
By Jacob Gallagher from NYT Style https://ift.tt/dU7A82S
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★ मूली खाने का सबसे बडा फायदा
पेट में गैस तो बिल्कुल नहीं रहती है.
★ डायबिटीज से छुटकारा मिलता है.
★ जुखाम रोग भी नही होता है,
इसीलिए मूली को सलाद के रूप में
जरूर खाना चाहिए.
★ मूली पर काला नमक डालकर
खाने से भूख न लगने की समस्या
दूर हो जाती है.
★ मूली से हमें विटामिन ए मिलता है,
जिससे हमारे दाँतो को
मजबूती मिलती है.
★ मूली खाने से बाल झड़ने की समस्या
दूर हो जाती है.
★ बवासीर रोग में कच्ची मूली या
मूली के पत्तो की सब्जी बनाकर खाना
लाभप्रद होता है.
★ अगर पेशाब का बनना बंद हो जाये
तो मूली का रस पीने से
पेशाब दोबारा बनने लगता है.
★ हर-रोज 1 कच्ची मूली
सुबह उठते ही खाने से
पीलिया रोग में आराम मिलता है.
★ मधुमेह का खतरा भी कम रहता है.
★ खट्टी डकारें आती हैं, तो
मूली के 1 कप रस में
मिश्री मिलाकर पीने से
लाभ मिलता है.
★ नियमित रूप से मूली खाने से
मुँह, आँत और किडनी की
कैंसर का खतरा कम रहता है.
★ थकान मिटाने और नींद लाने में भी
मूली सहायक है.
★ मोटापा दूर करने के लिए
मूली के रस में नींबू और नमक
मिलाकर सेवन करें.
★ पायरिया से परेशान लोग
मूली के रस से दिन में 2-3 बार
कुल्ले करें और इसका रस पिएं.
★ सुबह-शाम मूली का रस पीने से
पुराने कब्ज में भी लाभ होता है.
★ मूली के रस में समान मात्रा में
अनार का रस मिलाकर पीने से
हीमोग्लोबिन बढ़ता है.
★ मूली को धीरे-धीरे चबाकर खाने से
दाँत चमकते हैं, और शरीर से
दाग-धब्बे भी दूर हटते हैं.
★ मूली खाने से हमारी
आँखों की रोशनी भी बढ़ती है.
★ ब्लड प्रैशर कंट्रोल में रहता है.
★ हाथ-पैरों के नाख़ूनों का रंग
सफ़ेद हो जाए तो
मूली के पत्तों का रस पीना
लाभदायक है.
★ मूली के नरम पत्तों पर
सेंधा नमक लगाकर खाने से
मुँह की दुर्गंध दूर होती है.
★ मूली के पत्तों में सोडियम होता है,
जो हमारे शरीर में
नमक की कमी को पूरा करते हैं.
★ पेट के कीडे नष्ट हो जाते हैं. साभार diflx facebook wall
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1⭐ शिशिर ऋतू में ( 14 जनवरी से 13 मार्च) 5 ग्राम त्रिफला को आठवां भाग छोटी पीपल का चूर्ण मिलाकर सेवन करें।
2⭐ बसंत ऋतू में (14 मार्च से 13 मई) 5 ग्राम त्रिफला को बराबर का शहद मिलाकर सेवन करें।
3⭐ ग्रीष्म ऋतू में (14 मई से 13 जुलाई ) 5 ग्राम त्रिफला को चोथा भाग गुड़ मिलाकर सेवन करें।
4⭐ वर्षा ऋतू में (14 जुलाई से 13 सितम्बर) 5 ग्राम त्रिफला को छठा भाग सैंधा नमक मिलाकर सेवन करें।
5⭐ शरद ऋतू में(14 सितम्बर से 13 नवम्बर) 5 ग्राम त्रिफला को चोथा भाग देशी खांड/शक्कर मिलाकर सेवन करें।
6⭐ हेमंत ऋतू में (14 नवम्बर से 13 जनवरी) 5 ग्राम त्रिफला को छठा भाग सौंठ का चूर्ण मिलाकर सेवन करें।
ओषधि के रूप में त्रिफला
⭐ रात को सोते वक्त 5 ग्राम (एक चम्मच भर) त्रिफला चुर्ण हल्के गर्म दूध अथवा गर्म पानी के साथ लेने से कब्ज दूर होता है।
अथवा त्रिफला व ईसबगोल की भूसी दो चम्मच मिलाकर शाम को गुनगुने पानी से लें इससे कब्ज दूर होता है।
इसके सेवन से नेत्रज्योति में आश्चर्यजनक वृद्धि होती है।
⭐ सुबह पानी में 5 ग्राम त्रिफला चूर्ण साफ़ मिट्टी के बर्तन में भिगो कर रख दें, शाम को छानकर पी ले। शाम को उसी त्रिफला चूर्ण में पानी मिलाकर रखें, इसे सुबह पी लें। इस पानी से आँखें भी धो ले। मुँह के छाले व आँखों की जलन कुछ ही समय में ठीक हो जायेंग।
⭐ शाम को एक गिलास पानी में एक चम्मच त्रिफला भिगो दे सुबह मसल कर नितार कर इस जल से आँखों को धोने से नेत्रों की ज्योति बढती है।
⭐ एक चम्मच बारीख त्रिफला चूर्ण, गाय का घी10 ग्राम व शहद 5 ग्राम एक साथ मिलाकर नियमित सेवन करने से आँखों का मोतियाबिंद, काँचबिंदु, द्रष्टि दोष आदि नेत्ररोग दूर होते है। और बुढ़ापे तक आँखों की रोशनी अचल रहती है।
⭐ त्रिफला के चूर्ण को गौमूत्र के साथ लेने से अफारा, उदर शूल, प्लीहा वृद्धि आदि अनेकों तरह के पेट के रोग दूर हो जाते है।
⭐ त्रिफला शरीर के आंतरिक अंगों की देखभाल कर सकता है, त्रिफला की तीनों जड़ीबूटियां आंतरिक सफाई को बढ़ावा देती हैं।
⭐ चर्मरोगों में (दाद, खाज, खुजली, फोड़े-फुंसी आदि) सुबह-शाम 6 से 8 ग्राम त्रिफला चूर्ण लेना चाहिये।
⭐ मोटापा कम करने के लिए त्रिफला के गुनगुने काढ़े में शहद मिलाकर ले।त्रिफला चूर्ण पानी में उबालकर, शहद मिलाकर पीने से चरबी कम होती है।
त्रिफला, शहद और घृतकुमारी तीनो को मिला कर जो रसायन बनता है वह सप्त धातु पोषक होता है। त्रिफला रसायन कल्प त्रिदोषनाशक, इंद्रिय बलवर्धक विशेषकर नेत्रों के लिए हितकर, वृद्धावस्था को रोकने वाला व मेधाशक्ति बढ़ाने वाला है। दृष्टि दोष, रतौंधी (रात को दिखाई न देना), मोतियाबिंद, काँचबिंदु आदि नेत्ररोगों से रक्षा होती है और बाल काले, घने व मजबूत हो जाते हैं।
दो माह तक सेवन करने से चश्मा भी उतर जाता है।
विधिः👉 500 ग्राम त्रिफला चूर्ण, 500 ग्राम देसी गाय का घी व 250 ग्राम शुद्ध शहद मिलाकर शरदपूर्णिमा की रात को चाँदी के पात्र में पतले सफेद वस्त्र से ढँक कर रात भर चाँदनी में रखें। दूसरे दिन सुबह इस मिश्रण को काँच अथवा चीनी के पात्र में भर लें।
सेवन-विधि👉 बड़े व्यक्ति10 ग्राम छोटे बच्चे 5 ग्राम मिश्रण सुबह-शाम गुनगुने पानी के साथ लें दिन में केवल एक बार सात्त्विक, सुपाच्य भोजन करें। इन दिनों में भोजन में सेंधा नमक का ही उपयोग करे। सुबह शाम गाय का दूध ले सकते हैं।सुपाच्य भोजन दूध दलिया लेना उत्तम है कल्प के दिनों में खट्टे, तले हुए, मिर्च-मसालेयुक्त व पचने में भारी पदार्थों का सेवन निषिद्ध है। 40 दिन तक मामरा बादाम का उपयोग विशेष लाभदायी होगा। कल्प के दिनों में नेत्रबिन्दु का प्रयोग अवश्य करें।
मात्राः 4 से 5 ग्राम तक त्रिफला चूर्ण सुबह के वक्त लेना पोषक होता है जबकि शाम को यह रेचक (पेट साफ़ करने वाला) होता है। सुबह खाली पेट गुनगुने पानी के साथ इसका सेवन करें तथा एक घंटे बाद तक पानी के अलावा कुछ ना खाएं और इस नियम का पालन कठोरता से करें ।
सावधानीः👉 दूध व त्रिफला के सेवन के बीच में दो ढाई घंटे का अंतर हो और कमजोर व्यक्ति तथा गर्भवती स्त्री को बुखार में त्रिफला नहीं खाना चाहिए।
घी और शहद कभी भी सामान मात्रा में नहीं लेना चाहिए यह खतरनाख जहर होता है ।
त्रिफला चूर्ण के सेवन के एक घंटे बाद तक चाय-दूध कोफ़ी आदि कुछ भी नहीं लेना चाहिये।
त्रिफला चूर्ण हमेशा ताजा खरीद कर घर पर ही सीमित मात्रा में (जो लगभग तीन चार माह में समाप्त हो जाये ) पीसकर तैयार करें व सीलन से बचा कर रखे और इसका सेवन कर पुनः नया चूर्ण बना लें। साभार मधु सिंह फेस बुक वॉल
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