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शनिवार, 23 जनवरी 2021

व्यापक ब्रह्मांड

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विज्ञान का सफर आदि काल से शुरू हो गया था | जब मनुष्य कृषि और पत्थर के औंजारो का प्रयोग किया विज्ञान ने जहा हमे तकनीको के द्वार खोल कर जीवन को सरल एवं सुगम्य बनाया है परंतु अध्यात्म के विना जीवन मे शांती नहीं मिल सकती कही ना कही विज्ञान और अध्यात्म एक हो जाते है आगे देखे कैसे तकनीक ने हमारा जीवन आसान कर दिया है विज्ञान और आत्मा इस सिद्धांत के अनुसार हमारी आत्मा का मूल स्थान मस्तिष्क की कोशिकाओं के अंदर बने ढांचों में होता है जिसे माइक्रोटयूबुल्स कहते हैं। दोनों वैज्ञानिकों का तर्क है कि इन माइक्रोटयूबुल्स पर पड़ने वाले क्वांटम गुरुत्वाकर्षण प्रभाव के परिणामस्वरूप हमें चेतनता का अनुभव होता है। वैज्ञानिकों ने इस सिद्धांत को आर्वेक्स्ट्रेड ऑब्जेक्टिव रिडक्शन (आर्च-ओर) का नाम दिया है। इस सिद्धांत के अनुसार हमारी आत्मा मस्तिष्क में न्यूरॉन के बीच होने वाले संबंध से कहीं व्यापक है। दरअसल, इसका निर्माण उन्हीं तंतुओं से हुआ जिससे ब्रह्मांड बना था। यह आत्मा काल के जन्म से ही व्याप्त थी। अखबार के अनुसार यह परिकल्पना बौद्ध एवं हिन्दुओं की इस मान्यता से काफी कुछ मिलती-जुलती है कि चेतनता ब्रह्मांड का अभिन्न अंग है। इन परिकल्पना के साथ हेमराफ कहते हैं कि मृत्यु जैसे अनुभव में माइक्रोटयूबुल्स अपनी क्वांटम अवस्था गंवा देते हैं, लेकिन इसके अंदर के अनुभव नष्ट नहीं होते। आत्मा केवल शरीर छोड़ती है और ब्रह्मांड में विलीन हो जाती है। हेमराफ का कहना है कि हम कह सकते हैं कि दिल धड़कना बंद हो जाता है, रक्त का प्रवाह रुक जाता है, माइक्रोटयूबुल्स अपनी क्वांटम अवस्था गंवा देते हैं, माइक्रोटयूबुल्स में क्वांटम सूचनाएं नष्ट नहीं होतीं। ये नष्ट नहीं हो सकतीं। यह महज व्यापक ब्रह्मांड में वितरित एवं विलीन हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि यदि रोगी बच जाता है तो यह क्वांटम सूचना माइक्रोटयूबुल्स में वापस चली जाती है तथा रोगी कहता है कि उसे मृत्यु जैसा अनुभव हुआ है। हेमराफ यह भी कहते हैं कि यदि रोगी ठीक नहीं हो पाता और उसकी मृत्यु हो जाती है तो यह संभव है कि यह क्वांटम सूचना शरीर के बाहर व्याप्त है। हमारे पौराणिक एवं धार्मिक पुस्तको मे अनन्त सृष्टि की कल्पना की गयी है | ईश्वर को अनन्त माना गया है , और उसकी लीलाओ को अनन्त कहा गया है | धर्म के अनुसार ईश्वर का वास हर कण मे है और उसकी माया अनन्त है विज्ञान भी अब एक से ज्यादे विश्‍व को मानने लगा है | राजर पेनरोज़ जो की गणितग्य है लेकिन खगौल विज्ञान मे उनका महत्वा पूर्ण योगदान है | उन्होने अपनी पिछली पुस्तक “द एम्पर्स न्यू माएंड ” मस्तिष्क और चेतना को लेकर थी , जी बहूत चर्चित हुई थी |उनकी नयी किताब ” साएकल्स आफ टाईम : एन एक्सट्रा आर्डनरी न्यू आफ द यूनिवर्स ” मे नयी अवधारणा के मुताबिक ब्रमांड अनन्त है वह कभी नष्ट नहीं होता उसमे उसमे अनन्त कल्पो के चक्र एक के बाद आते रहते है |आम तौर पर विज्ञान मे प्रचलित है की सृष्टि का आरंभ एक विग बैक या बड़े विस्फोट से हुई है , इसके बाद ब्रमांड फैलता गया जो अब भी फैल रहा है एक समय के बाद ब्रमांड के फैलने की उर्जा समाप्त हो जायेगी और ब्रमांड पुनः छोटे से बिन्दु पे आ जायेगी | पेनरोज़ की अवधारणा इससे विल्कुल अलग है वह समय के चक्र की अवधारणा सामने रखते है उनका कहना है की एक ‘एओन ‘ या कल्प की समाप्ति ब्रमांड की ऊर्जा खत्म होने के साथ होती है पर ब्रमांड सिकुड़ कर खत्म नहीं हो जाता ऊर्जा खत्म होने से ब्रमांड की मास या द्रब्यमान समाप्त हो जाता है, द्रब्यमान समाप्त होने से समय काल मे कोई भेद नहीं रह जाता |जब मास ही नहीं होता तो भूत भविष्य , छोटा बड़ा ये सारी अवधारणाये खत्म हो जाती है एक अर्थ मे ब्रमांड की अपनी विशालता की स्मृति खत्म हो जाती है , तब यह अंत अगले बिग बैंक की शुरूआत होती है |और यह अनन्त काल तक जारी रहता है इसके लिये उन्होने कयी प्रमाण दिये है हालांकि वो कहते है की इसमे अभी और काम करने की आवश्कता है क़्वाण्टम मेकेनिक्स से भी से भी अनेक सृष्टि की अवधारणा मिलती है | भौतिक के स्ट्रिंग सिधांत के अनुसार चार आयाम के अलावा भी कई आयाम है ये सारे आयाम हमारी दुनिया मे कयी दुनिया बनाते है और इन दुनियाओ का आपस मे सम्बंध गुरुत्वा कर्षण के कारण होता है | जो तमाम स्तरों पर एक ही होता है तो क्या वैज्ञानिक कही ना कही ईश्वर की अवधारणा को स्वीकार तो नहीं कर रहे स्वय विचार करे

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चमकदार मशरूम की खोज

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ब्राजील के वर्षा वनों में वैज्ञानिकों को फिर से वह मशरूम मिल गई है जो 1840 के बाद से नहीं देखी गई थी इस चमकदार मशरूम की खोज सन फ्रांसिस्को स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक डेनिस डेस जार्डिन और उनक टीम द्वारा की गई है या मशरूम अंधेरे में इतनी तेजी से चमकती है कि उसके प्रकाश में अखबार पढ़ा जा सकता है शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि इसकी खोज के बाद वे इस बात का पता लगाने में सफल होंगे कि क्यों कुछ फंगस में चमकने की क्षमता होती है वैज्ञानिकों ने इस मशरूम को फिर से नियमों को पाना गार्डनर के नाम से वर्गीकृत किया है न्यू नोट ओपनस गार्डनर को आखरी बार 1840 में ब्रिटिश वनस्पति विज्ञानी जॉर्ज गार्डनर ने तब देखा था जब कुछ बच्चे इस प्रकार चमकदार मशरूम से खेल रहे थे इस मशरूम के हरे प्रकाश का पता लगाने के लिए डॉ डेस जारटिन और उनके सहयोगियों को कई सप्ताह तक अंधेरी रातों में ब्राजील के जंगलों में भटकना पड़ा तथा डिजिटल कैमरों की मदद से वे रात में चमक रहे इस मशरूम की फोटो कैमरे में उतारने में सफल रहे जेलीफिश और जुगनू ऐसे ही कुछ जंतु है जो चमक पैदा करते हैं बैटरी ओं से संगी संगी और मछली से की रासायनिक प्रक्रिया के द्वारा इस तरह चमक पैदा करते हैं लेकिन खोजे के मसलों को लेकर अभी यह स्पष्ट नहीं है या किस प्रकार अंधेरे में चमक पैदा करता है

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रविवार, 16 फ़रवरी 2014

स्वास्थ्य के लिए चमत्कारी स्टेम सेल

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रूसी डाक्टरों ने निराशाजनक स्थिति में पहुँच चुके कैंसर रोगियों को पुनः पैरों पर खडा करने की तरकीब ढूंढ निकाली है| पश्चिमी साइबेरिया के एक छोटे नगर युगरा के डाक्टर स्टेम सेल की मदद से रक्त कैंसर का सफलतापूर्वक इलाज कर रहे हैं| इन जादुई स्टेम सेलों से किसी भी प्रकार के यानी लीवर, हड्डी या रक्त आदि के सेल बनाए जा सकते हैं| दिमित्री कुदाश्किन पहले ऐसे रोगी थे, जिनकी कोशिकाओं का प्रत्यार्पण कर युगरा में पहली बार तीन साल पहले ऐसा इलाज किया गया था| 32 वर्ष की उम्र में दिमित्री मल्टीप्ल मिएलोमा रोग के शिकार पाए गए थे| मल्टीप्ल मिएलोमा रक्त की सबसे घातक बीमारियों में से एक है| उनके बचने की लगभग कोई उम्मीद नहीं रह गयी थी|उनके सेल प्रत्यार्पण आपरेशन के बाद अब तक तीन साल बीत चुके हैं| इस दौरान युगरा के डाक्टर 34 और सफल सेल प्रत्यार्पण आपरेशन कर चुके हैं| वर्तमान में सभी रोगी खुद को स्वस्थ बता रहे हैं, लेकिन डाक्टर इस बात से इनकार नहीं करते कि जोखिम अभी भी बने हुए हैं| युगरा स्वास्थ्य विभाग के उप-निदेशक सेर्गेई शूकिन बताते हैं कि उन रोगियों की संख्या निरंतर बढ़ती ही जा रही है, जिन्हें सेल प्रत्यार्पण की आवश्यकता है| वह आगे कहते हैं:इस बीमारी का इलाज स्टेम सेल प्रत्यार्पण विधि से करना वर्तमान में न केवल रूस में बल्कि समस्त दुनिया में एकमात्र सफल तरीका माना जा रहा है| इस इलाज में लगभग चार लाख बीस हज़ार डालर लगते हैं| लेकिन हमारे यहाँ युगरा में यह इलाज हम मुफ्त में करते हैं| स्थानीय राजकीय कोष से इसके लिए फंड आबंटित किया जाता है|स्टेम सेल प्रत्येक शरीर में पाए जाते हैं| मनुष्य जब सोता है तब यह सेल क्षतिग्रस्त टिशू और अंगों की बहाली का काम करते हैं| लेकिन उम्र के साथ साथ शरीर में यह सेल घटते जाते हैं| जन्म के समय गर्भनाल रक्त में प्रत्येक दस हज़ार दूसरी कोशिकाओं में एक स्टेम सेल होता है, सोलह साल की उम्र में पांच लाख दूसरी कोशिकाओं के बीच एक तथा पचास वर्ष की आयु में दस लाख दूसरी कोशिकाओं के बीच एक स्टेम सेल पाया जाता है| युगरा के डाक्टर स्टेम सेल पर चार साल से अधिक से काम कर रहे हैं| युगरा के पड़ोसी नगर खांती-मान्सीस्किए में एक निम्नताप भंडारण बनाया गया है| वहां पर स्टेम सेल को तरल नाइट्रोजन में -196 डिग्री सेंटीग्रेड के तापमान पर रखा जाता है| ज़रुरत पड़ने पर भंडारण में रखे स्टेम सेल का इस्तेमाल दस वर्ष बाद भी किया जा सकता है- ऐसा युगरा सेल टेक्नोलॉजी विज्ञान एवं शोध संस्थान के उप-निदेशक सेर्गेई पनामार्योव का कहना है| वह बताते हैं:हमारे यहाँ गर्भनाल रक्त के लगभग 150 नमूने संरक्षित हैं| यह नमूने स्वस्थ गर्भवती महिलाओं के हैं| शिशु जन्म के समय इन महिलाओं की स्वीकृति से यह नमूने हमारे बैंक में संग्रहित किये गए ताकि उनका भविष्य में इस्तेमाल किया जा सकेस्टेम कोशिकाओं को त्वचा, चर्बी या बालों से प्राप्त करना एक बहुत ही मुश्किल और महंगा काम है| इसलिए मनुष्य को गर्भनाल रक्त के रूप में प्रकृति से प्राप्त खजाने को संरक्षित रखने की आवश्यकता है| गर्भनाल रक्त स्टेम सेल प्राप्ति का उत्तम साधन होने के बावजूद भी दुर्भाग्यवश अवशेष की तरह नष्ट कर दिया जाता है| इन कोशिकाओं का प्रत्यार्पण अस्वस्थ मनुष्य के रक्त में करना ही पर्याप्त होता है, बाद में वह खुद ही तकलीफदायक जगह को ढूंढ निकालने में सक्षम हैं| यह इलाज उनके लिए शत प्रतिशत सफल सिद्ध होता है, जिनके जन्म के समय स्टेम सेल को संग्रहित किया गया होता है साथ ही उनके सगे भाईयों और बहनों के लिए भी यह उतने ही सफल परिणाम देता है| sabhar :http://hindi.ruvr.ru

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शुक्रवार, 1 जुलाई 2011

वंडर ड्रग्स करेगी कैंसर को ख़त्म

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वंडर ड्रग्स नामक यह गोली सभी प्रकार के कैंसर को खत्म करेगी | इसे खोजा है ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने न्यू कासल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिको ने बताया की यह सभी प्रकार क कैंसर को ठीक कर सकती है | इस गोली का कोई साएड इफेक्ट नहीं है यह गोली काफी महँगी है करीब २४०० यूरो की एक महीने की दवा का दाम पड़ेगा तथा छः महीने की दवा लेनी पड़ेगी पर बाद में धीरे धीरे इसका मूल्य कम हो जायेगा आम आदमी की पहुँच में हो जायेगा |

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बुधवार, 2 फ़रवरी 2011

एड्स को रोकने वाली क्रीम की खोज

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वैज्ञानिको ने एक ऐसी क्रीम की खोज की है जो एड्स की रोकथाम में कारगर होगी इस क्रीम का इस्तेमाल केवल महिलाए कर सकेंगी लेकिन यौन सम्बन्ध बनाने पर पुरूष या महिला किसी को भी एड्स है तो पार्टनर के एड्स होने का खतरा नहीं रहेगा इस क्रीम पर शोध दछिण अफ्रीका में हुआ है इस क्रीम के उत्पादन की मंजूरी दे दी गयी है और शिग्र ही बाजार में आ जाएगी हाल ही में आस्ट्रिया में हुयी इंटर नॅशनल एड्स कांफ्रेंस में इस क्रीम पर हुए शोध पर सफलता की जानकारी दी गयी इस क्रीम को अबतक सबसे कारगर तरीको में से एक है जो एड्स रोक सकती है क्रीम का निर्माण उन्ही एंटी वाइरल दवाओं के फार्मूले पर किया गया है जो एड्स होने पर दी जाती है

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शुक्रवार, 24 दिसंबर 2010

टच स्क्रीन आप के कलाई पर होगा

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वैज्ञानिक युग के क्या संभव हो जाएगा यह कहा नहीं जा सकता है अब टच स्क्रीन के सम्बन्ध में इक क्रांती आ गयी है जो कलाई पर होगा, वैज्ञानिको के अन्तराष्ट्रीय दल ने इस तकनीक का नाम दिया है ' स्कीन पुट' यह उपकरण ब्यक्ति के हाथ में कलाई से कोहनी तक के हिस्से को टच स्क्रीन में बदल देगा चाहे मनपसंद संगीत सुनना हो या काल मिलानी हो , ब्यक्ति को दूसरे हाथ की उंगलियों से इस हिस्से की त्वचा को छूना भर होगा यह उपकरण ध्वनिक सेंसर और मिनी प्रोजेक्टर से चलेगा इसे ब्लू ट्रुथ जैसी वायर लेस सेवा से आसानी से जोड़ा जा सकेगा इसको तकनीक के जरिए मोबाईल , कम्पूटर , आई पाड, से आसानी से जोड़ा जा सकता है

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सोमवार, 29 नवंबर 2010

दुनिया का पहला सिंथेटिक पेड़

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अमेरिकी वैज्ञानिको ने दुनिया का पहला सिंथेटिक पेड़ बनाया है कर्नेल स्थित एक प्रयोगशाला में इस पेड़ को ट्रांसिपिरेसन से बनाया गया ट्रांसिपिरेसन से ही नमी पेड़ो की उची शाखाओ को पहुचती है पत्रिका नेचर के अनुसार इस खोज से पेड़ पौधे में ट्रांसपिरेसन की उस पुरानी थ्योरी को बल मिलता जिसमे कहा है की यह पूरी तरह भौतिक प्रक्रिया है और इसमे किसी जैविक ऊर्जा की जरूरत नहीं होती इससे कार इमारतों के तापमान के स्थान्तरण और मिट्टी को उपजाऊ बनाने में मदद मिल सकती है इससे आंशिक तौर पर सुखी जमीन से पानी निकालने में मदद मिल सकती है

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शनिवार, 20 नवंबर 2010

नयनो वाकर की खोज

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अमेरिकी वैज्ञानिको ने पहली बार मनुष्य की भांति चलने वाला अणु डिजाईन किया है जिसे नयनो वाकर नाम दिया गया है नयनो वाकर के माध्यम से बहुत सी सुचनाये छोटे से चिप में एकत्र की जा सकती है वैज्ञानिको के अनुसार सूछ्म अणु के सपाट पर मनुष्य की भांति सीधा चलना अदभुत है इससे पुरे विश्व जहाँ हम रहते है की नक़ल नयनो मीटर से स्केल से उतारी जा सकती है ९, १० डि डि ऐ को जोड़ने वाले तत्व पैरो का काम करते है उष्मा मिलते यह सक्रिय होजाता है और उससे चलने फिरने की उर्जा मिलने लगती है डिडिऐ बिना नयनो रेल या नयनो ग्रुब्स के सपाट सतह पर मनुष्य की तरह चल सकता है नयनो वाकर पहली बार १००००० से अधिक कदम चला जहाँ तक डिडिऐ का प्रश्न है इसे मनुष्य की तरह चलने फिरने के लिए किसी सहारे कीजरूरत नहीं होती

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रविवार, 3 अक्टूबर 2010

बिना चीरे के होगी मस्तिष्क की सर्जरी

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मस्तिष्क की सर्जरी के लिए अब डाक्टरों को चीरा लगाने की जरूरत नहीं होगी वैज्ञानिको ने कहा गामा नाइफ नामक उपकरण से विना चीरा लगाये मस्तिष्क की सर्जरी की जा सकती है वैज्ञानिको का दावा है की वे अब बिना चीर फाड़ किये मस्तिष्क कैंसर से पीड़ित मरीजो के मस्तिष्क की नेयुरोलाजिकल सर्जरी कर सकते है सिडनी स्थित मैक्वायर विश्व विद्यालय अस्पताल ने गामा नाइफ का उपयोग कर पहली बार सर्जरी की यह उपकरण मस्तिष्क कैंसर और मस्तिष्क सम्बंधित कई बीमारियों के इलाज के लिए एक महत्वपूर्ण साधन है न्यूरो सर्जन डा जान फ्यूलर ने कहा गामा नाइफ से सर्जरी अपने आप में पहली सरजरी है और बताया की इलाज के दौरान मरीज होश में था इसमे हेलमेट नुमा उपकरण मरीज के सर पर पहना कर कोबाल्ट -६० स्रोतों के विकिरण पुंज को मस्तिष्क के भीतरी लछ्य पर डाला जाता है इसका अविष्कार स्वीडन के लार्स लेक्सेल ने १९६७ में किया था

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शनिवार, 7 अगस्त 2010

कपड़ो से पैदा होगी बिजली

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जल्द ही बाजारों में नैनो फाइबर से बने पावर सूट उपलब्ध होंगे वैज्ञानिको ने हमारी जीवन सैली में क्रांती ला दी है उन्होंने इंसान की सुख सुबिधा के लिए ऐसे उपकरण इजाद किये है जो सस्ते टिकाओ और आसानी से इस्तमाल किये जा सकते है अब अमेरिकी शोधकरता पावर सूट यानी ऐसा कपड़ा बना रहे है जो सरीर से निकली उर्जा को विजली में बदल देगा ये कपडे फिबर नैनो जनरेटर से बने होंगे कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में मेकनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर लिविलिन ने कहा की हमने यांत्रीक उर्जा को विदुत उर्जा में बदलने वाले नैनो फायबर विकसीत किये है नैनो फाइबर में पैजोइलेक्ट्रीक का गुण होता है जो उठते बैठते टहलने या घुमने के दौरान शरीर से निकली उर्जा को ग्रहण कर विजली में बदल देगा इससे मोबाईल आईपाड और अन्य छोटे उपकरण कही और कभी भी चार्ज हो जायेंगे ऐसे स्मार्ट क्लोथ पहनने से करंट लगाने का डर नहीं होगा मुख्या शोधकर्ता चेह चंग के मुताबीक लचीले नंगे फाइबर को कपडे की तरह आसानी से बुना जा सकता है

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सोमवार, 5 अप्रैल 2010

इलैक्ट्रानिक स्किन का निर्माण

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इलैक्ट्रानिक स्किन का अविष्कार यूनिवर्सिटी ऑफ नेब्रास्का के रवि सराफ ने किया यह वास्तव में कागज़ से भी हजार गुना पतली फिल्म है जिसमे सोने और कैडमियम सैल्फाएद के सूछ्म कणों की परते अवस्थीत हैं विदुत की सुचालक इन परतो के बीच में कुचालक प्लास्टीक स्तर है साइंस पत्रिका में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक जैसे ही फिल्म में विदुत धारा प्रवाहित की जाती है दबाव विन्दुओं पर चालकता badane लगती है जिससे सूछ्म तत्व चमकने लगते हैं दबाव जितना अधिक होगा चमक उतनी ही अधिक होगी सराफ के मुताबिक़ इलैक्ट्रानिक स्किन के चलते रोबट की स्प़शानुभूति में कई गुना इजाफा होगा

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