्राचीन काल में मूल रूप से यह काव्य भोजपत्रों (Birch-bark) या ताड़पत्रों (Palm-leaves) पर प्राकृतिक स्याही और नरकट की कलम से लिखा गया था। बाद के काल में इसकी प्रतिलिपियां हाथ से बने मोटे कागजों पर उतारी गईं।मूल भाषा और लिपि: यह ग्रंथ मूलतः संस्कृत भाषा में रचा गया है। शुरुआत में इसे प्राचीन ब्राह्मी या गुप्त लिपि में लिखा गया था, जिसके बाद सदियों तक यह देवनागरी, शारदा और ग्रन्थ जैसी क्षेत्रीय लिपियों में प्रतिलिपि के रूप में आगे बढ़ता रहा।3. इसकी विषय-वस्तु क्या है? (यह किस पर आधारित है)सूर्यवंश के राजाओं का इतिहास: 'रघुवंशम्' में भगवान श्री राम के पूरे रघुवंश (इक्ष्वाकु/सूर्यवंश) के वैभव और पराक्रम का वर्णन है।19 सर्ग और 29 राजा: इस महाकाव्य को 19 सर्गों (अध्यायों) में विभाजित किया गया है, जिसमें कुल मिलाकर लगभग 1,570 श्लोक हैं। इसमें सूर्यवंश के आदि राजा दिलीप से शुरू होकर राजा रघु, अज, दशरथ, भगवान श्री राम, लव-कुश से लेकर अंतिम विलासी राजा अग्निवर्ण तक 29 प्रतापी राजाओं की जीवन गाथा को बेहद काव्यात्मक ढंग से पिरोया गया है
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