
By Neil Collier and Santiago García Muñoz from NYT World https://ift.tt/JzsijHt
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मंदिर नर्मदा जिला, देडियापाडा तालुका के कोकम गांव में स्थित है। इस मंदिर को जलेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है। माना जाता है कि यह शिवलिंग 5000 साल पुराना है। मोसाद शहर से लगभग 14 किमी की दूरी पर स्थित महादेव का यह मंदिर पूर्वा नदी के तट पर है भोलेनाथ की आराधाना के पावन महीने सावन की शुरुआत हो चुकी है। इसके साथ ही पूरे राज्य में हर-हर महादेव की गूंज सुनाई देनी शुरू हो गई है। इसी मौके पर आज हम आपको गुजरात के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे बहुत कम ही लोग जानते हैं।
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भारत के हैदराबाद विश्वविद्यालय और रूस के नोवोसिबिर्स्क राजकीय विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक एक अंतर्राष्ट्रीय परियोजना के अंतर्गत ऐसी दवाइयां तैयार करने के काम में जुटे हुए हैं जिनके लिए हल्दी सहित अन्य पारंपरिक भारतीय मसालों का उपयोग किया जा सकता है। नोवोसिबिर्स्क राजकीय विश्वविद्यालय द्वारा जारी की गई एक सूचना के अनुसार, "प्रोफेसर अश्विनी नानिया के नेतृत्व में हैदराबाद विश्वविद्यालय के भारतीय वैज्ञानिक इस निष्कर्ष पर पहुँचे हैं कि अगर हल्दी और एंटीबायोटिक्स को मिलाकर क्रिस्टल बनाए जाएं और आगे इन क्रिस्टलों को पीसकर दवाइयां बनाई जाएं तो ऐसी दवाइयों का असर कई गुना बढ़ जाएगा।"इस परियोजना में शामिल रूसी वैज्ञानिकों का नेतृत्व नोवोसिबिर्स्क राजकीय विश्वविद्यालय के ठोस रसायनिक विज्ञान विभाग की प्रमुख और इस विश्वविद्यालय की एक वरिष्ठ शोधकर्ता, प्रोफेसर ऐलेना बोल्दरेवा कर रही हैं। sabhar : sputanik news
https://www.varta.tv/2014/01/80.htmlआज के समय में जिम जाना प्रतिष्ठा की बात समझी जाती है। पश्चिम में यह बहुत पहले से ही हो रहा है, लेकिन भारत में जिम जाने की आदत पिछले एक दशक में लगीहै। इसमें महिलाओं की संख्या की तेजी से बढ़ रही है। भले ही भारत में महिलाएं इसके प्रति अब जाकर सजग हुई हों, लेकिन पश्चिमी देशों में यह चलन 70-80 साल पहले से ही शुरू हो गया था।
लंदन. एलियंस होते हैं या नहीं, इसका पता लगाने के लिए नासा नई योजना पर काम कर रहा है। वैज्ञानिकों की योजना अंतरिक्ष में अभी तक का सबसे बड़ा दूरबीन लगाने की है, जिससे लाखों मील दूर दूसरे ग्रहों पर जीवन की संभावनाओं का पता लगाया जा सके।
खास बात यह है कि यह दूरबीन इतना बड़ा होगा कि इसे धरती से रॉकेट की मदद से नहीं ले जाया जा सकेगा, इसलिए अंतरिक्ष में ही इसे तैयार किया जाएगा। इस काम के लिए नासा जल्द ही अंतरिक्ष में लाखों मील दूर एस्ट्रोनॉट्स की एक टीम भेजना वाला है। यह प्रोजेक्ट 2030 तक तैयार हो सकता है।
एडवांस्ड टेक्नोलॉजी लार्ज अपर्चर स्पेस टेलिस्कोप (एटीएलएसटी) दुनिया का सबसे शक्तिशाली दूरबीन होगा। ये दूरबीन ग्रहों के वातावरण और 30 प्रकाश वर्ष दूर तक की सौर प्रणाली का विश्लेषण करने में सक्षम होगा। माना जा रहा है कि ये दूरबीन एस्ट्रोनोमर्स के लिए निर्णायक साबित होगा।
दुनिया का सबसे बड़ा दूरबीन
दूरबीन के जरिए ये पता लगाना आसान होगा कि अंतरिक्ष के अनदेखे क्षेत्रों में अलौकिक जीवन मौजूद है या नहीं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ग्रहों का विश्लेषण करने में सक्षम ये दूरबीन 44 फीट वाले हबल स्पेस टेलिस्कोप से चार गुना ज्यादा बड़ा होगा।
2030 तक एलियंस का पता लगा लेगा दुनिया का सबसे बड़ा दूरबीन
दूरबीन के अंदर 52 फीट व्यास का एक शीशा होगा, जो धरती पर किसी भी मानव द्वारा निर्मित सबसे बड़ा आइना होगा। चूंकि दूरबीन का आकार इतना बड़ा है कि इसे कोई भी रॉकेट स्पेस में ले जाने में अक्षम है। लिहाजा, नासा ओरियन रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में एस्ट्रोनॉट की एक टीम भेजेगी, जो वहां जाकर दूरबीन को असेम्बल करेगी। बता दें कि ये दूरबीन धरती से 10 लाख मील की दूरी पर होगा।
एलियंस की तलाश करेगी दुनिया की सबसे शक्तिशाली दूरबीन, 16 लाख किमी के सफर पर रवाना
2030 तक तैयार होगा दूरबीन
नासा के इस प्रोजेक्ट की डिटेल का खुलासा, इस हफ्ते पोर्ट्समाउथ में होने वाली नेशनल एस्ट्रोनॉमी मीटिंग में किया जाएगा। ये जानकारी रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी के अध्यक्ष मार्टिन बार्स्तो देंगे। बार्स्तो के मुताबिक, ये टेलिस्कोप एस्ट्रोनोमर्स को लगभग 60 नए ग्रहों को एक्सप्लोर करने में मदद करेगा। साथ ही ऑक्सीजन और अन्य गैसों के स्तर के बारे में जानकारी प्रदान कर वहां संभावित जीवन होने का संकेत भी देगा।बार्स्तो ने एक अंग्रेजी अखबार को बताया, "यह टेलिस्कोप जीवन की संभावनाओं के लिए पृथ्वी जैसे ग्रहों की पड़ताल करेगा। यह कितना शक्तिशाली होगा इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह 30 प्रकाश वर्ष की दूरी तक के ग्रहों का विश्लेषण करने में सक्षम होगा। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी अंतरिक्ष एजेंसी होने के नाते नासा के लिए इस प्रोजेक्ट को लीड करना जरूरी है और हमें उम्मीद है कि यह प्रोजेक्ट 2030 तक पूरा हो जाएगा
sabhar : bhaskar.com
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