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सोमवार, 20 नवंबर 2023

Being Born in Gaza

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By Neil Collier and Santiago García Muñoz from NYT World https://ift.tt/JzsijHt

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शुक्रवार, 28 जुलाई 2023

5000 सालों से खुद जल देवता करते आ रहे हैं इस शिवलिंग का अभिषेक

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मंदिर नर्मदा जिला, देडियापाडा तालुका के कोकम गांव में स्थित है। इस मंदिर को जलेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है। माना जाता है कि यह शिवलिंग 5000 साल पुराना है। मोसाद शहर से लगभग 14 किमी की दूरी पर स्थित महादेव का यह मंदिर पूर्वा नदी के तट पर है भोलेनाथ की आराधाना के पावन महीने सावन की शुरुआत हो चुकी है। इसके साथ ही पूरे राज्य में हर-हर महादेव की गूंज सुनाई देनी शुरू हो गई है। इसी मौके पर आज हम आपको गुजरात के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे बहुत कम ही लोग जानते हैं।


यह मंदिर नर्मदा जिला, देडियापाडा तालुका के कोकम गांव में स्थित है। इस मंदिर को जलेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है। माना जाता है कि यह शिवलिंग 5000 साल पुराना है।
मोसाद शहर से लगभग 14 किमी की दूरी पर स्थित महादेव का यह मंदिर पूर्वा नदी के तट पर है। यह नदी पूर्व दिशा की ओर बहती है, इसीलिए इसे पूर्वा नदी के नाम से पहचाना जाता है। 
5000 सालों से खुद जल देवता करते आ रहे हैं इस शिवलिंग का अभिषेक

यहां महादेव के मंदिर के अलावा हनुमानजी का भी एक मंदिर है। आमतौर पर हनुमानजी का मंदिर दक्षिणमुखी होता है, लेकिन यहां मंदिर पूर्वमुखी है। सूर्योदय के समय सूर्य की किरणों सीधे इस मंदिर में स्थापित हनुमानजी की प्रतिमा पर पड़ती है।
 
हनुमानजी के इसी मंदिर के ठीक पीछे जमीन से 3 फुट नीचे एक शिवलिंग है। इसी शिवलिंग को जलेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है।  इसके बारे में एक दंतकथा यह भी है कि वनवास के दरमियान पांडवों ने शिव को प्रसन्न करने के लिए इसी शिवलिंग की पूजा की थी।
5000 सालों से खुद जल देवता करते आ रहे हैं इस शिवलिंग का अभिषेक


आमतौर पर शिवलिंग का अभिषेक दूध और जल से भक्त किया करते हैं, लेकिन इस शिवलिंग की विशेषता यह है कि इसका अभिषेक बारहों महीनें और चौबीसों घंटे होता रहता है। शिवलिंग का अभिषेक खुद जलदेवता ही करते हैं। जहां शिवलिंग स्थित है, वहीं एक हाथ गड्ढा खोदने पर ही पानी निकल आता है।
 
यहां सबसे आश्चर्य की बात यह है कि लगातार इतना सारा पानी जमीन से ही आता है और वापस जमीन में ही पहुंच जाता है। पानी की यह धारा अनंत समय से ही फूट रही है। आज तक कभी ऐसा नहीं हुआ कि शिवलिंग पर पानी न बरसा हो।

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वर्चुअल रिएलिटी फर्म ऑक्‍लस को खरीदेगा फेसबुक

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डॉस और वर्ड का सोर्स कोड सार्वजनिक करेगा माइक्रोसॉफ्ट 


वॉशिंगटन। व्हाट्सऐप को 19 अरब डॉलर में खरीदने के करीब एक माह बाद ही फेसबुक ने अगले अधिग्रहण का ऐलान कर दिया है। इस बार फेसबुक वर्चुअल रियलिटी फर्म ऑक्‍लस को खरीदने जा रही है। सौदा 2 अरब डॉलर में होने वाला है।
ऑक्‍लस कंपनी वर्चुअल रियलिटी गेमिंग बाजार की अग्रणी कंपनी है और हेडसेट किट 'ऑक्‍लर रिफ्ट' बनाती है। इसके लिए फेसबुक 40 करोड़ डॉलर का भुगतान नकद रूप में करेगी और बाकी 1.6 अरब डॉलर के शेयर देगी। फेसबुक के मुताबिक सोशल और कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म पर वर्चुअल रियलिटी बाजार अगला बड़ा बाजार बनने जा रहा है।
फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने कहा, 'मोबाइल आज का प्लेटफॉर्म है और हमें भविष्य के प्लेटफॉर्म के लिए भी तैयार रहना चाहिए। ऑक्‍लस के पास सोशल प्लेटफॉर्म पर सबसे अच्छा प्रदर्शन करने का मौका है। यह कंपनी हमारे काम करने, गेम खेलने और कम्युनिकेशन के तरीकों में बदलाव लाने वाली है।"
फेसबुक द्वारा अधिग्रहण के बाद ऑक्‍लस का मुख्यालय कैलिफोर्निया में ही बना रहेगा। कंपनी ऑक्‍लस रिफ्ट भी बनाती रहेगी। शुरुआत में इसका मुख्य काम गेमिंग पर ही केन्द्रित रहेगा, लेकिन बाद में फेसबुक इसमें कई नए काम जोड़ेगी। फेसबुक का मकसद वर्चुअल रियलिटी को एजुकेशन, स्पोर्ट्स और मेडिकल जैसे नए क्षेत्रों में लाने का है।
-sabhar :http://naidunia.jagran.com/वर्चुअल रिएलिटी फर्म ऑक्‍लस को खरीदेगा फेसबुक

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मंगलवार, 25 जुलाई 2023

3डी प्रिंटर छापेगा पकवान

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बर्सिलोना स्टार्टअप नेचुरल मशीन एक ऐसा 3डी प्रिंटर का प्रोटोटाइप है जो मनचाहा डिश बना सकता है. इसे फूडिनी ने विकसित किया है.
इससे चॉकलेट, कुकीज़ आदि इंस्टेंट खाद्य पदार्थ बनाया जा सकता है.
तकनीकी रूप से यह प्रिंटिंग नहीं है. एक पाइप के मार्फ़त इससे कई तरह की खाने की चीज़ें बनाई जा सकती हैं.
इसमें छह अलग-अलग तत्वों के लिए हौज़ पाइप लगे होते हैं. इससे डिज़ाइन किए गए डिश का निर्माण होता है.
अंतरिक्षयात्रियों को भोजन मुहैया कराने के लिए नासा भी इस तरह के प्रोटोटाइप का परीक्षण कर रहा है.सियोभान एंड्र्यूज़ ने एक ऐसा टच स्क्रीन चॉपिंग ब्लॉक बनाया है जो टुकड़ों के आकार के आधार पर आपको बता देता है कि खाने वालों की तय संख्या के लिए पर्याप्त है.
इसे 'गेटइटडाउनऑनपेपर' प्रतियोगिता में पुरस्कार भी मिल चुका है. इसका विकास शार्प लेबोरेटरीज़ ऑफ़ यूरोप एंड ह्यूमन इनवेंट द्वारा प्रायोजित था.
टफेंड ग्लास से बना यह चॉप सिंक आपकी ऑनलाइन ख़रीदारी लिस्ट में से रेसिपी सुझा सकता है और सुपर मार्केट को ऑर्डर भी भेज सकता है.
2013 के इलेक्ट्रोलक्स डिज़ाइन लैब प्रतियोगिता में न्यूट्रिमा फ़ूड एनॉलिसिस मैट का प्रोटोटाइप अंतिम विजेताओं में शामिल रहा.
इसे फ़िनलैंड की जेन पालोवूरी ने बनाया है. यह मैट खाद्य पदार्थ का भार, इसमें मौजूद विषैले प्रदूषण के साथ ही इसके पोषण तत्व के बारे में भी बताता है.
इसे उर्ध्वार्धर या क्षैतिज किसी भी तरह से रखा जा सकता है.
ये किचन गैजेट भविष्य में स्मार्ट फ़्रिज जैसे उपकरणों से सीधे सूचनाएं साझा करने लगेंगे. sabhar :http://www.bbc.co.uk

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हल्दी और एंटीबायोटिक्स का मिश्रण कई गुना उपयोगी

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 भारत के हैदराबाद विश्वविद्यालय और रूस के नोवोसिबिर्स्क राजकीय विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक एक अंतर्राष्ट्रीय परियोजना के अंतर्गत ऐसी दवाइयां तैयार करने के काम में जुटे हुए हैं जिनके लिए हल्दी सहित अन्य पारंपरिक भारतीय मसालों का उपयोग किया जा सकता है। नोवोसिबिर्स्क राजकीय विश्वविद्यालय द्वारा जारी की गई एक सूचना के अनुसार, "प्रोफेसर अश्विनी नानिया के नेतृत्व में हैदराबाद विश्वविद्यालय के भारतीय वैज्ञानिक इस निष्कर्ष पर पहुँचे हैं कि अगर हल्दी और एंटीबायोटिक्स को मिलाकर क्रिस्टल बनाए जाएं और आगे इन क्रिस्टलों को पीसकर दवाइयां बनाई जाएं तो ऐसी दवाइयों का असर कई गुना बढ़ जाएगा।"इस परियोजना में शामिल रूसी वैज्ञानिकों का नेतृत्व नोवोसिबिर्स्क राजकीय विश्वविद्यालय के ठोस रसायनिक विज्ञान विभाग की प्रमुख और इस विश्वविद्यालय की एक वरिष्ठ शोधकर्ता, प्रोफेसर ऐलेना बोल्दरेवा कर रही हैं। sabhar : sputanik news

हल्दी और एंटीबायोटिक्स का मिश्रण कई गुना उपयोगी

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आज के समय में जिम जाना प्रतिष्ठा की बात समझी जाती है। पश्चिम में यह बहुत पहले से ही हो रहा है, लेकिन भारत में जिम जाने की आदत पिछले एक दशक में लगीहै। इसमें महिलाओं की संख्या की तेजी से बढ़ रही है। भले ही भारत में महिलाएं इसके प्रति अब जाकर सजग हुई हों, लेकिन पश्चिमी देशों में यह चलन 70-80 साल पहले से ही शुरू हो गया था।

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गुरुवार, 20 जुलाई 2023

2030 तक एलियंस का पता लगा लेगा दुनिया का सबसे बड़ा दूरबीन

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 लंदन. एलियंस होते हैं या नहीं, इसका पता लगाने के लिए नासा नई योजना पर काम कर रहा है। वैज्ञानिकों की योजना अंतरिक्ष में अभी तक का सबसे बड़ा दूरबीन लगाने की है, जिससे लाखों मील दूर दूसरे ग्रहों पर जीवन की संभावनाओं का पता लगाया जा सके।

 

खास बात यह है कि यह दूरबीन इतना बड़ा होगा कि इसे धरती से रॉकेट की मदद से नहीं ले जाया जा सकेगा, इसलिए अंतरिक्ष में ही इसे तैयार किया जाएगा। इस काम के लिए नासा जल्द ही अंतरिक्ष में लाखों मील दूर एस्ट्रोनॉट्स की एक टीम भेजना वाला है। यह प्रोजेक्‍ट 2030 तक तैयार हो सकता है।

 

एडवांस्ड टेक्नोलॉजी लार्ज अपर्चर स्पेस टेलिस्कोप (एटीएलएसटी) दुनिया का सबसे शक्तिशाली दूरबीन होगा। ये दूरबीन ग्रहों के वातावरण और 30 प्रकाश वर्ष दूर तक की सौर प्रणाली का विश्लेषण करने में सक्षम होगा। माना जा रहा है कि ये दूरबीन एस्ट्रोनोमर्स के लिए निर्णायक साबित होगा।

 

दुनिया का सबसे बड़ा दूरबीन

दूरबीन के जरिए ये पता लगाना आसान होगा कि अंतरिक्ष के अनदेखे क्षेत्रों में अलौकिक जीवन मौजूद है या नहीं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ग्रहों का विश्लेषण करने में सक्षम ये दूरबीन 44 फीट वाले हबल स्पेस टेलिस्कोप से चार गुना ज्यादा बड़ा होगा।

 2030 तक एलियंस का पता लगा लेगा दुनिया का सबसे बड़ा दूरबीन 

दूरबीन के अंदर 52 फीट व्यास का एक शीशा होगा, जो धरती पर किसी भी मानव द्वारा निर्मित सबसे बड़ा आइना होगा। चूंकि दूरबीन का आकार इतना बड़ा है कि इसे कोई भी रॉकेट स्पेस में ले जाने में अक्षम है। लिहाजा, नासा ओरियन रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में एस्ट्रोनॉट की एक टीम भेजेगी, जो वहां जाकर दूरबीन को असेम्बल करेगी। बता दें कि ये दूरबीन धरती से 10 लाख मील की दूरी पर होगा।

 एलियंस की तलाश करेगी दुनिया की सबसे शक्तिशाली दूरबीन, 16 लाख किमी के सफर पर रवाना

2030 तक तैयार होगा दूरबीन

नासा के इस प्रोजेक्ट की डिटेल का खुलासा, इस हफ्ते पोर्ट्समाउथ में होने वाली नेशनल एस्ट्रोनॉमी मीटिंग में किया जाएगा। ये जानकारी रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी के अध्यक्ष मार्टिन बार्स्तो देंगे। बार्स्तो के मुताबिक, ये टेलिस्कोप एस्ट्रोनोमर्स को लगभग 60 नए ग्रहों को एक्सप्लोर करने में मदद करेगा। साथ ही ऑक्सीजन और अन्य गैसों के स्तर के बारे में जानकारी प्रदान कर वहां संभावित जीवन होने का संकेत भी देगा।बार्स्तो ने एक अंग्रेजी अखबार को बताया, "यह टेलिस्कोप जीवन की संभावनाओं के लिए पृथ्वी जैसे ग्रहों की पड़ताल करेगा। यह कितना शक्तिशाली होगा इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह 30 प्रकाश वर्ष की दूरी तक के ग्रहों का विश्‍लेषण करने में सक्षम होगा। उन्‍होंने कहा क‍ि सबसे बड़ी अंतरिक्ष एजेंसी होने के नाते नासा के लिए इस प्रोजेक्‍ट को लीड करना जरूरी है और हमें उम्‍मीद है क‍ि यह प्रोजेक्ट 2030 तक पूरा हो जाएगा

sabhar : bhaskar.com

 एलियंस की तलाश करेगी दुनिया की सबसे शक्तिशाली दूरबीन, 16 लाख किमी के सफर पर रवाना

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