
By David Gelles from NYT Climate https://ift.tt/DlxBzkb
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परिवर्तन संसार का नियम है जागो देवियों खुद को पहचानो जो पुरुष आपके अस्तित्व को नकारते व उपभोग का संसाधन मात्र समझते है सह्योग देना बंद कर दीजिए कमी है आपकी सरलता को कमजोरी समझा आपके समर्पण त्याग को वैल्यू नही किया गया तो त्यग दीजिये ऐसे बुद्धिजीवी पुरुष समाज को नीव रखिये एक सभ्य समाज की अपनी शर्तों पर स्वत्रन्त्र सोच के साथ उल्टी प्रथाओं पर रोक लगाइए की बेटी भी पिता दे दहेज भी पिता दे आजीवन मुफ़्त का नोकर भी उपलब्ध हो ..😂 भयंकर शोषण हुआछल हुआ आपकी भावनाओं के साथ आपके झूठी प्रशंसा करके मुफ़त की सर्विस ली गयी आपसे
पुरुष व्यवसायिक स्तर की सोच के साथ महिला का भरपुरुपयोग करता है तन से मन से धन से
आपको क्या मिलता है भारतीय देवियों कुछ तो सोचो
सिर्फ शोषण
नारी शोषण बन्द होगा आप जागरूक बने
ईश्वर की कृति स्त्री व पुरुष दोनों एक दूसरे के पूरक व प्रेरक है
पुरुष की बनाई सामाजिक व्यवस्था व अर्थ व्यवस्था में नारी को मांनसिक गुलाम बनाकर रखा गया
जो दुख झेल रही निशित ही समाज व्यवस्था की सताई अजागरुक महिला है
क्योंकि प्रहार उसकी मानसिक सोच पर किया गया
सरल के साथ सरल बने जटिल के लिए महाजटिल बने
""खुद को #vailue कीजिये @देवियों
#जिंदगी अपनी शर्तों पर जिये #समझौते पर नही"!! साभार ऋतु सिसोदिया
महाकवि कालिदास द्वारा रचित महाकाव्य 'रघुवंशम्' (Raghuvaṃśa) लगभग 1,600 वर्ष पुराना है। इसके लेखन का काल और यह किस माध्यम व विषय पर ...