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शुक्रवार, 14 जुलाई 2023

स्मार्ट महिलाएं शादी नहीं करतींः जापान में बदलाव की कोशिश

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 जापान में महिलाओं द्वारा विज्ञान के विषयों में करियर ना बनाने पर देश काफी चिंतित है. कई कोशिशें की जा रही हैं ताकि रूढ़िवादी सोच को बदला जा सके.



स्मार्ट महिलाएं शादी नहीं करतींः जापान में बदलाव की कोशिश


जापान में महिलाओं द्वारा विज्ञान के विषयों में करियर ना बनाने पर देश काफी चिंतित है. कई कोशिशें की जा रही हैं ताकि रूढ़िवादी सोच को बदला जा सके.


https://www.dw.com/hi/smart-girls-dont-marry-japan-rushes-to-erase-stigma-for-women-in-science/a-66196266


जापान के सबसे अच्छे इंजीनियरिंग कॉलेजों में से एक में थर्ड ईयर की छात्रा युना कातो रिसर्च में अपना करियर बनाना चाहती हैं. लेकिन उन्हें डर है कि अगर उनके बच्चे हुए तो उनका करियर बहुत छोटा हो जाएगा.


कातो कहती हैं कि उनके रिश्तेदारों ने उन्हें विज्ञान, तकनीकी, इंजीनियरिंग और गणित जैसे विषयों से दूर रहने की सलाह दी थी क्योंकि वे मानते हैं कि इन विषयों में करियर बनाने वाली महिलाओं की जिंदगी बहुत व्यस्त होती है इसलिए उन्हें लोगों से मिलने-जुलने या फिर पतियों के लिए समय निकालने की फुर्सत नहीं मिलती.


कातो कहती हैं, "मेरी दादी और मां अक्सर मुझे कहती थीं कि अगर मैं बच्चे चाहती हूं तो विज्ञान से अलग किसी विषय में करियर बनाऊं.”


हो रहा है नुकसान

अपने दम पर कातो इंजीनियरिंग में इस जगह पहुंच गयी हैं कि अब करियर के बारे में सोचने लगी हैं लेकिन उनके जैसी बहुत सी जापानी महिलाएं ऐसी ही सोच के कारण विज्ञान विषयों को नहीं चुनतीं, जो जापान के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन गया है. सिर्फ आईटी में जापान में 7,90,000 कुशल कर्मचारियों की कमी है. इसकी बड़ी वजह महिलाओं का इस क्षेत्र से दूर रहना 

स्मार्ट महिलाएं शादी नहीं करतींः जापान में बदलाव की कोशिश


जापान में महिलाओं द्वारा विज्ञान के विषयों में करियर ना बनाने पर देश काफी चिंतित है. कई कोशिशें की जा रही हैं ताकि रूढ़िवादी सोच को  Badala ja sake



जापान के सबसे अच्छे इंजीनियरिंग कॉलेजों में से एक में थर्ड ईयर की छात्रा युना कातो रिसर्च में अपना करियर बनाना चाहती हैं. लेकिन उन्हें डर है कि अगर उनके बच्चे हुए तो उनका करियर बहुत छोटा हो जाएगा.


कातो कहती हैं कि उनके रिश्तेदारों ने उन्हें विज्ञान, तकनीकी, इंजीनियरिंग और गणित जैसे विषयों से दूर रहने की सलाह दी थी क्योंकि वे मानते हैं कि इन विषयों में करियर बनाने वाली महिलाओं की जिंदगी बहुत व्यस्त होती है इसलिए उन्हें लोगों से मिलने-जुलने या फिर पतियों के लिए समय निकालने की फुर्सत नहीं मिलती.


कातो कहती हैं, "मेरी दादी और मां अक्सर मुझे कहती थीं कि अगर मैं बच्चे चाहती हूं तो विज्ञान से अलग किसी विषय में करियर बनाऊं.”


हो रहा है नुकसान

अपने दम पर कातो इंजीनियरिंग में इस जगह पहुंच गयी हैं कि अब करियर के बारे में सोचने लगी हैं लेकिन उनके जैसी बहुत सी जापानी महिलाएं ऐसी ही सोच के कारण विज्ञान विषयों को नहीं चुनतीं, जो जापान के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन गया है. सिर्फ आईटी में जापान में 7,90,000 कुशल कर्मचारियों की कमी है. इसकी बड़ी वजह महिलाओं का इस क्षेत्र से दूर रहना है.







5 तस्वीरें

5 तस्वीरें

विशेषज्ञों की चेतावनी है कि पिछली सदी में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बने देश को इसका नुकसान खोज, उत्पादकता और प्रतिद्वन्द्विता में गिरावट के रूप में झेलना पड़ रहा है.


मॉलीक्यूलर बायोलॉजी में पीएचडी कर चुकीं चीनी मूल की शिक्षक यिनुओ ली कहती हैं, "यह बहुत बड़ी बर्बादी है और देश का भारी नुकसान है.” ली एक सफल वैज्ञानिक हैं और विज्ञान विषयों में महिलाओं की आदर्श के तौर पर बार्बी कंपनी ने उनकी हमशक्ल गुड़िया भी बनायी है.


जापान में एक सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत काम कर रहीं तीन बच्चों की मां ली कहती हैं, "अगर लैंगिक संतुलन नहीं होगा तो आपकी तकनीक में बहुत सारी खामियां होंगी.”


पिछड़ रहा है जापान

सबसे धनी देशों की सूची में इंजीनियरिंग या साइंस विषयों की पढ़ाई कर रहीं महिलाओं की संख्या के मामले में जापान सबसे नीचे है. वहां विश्वविद्यालयों में सिर्फ 16 फीसदी महिलाएं हैं. हर सात वैज्ञानिकों में सिर्फ एक महिला वैज्ञानिक है. ऐसा तब है जबकि ओईसीडी के मुताबिक जापान में गणित में लड़कियों के अंक दुनिया में दूसरे नंबर पर हैं जबकि साइंस में तीसरे नंबर पर.


जापान में लाखों लोग अकेला रहना क्यों पसंद कर रहे हैं


फिर भी, लैंगिक समानता के मामले में जापान की रैंकिंग में इस साल रिकॉर्ड गिरावट आयी है. हालांकि देश इस अंतर को पाटने की भरसक कोशिश कर रहा है. 2024 में शुरू होने वाले शिक्षा सत्र में कातो के टोक्यो इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी समेत लगभग एक दर्जन विश्वविद्यालय सरकार की महिलाओं के लिए विज्ञान विषयों में कोटा तय करने की अपील पर अमल करने जा रहे हैं. कई विश्वविद्यालयों ने तो इसी साल से ऐसा शुरू कर दिया था.


यह जापान में एक बड़ा बदलाव होगा जहां कि इस बात को लेकर विवाद हो चुका है कि महिलाओं को जानबूझ कर पीछे रखा जा रहा है. 2018 में तब खासा हंगामा मचा था जब यह बात सामने आई थी कि टोक्यो मेडिकल स्कूल में महिला प्रार्थियों के अंक जानबूझ कर कम किये गये ताकि उन्हें दाखिला ना मिले. एक रिपोर्ट में कहा गया था कि स्कूल के अधिकारियों को लगा कि बच्चों के कारण महिलाओं के करियर अधर में छोड़ने की संभावना ज्यादा है और वे अपनी पढ़ाई को बर्बाद करेंगी

https://p.dw.com/p/4Tkfi

समानताजापान

स्मार्ट महिलाएं शादी नहीं करतींः जापान में बदलाव की कोशिश

12.07.2023१२ जुलाई २०२३

जापान में महिलाओं द्वारा विज्ञान के विषयों में करियर ना बनाने पर देश काफी चिंतित है. कई कोशिशें की जा रही हैं ताकि रूढ़िवादी सोच को बदला जा सके.


https://p.dw.com/p/4Tkfi

जापान में शादी

जापान में शादीतस्वीर: Philip Fong/AFP/Getty Images

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जापान के सबसे अच्छे इंजीनियरिंग कॉलेजों में से एक में थर्ड ईयर की छात्रा युना कातो रिसर्च में अपना करियर बनाना चाहती हैं. लेकिन उन्हें डर है कि अगर उनके बच्चे हुए तो उनका करियर बहुत छोटा हो जाएगा.


कातो कहती हैं कि उनके रिश्तेदारों ने उन्हें विज्ञान, तकनीकी, इंजीनियरिंग और गणित जैसे विषयों से दूर रहने की सलाह दी थी क्योंकि वे मानते हैं कि इन विषयों में करियर बनाने वाली महिलाओं की जिंदगी बहुत व्यस्त होती है इसलिए उन्हें लोगों से मिलने-जुलने या फिर पतियों के लिए समय निकालने की फुर्सत नहीं मिलती.


कातो कहती हैं, "मेरी दादी और मां अक्सर मुझे कहती थीं कि अगर मैं बच्चे चाहती हूं तो विज्ञान से अलग किसी विषय में करियर बनाऊं.”


हो रहा है नुकसान

अपने दम पर कातो इंजीनियरिंग में इस जगह पहुंच गयी हैं कि अब करियर के बारे में सोचने लगी हैं लेकिन उनके जैसी बहुत सी जापानी महिलाएं ऐसी ही सोच के कारण विज्ञान विषयों को नहीं चुनतीं, जो जापान के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन गया है. सिर्फ आईटी में जापान में 7,90,000 कुशल कर्मचारियों की कमी है. इसकी बड़ी वजह महिलाओं का इस क्षेत्र से दूर रहना है.







5 तस्वीरें

5 तस्वीरें

विशेषज्ञों की चेतावनी है कि पिछली सदी में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बने देश को इसका नुकसान खोज, उत्पादकता और प्रतिद्वन्द्विता में गिरावट के रूप में झेलना पड़ रहा है.


मॉलीक्यूलर बायोलॉजी में पीएचडी कर चुकीं चीनी मूल की शिक्षक यिनुओ ली कहती हैं, "यह बहुत बड़ी बर्बादी है और देश का भारी नुकसान है.” ली एक सफल वैज्ञानिक हैं और विज्ञान विषयों में महिलाओं की आदर्श के तौर पर बार्बी कंपनी ने उनकी हमशक्ल गुड़िया भी बनायी है.


जापान में एक सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत काम कर रहीं तीन बच्चों की मां ली कहती हैं, "अगर लैंगिक संतुलन नहीं होगा तो आपकी तकनीक में बहुत सारी खामियां होंगी.”


पिछड़ रहा है जापान

सबसे धनी देशों की सूची में इंजीनियरिंग या साइंस विषयों की पढ़ाई कर रहीं महिलाओं की संख्या के मामले में जापान सबसे नीचे है. वहां विश्वविद्यालयों में सिर्फ 16 फीसदी महिलाएं हैं. हर सात वैज्ञानिकों में सिर्फ एक महिला वैज्ञानिक है. ऐसा तब है जबकि ओईसीडी के मुताबिक जापान में गणित में लड़कियों के अंक दुनिया में दूसरे नंबर पर हैं जबकि साइंस में तीसरे नंबर पर.


जापान में लाखों लोग अकेला रहना क्यों पसंद कर रहे हैं


फिर भी, लैंगिक समानता के मामले में जापान की रैंकिंग में इस साल रिकॉर्ड गिरावट आयी है. हालांकि देश इस अंतर को पाटने की भरसक कोशिश कर रहा है. 2024 में शुरू होने वाले शिक्षा सत्र में कातो के टोक्यो इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी समेत लगभग एक दर्जन विश्वविद्यालय सरकार की महिलाओं के लिए विज्ञान विषयों में कोटा तय करने की अपील पर अमल करने जा रहे हैं. कई विश्वविद्यालयों ने तो इसी साल से ऐसा शुरू कर दिया था.


यह जापान में एक बड़ा बदलाव होगा जहां कि इस बात को लेकर विवाद हो चुका है कि महिलाओं को जानबूझ कर पीछे रखा जा रहा है. 2018 में तब खासा हंगामा मचा था जब यह बात सामने आई थी कि टोक्यो मेडिकल स्कूल में महिला प्रार्थियों के अंक जानबूझ कर कम किये गये ताकि उन्हें दाखिला ना मिले. एक रिपोर्ट में कहा गया था कि स्कूल के अधिकारियों को लगा कि बच्चों के कारण महिलाओं के करियर अधर में छोड़ने की संभावना ज्यादा है और वे अपनी पढ़ाई को बर्बाद करेंगी.


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सोच बदलने की कोशिश

इस सोच को बदलने के मकसद से सरकार ने कुछ महीने पहले साढ़े नौ मिनट का एक वीडियो जारी किया था जिसमें दिखाया गया कि कैसे शिक्षकों और अन्य वयस्कों की रूढ़िवादी सोच के कारण लड़कियां विज्ञान विषयों से परहेज कर रही हैं.


"सुशी आतंकवाद" से जापान में अफरातफरी, रेस्तरां जाने से कतरा रहे लोग


इस वीडियों में एक एक्टर शिक्षक बनकर एक छात्रा से कहता है कि लड़की होने के बावजूद उसने गणित में अच्छे नंबर हासिल किये. एक अन्य मामले में एक महिला अपनी बेटी को यह कहकर इंजीनियरिंग पढ़ने से हतोत्साहित करती है कि यह "पुरुष प्रधान क्षेत्र है.”


सरकार का लैंगिक समानता विभाग निजी क्षेत्र के साथ मिलकर काम कर रहा है. वह आने वाले समय में विज्ञान विषयों की सौ से ज्यादा वर्कशॉप आयोजित करेगा जिसमें महिला छात्रों को प्रोत्साहित करने की कोशिश की जाएगी. इसके लिए माज्दा जैसी कार कंपनियों के इंजीनियरों की मदद ली जाएगी.


वीके/सीके (रॉयटर्स)

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सोमवार, 10 जुलाई 2023

IPO This Week: पांच सब्सक्रिप्शन, छह लिस्टिंग्स; इस हफ्ते आईपीओ मार्केट में जमकर बारिश

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 IPO This Week: आईपीओ निवेशकों के लिए यह सप्ताह काफी व्यस्त रहने वाला है। इसकी वजह ये है कि इस हफ्ते पांच कंपनियों के आईपीओ में पैसे ला सकते हैं तो 6 कंपनियों के शेयरों की घरेलू मार्केट में लिस्टिंग है। इस हफ्ते जो आईपीओ खुलने वाले हैं, उनमें से सिर्फ एक ही मेनबोर्ड यानी बीएसई और एनएसई पर लिस्टिंग के लिए खुलेगा और वह है उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक (Utkarsh Small Finance Bank) का आईपीओ sabhar:https://hindi.moneycontrol.com/news/ipo/ipo-this-week-5-public-issue-including-utkarsh-small-finance-bank-ipo-and-6-listings-in-queue-ipo-investors-very-busy-this-week-1352291.html

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रविवार, 9 जुलाई 2023

दुनिया खोज रही है ये रहस्य, आप भी जानिए...

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 प्रस्तुति : अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'


पहले बल्ब का जलना, विमान का उड़ना, सिनेमा और टीवी का चलन, मोबाइल पर बात करना और कार में घूमना एक रहस्य और कल्पना की बातें हुआ करती थीं। आज इसके आविष्कार से दुनिया तो बदल गई है, लेकिन आदमी वही मध्ययुगीन सोच का ही है। धरती तो कई रहस्यों से पटी पड़ी है। उससे कहीं ज्यादा रहस्य तो समुद्र में छुपा हुआ है। उससे भी कहीं ज्यादा आकाश रहस्यमयी है और उससे कई गुना अं‍तरिक्ष में अंतहीन रहस्य छुपा हुआ है।

दुनिया में ऐसे कई रहस्य हैं जिनका जवाब अभी भी खोजा जाना बाकी है। विज्ञान के पास इनके जवाब नहीं हैं, लेकिन खोज जारी है। ऐसे कौन-कौन से रहस्य हैं जिनके खुलने पर इंसान ही नहीं, धरती का संपूर्ण भविष्य बदल जाएगा। आओ जानते हैं ऐसी ही 10 रहस्य और रोमांच से भरी बतों को...



1. टाइम मशीन : समय की सीमाएं लांघकर अतीत और भविष्य में पहुंचने की परिकल्पना तो मनुष्य करता रहा है। भारत में ऐसे कई साधु-संत हुए हैं, जो आंख बंद कर अतीत और भविष्य में झांक लेते थे। अब सवाल यह है कि यह काम मशीन से कैसे हो? इंग्लैंड के मशहूर लेखक एचजी वेल्स ने 1895 में 'द टाइम मशीन' नामक एक उपन्यास प्रकाशित किया, तो समूचे योरप में तहलका मच गया। उपन्यास से प्रेरित होकर इस विषय पर और भी कई तरह के कथा
 साहित्य रचे गए। इस कॉन्सेप्ट पर हॉलीवुड में एक फिल्म भी बनी
टाइम मशीन अभी एक कल्पना है। टाइम ट्रेवल और टाइम मशीन, यह एक ऐसे उपकरण की कल्पना है जिसमें बैठकर कोई भी मनुष्य भूतकाल या भविष्य के किसी भी समय में सशरीर अपनी पूरी मानसिक और शारीरिक क्षमताओं के साथ जा सकता है। अधिकतर वैज्ञानिक मानते हैं कि यह कल्पना ही रहेगी कभी हकीकत नहीं बन सकती, क्योंकि यह अतार्किक बात है कि कोई कैसे अतीत में या भविष्य में जाकर अतीत या भविष्य के सच को जान सकता है? 
टाइम मशीन की कल्पना भी भारतीय धर्मग्रंथों से प्रेरित है। आप सोचेंगे कैसे? वेद और पुराणों में ऐसी कई घटनाओं का जिक्र है जिसमें कहा गया है कि कोई व्यक्ति ब्रह्मा के पास मिलने ब्रह्मलोक गया और जब वह धरती पर पुन: लौटा तो यहां एक युग बीत चुका था। अब सवाल यह उठता है कि कोई व्यक्ति एक युग तक कैसे जी सकता है? इसका जवाब है कि हमारी समय की अवधारणा धरती के मान से है लेकिन जैसे ही हम अंतरिक्ष में जाते हैं, समय बदल जाता है। जो व्यक्ति ब्रह्मलोक होकर लौटा उसके लिए तो उसके मान से 1 वर्ष ही लगा। लेकिन उक्त 1 वर्ष में धरती पर एक युग बीत गया, बुध ग्रह पर तो 2 युग बीत गए होंगे, क्योंकि वहां का 1 वर्ष तो 88 दिनों का ही होता है। अब हम टाइम मशीन की थ्‍योरी को समझें...
 
पहले यह माना जाता था कि समय निरपेक्ष और सार्वभौम है अर्थात सभी के लिए समान है यानी यदि धरती पर 10 बज रहे हैं तो क्या यह मानें कि मंगल ग्रह पर भी 10 ही बज रहे होंगे? लेकिन आइंस्टीन के सापेक्षता सिद्धांत के अनुसार ऐसा नहीं है। समय की धारणा अलग-अलग है।
 
आइंस्टीन ने कहा कि दो घटनाओं के बीच का मापा गया समय इस बात पर निर्भर करता है कि उन्हें देखने वाला किस गति से जा रहा है। मान लीजिए की दो जुड़वां भाई हैं- A और B। एक अत्यंत तीव्र गति के अंतरिक्ष यान से किसी ग्रह पर जाता है और कुछ समय बाद पृथ्वी पर लौट आता है जबकि B घर पर ही रहता है। A के लिए यह सफर हो सकता है 1 वर्ष का रहा हो, लेकिन जब वह पृथ्वी पर लौटता है तो 10 साल बीत चुके होते हैं। उसका भाई B अब 9 वर्ष बड़ा हो चुका है, जबकि दोनों का जन्म एक ही दिन हुआ था। यानी A 10 साल भविष्य में पहुंच गया है। अब वहां पहुंचकर वह वहीं से धरती पर चल रही घटना को देखता है तो वह अतीत को देख रहा होता है।
 
जैसे एक गोली छूट गई लेकिन यदि आपको उसको देखना है तो उस गोली से भी तेज गति से आगे जाकर उसे क्रॉस करना होगा और फिर पलटकर उसको देखना होगा तभी वह तुम्हें दिखाई देगी। इसी तरह ब्रह्मांड में कई आवाजें, चित्र और घटनाएं जो घटित हो चुकी हैं वे फैलती जा रही हैं। वे जहां तक पहुंच गई हैं वहां पहुंचकर उनको पकड़कर सुना होगा।
यदि ऐसा हुआ तो...? कुछ ब्रह्मांडीय किरणें प्रकाश की गति से चलती हैं। उन्हें एक आकाशगंगा पार करने में कुछ क्षण लगते हैं लेकिन पृथ्वी के समय के हिसाब से ये दसियों हजार वर्ष हुए।
 
भौतिकशास्त्र की दृष्टि से यह सत्य है लेकिन अभी तक ऐसी कोई टाइम मशीन नहीं बनी जिससे हम अतीत या भविष्य में पहुंच सकें। यदि ऐसे हो गया तो बहुत बड़ी क्रांति हो जाएगी। मानव जहां खुद की उम्र बढ़ाने में सक्षम होगा वहीं वह भविष्य को बदलना भी सीख जाएगा। इतिहास फिर से लिखा जाएगा।
 
एक और उदाहारण से समझें। आप कार ड्राइव कर रहे हैं आपको पता नहीं है कि 10 किलोमीटर आगे जाकर रास्ता बंद है और वहां एक बड़ा-सा गड्डा है, जो अचानक से दिखाई नहीं देता। आपकी कार तेज गति से चल रही है। अब आप सोचिए कि आपके साथ क्या होने वाला है? लेकिन एक व्यक्ति हेलीकॉप्टर में बैठा है और उसे यह सब कुछ दिखाई दे रहा है अर्थात यह कि वह आपका भविष्य देख रहा है। यदि आपको किसी तकनीक से पता चल जाए कि आगे एक गड्‍ढा है तो आप बच जाएंगे। भारत का ज्योतिष भी यही करता है कि वह आपको गड्ढे की जानकारी दे देता है।
 
लेकिन एक अतार्किक उदाहरण भी दिया जा सकता है, जैसे कि एक व्यक्ति विवाह करने से पहले अपने पुत्र को देखने जाता है टाइम मशीन से। वहां जाकर उसे पता चलता है कि उनका पुत्र तो जेल के अंदर देशद्रोह के मामले में सजा काट रहा है तो... तब वह दो काम कर सकता है या तो वह किसी अन्य महिला से विवाह करे या विवाह करने का विचार ही त्याग दे।
 

 

अश्वत्थामा बलिव्र्यासो हनूमांश्च विभीषण:।
कृप: परशुरामश्च सप्तएतै चिरजीविन:॥
सप्तैतान् संस्मरेन्नित्यं मार्कण्डेयमथाष्टमम्।
जीवेद्वर्षशतं सोपि सर्वव्याधिविवर्जित।।
 
2. अमर होने का रहस्य : अमर कौन नहीं होना चाहता? समुद्र मंथन में अमृत निकला। इसे प्राप्त करने के लिए देवताओं ने दानवों के साथ छल किया। देवता अमर हो गए। मतलब कि क्या समुद्र में ऐसा कुछ है कि उसमें से अमृत निकले? तो आज भी निकल सकता है? अभी अधिकतम 100 साल के जीवन में अनेकानेक रोग, कष्ट, संताप और झंझट हैं तो अमरता प्राप्त करने पर क्या होगा? 100 वर्ष बाद वैराग्य प्राप्त कर व्यक्ति हिमालय चला जाएगा। वहां क्या करेगा? बोर हो जाएगा तो फिर से संसार में आकर रहेगा। बस यही सिलसिला चलता रहेगा।
 
महाभारत में 7 चिरंजीवियों का उल्लेख मिलता है। चिरंजीवी का मतलब अमर व्यक्ति। अमर का अर्थ, जो कभी मर नहीं सकते। ये 7 चिरंजीवी हैं- राजा बलि, परशुराम, विभीषण, हनुमानजी, वेदव्यास, अश्वत्थामा और कृपाचार्य। हालांकि कुछ विद्वान मानते हैं कि मार्कंडेय ऋषि भी चिरंजीवी हैं।
 
माना जाता है कि ये सातों पिछले कई हजार वर्षों से इस धरती पर रह रहे हैं, लेकिन क्या धरती पर रहकर इतने हजारों वर्ष तक जीवित रहना संभव है? हालांकि कई ऐसे ऋषि-मुनि थे, जो धरती के बाहर जाकर फिर लौट आते थे और इस तरह वे अपनी उम्र फ्रिज कर बढ़ते रहते थे। हालांकि हिमालय में रहने से भी उम्र बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है। हिन्दू धर्मशास्त्रों में ऐसी कई कथाएं हैं जिसमें लिखा है कि अमरता प्राप्त करने के लिए फलां-फलां दैत्य या साधु ने घोर तप करके शिवजी को प्रसन्न कर लिया। बाद में उसे मारने के लिए भगवान के भी पसीने छूट गए। अमर होने के लिए कई ऐसे मंत्र हैं जिनके जपने से शरीर हमेशा युवा बना रहता है। महामृत्युंजय मंत्र के बारे में कहा जाता है कि इसके माध्यम से अमरता पाई जा सकती है।
 
वेद, उपनिषद, गीता, महाभारत, पुराण, योग और आयुर्वेद में अमरत्व प्राप्त करने के अनेक साधन बताए गए हैं। आयुर्वेद में कायाकल्प की विधि उसका ही एक हिस्सा है। लेकिन अब सवाल यह उठता है कि विज्ञान इस दिशा में क्या कर रहा है? विज्ञान भी इस दिशा में काम कर रहा है कि किस तरह व्यक्ति अमर हो जाए अर्थात कभी नहीं मरे।
 
सावित्री-सत्यवान की कथा तो आपने सुनी ही होगी। सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस ले लिए थे। सावित्री और यमराज के बीच लंबा संवाद हुआ। इसके बाद भी यह पता नहीं चलता है कि सावित्री ने ऐसा क्या किया कि सत्यवान फिर से जीवित हो उठा। इस जीवित कर देने या हो जाने की प्रक्रिया के बारे में महाभारत भी मौन है। जरूर सावित्री के पास कोई प्रक्रिया रही होगी। जिस दिन यह प्रक्रिया वैज्ञानिक ढंग से ज्ञात हो जाएगी, हम अमरत्व प्राप्त कर लेंगे।
 
आपने अमरबेल का नाम सुना होगा। विज्ञान चाहता है कि मनुष्य भी इसी तरह का बन जाए, कायापलट करता रहा और जिंदा बना रहे। वैज्ञानिकों का एक समूह चरणबद्ध ढंग से इंसान को अमर बनाने में लगा हुआ है। समुद्र में जेलीफिश (टयूल्रीटोप्सिस न्यूट्रीकुला) नामक मछली पाई जाती है। यह तकनीकी दृष्टि से कभी नहीं मरती है। हां, यदि आप इसकी हत्या कर दें या कोई अन्य जीव जेलीफिश का भक्षण कर ले, फिर तो उसे मरना ही है। इस कारण इसे इम्मोर्टल जेलीफिश भी कहा जाता है। जेलीफिश बुढ़ापे से बाल्यकाल की ओर लौटने की क्षमता रखती है। अगर वैज्ञानिक जेलीफिश के अमरता के रहस्य को सुलझा लें, तो मानव अमर हो सकता है।
 
क्या कर रहे हैं वैज्ञानिक : वैज्ञानिक अमरता के रहस्यों से पर्दा हटाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। बढ़ती उम्र के प्रभाव को रोकने के लिए कई तरह की दवाइयों और सर्जरी का विकास किया जा रहा है। अब इसमें योग और आयुर्वेद को भी महत्व दिया जाने लगा है। बढ़ती उम्र के प्रभाव को रोकने के बारे में आयोजित एक व्यापक सर्वे में पाया गया कि उम्र बढ़ाने वाली 'गोली' को बनाना संभव है। रूस के साइबेरिया के जंगलों में एक औषधि पाई जाती है जिसे जिंगसिंग कहते हैं। चीन के लोग इसका ज्यादा इस्तेमाल करके देर तक युवा बने रहते हैं।
 
' जर्नल नेचर' में प्रकाशित 'पजल, प्रॉमिस एंड क्योर ऑफ एजिंग' नामक रिव्यू में कहा गया है कि आने वाले दशकों में इंसान का जीवनकाल बढ़ा पाना लगभग संभव हो पाएगा। अखबार 'डेली टेलीग्राफ' के अनुसार एज रिसर्च पर बक इंस्टीट्यूट, कैलिफॉर्निया के डॉक्टर जूडिथ कैंपिसी ने बताया कि सिंपल ऑर्गनिज्म के बारे में मौजूदा नतीजों से इसमें कोई शक नहीं कि जीवनकाल को बढ़ाया-घटाया जा सकता है। पहले भी कई स्टडीज में पाया जा चुका है कि अगर बढ़ती उम्र के असर को उजागर करने वाले जिनेटिक प्रोसेस को बंद कर दिया जाए, तो इंसान हमेशा जवान बना रह सकता है। जर्नल सेल के जुलाई के अंक में प्रकाशित एक रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया कि बढ़ती उम्र का प्रभाव जिनेटिक प्लान का हिस्सा हो सकता है, शारीरिक गतिविधियों का नतीजा नहीं। खोज और रिसर्च जारी 
 

3. गायब हो जाने का रहस्य : अमर होने से ज्यादा लोगों में गायब होने की तमन्ना है। जिसने भी 'मिस्टर इंडिया' फिल्म देखी होगी वह जानता है कि इसके ऐसे भी फायदे हो सकते हैं। गायब या अदृश्य होना मनुष्य की प्राचीन अभिलाषा रही है जिसके लिए समय-समय पर तरह-तरह के प्रयोग होते रहे हैं। इसके लिए कई सिद्धांत गढ़े गए हैं।
वेद, महाभारत और पुराणों में ऐसी कई कथाएं हैं जिसमें कहा गया है कि देवता अचानक प्रकट हुए और फिर अंतर्ध्यान हो गए अर्थात गायब हो गए। हनुमानजी के बाद भगवान कृष्ण के पास यह विद्या थी। मशहूर विज्ञान गल्‍पकार एचजी वेल्‍स (H.G. Wells) ने 1897 में प्रकाशित अपने लोकप्रिय उपन्‍यास 'अदृश्‍य आदमी' (The Invisible Man) में गायब होने का फॉर्मूला दिया है। हालांकि भारत के हिमालयीन राज्यों में ऐसी धारणा है कि जड़ी-बूटियों के माध्यम से एक ऐसी गोली बनती है कि जिसको मुंह में रखने से व्यक्ति तब तक के लिए अदृश्य हो जाता है है, जब तक कि उस गोली का असर रहता है। खैर...
 
मिस्टर इंडिया लाल चश्मा पहनते ही गायब हो जाते थे तो हैरी पॉटर के पास इनविजिबिलिटी क्लॉक था लेकिन वैज्ञानिकों ने गायब होने का एक तरीका निकाला है। वे एक ऐसी ड्रेस बनाने वाले हैं जिसे पहनकर व्यक्ति गायब हो जाएगा यानी कि लबादा ओढ़ो और गायब हो जाओ।
 
जर्मनी के कार्ल्सरूहे तकनीकी विश्वविद्यालय और इंपीरियल कॉलेज ऑफ लंदन के कुछ वैज्ञानिकों ने मिलकर फोटोनिक क्रिस्टलों से एक लबादा तैयार किया है। फोटोनिक क्रिस्टल ऐसे पदार्थ होते हैं, जो अपने पर पड़ने वाली रोशनी के इलेक्ट्रॉन की दिशा बदल देते हैं। अगर इस प्रवृत्ति को विकसित किया जाए तो ऐसे पदार्थ बनाए जा सकते हैं, जो रोशनी के कणों को पूरी तरह मोड़ सकते हैं। आज हम जो भी देख रहे हैं, वे उस पदार्थ पर पड़ने वाली रोशनी के कारण देख रहे हैं भले ही यह रोशनी धुंधली ही क्यों न हो।
 
लेकिन इस प्रयोग में दिक्कत यह है कि भले ही सामने से व्यक्ति स्पष्ट नजर न आए लेकिन वह बगल से दिखाई दे सकता है। वैज्ञानिक कहते हैं कि दृश्‍यमानता प्रकाश के साथ पिंडों की क्रिया पर निर्भर करती है। आप जानते हैं कि कोई भी पिंड या तो प्रकाश को अवशोषित करता है या परावर्तित या अपवर्तित। यदि पिंड न तो प्रकाश को अवशोषित करता है, न परावर्तित या अपवर्तित, तो पिंड अदृश्‍य होगा। 
 
हालांकि अभी अदृश्य होने का कोई पुख्ता फॉर्मूला विकसित नहीं हुआ है लेकिन अमेरिका सहित दुनियाभर के वैज्ञानिक इस पर रिसर्च में लगे हुए हैं ताकि हजारों अदृश्य मानवों से जासूसी करवाई जा सके और दूसरों देशों में अशांति फैलाई जा सके। हो सकता है कि आने वाले समय में नैनो टेक्नोलॉजी से यह संभव हो। 
 

4. ब्रह्मांड के बनने का रहस्य : आजकल के ‍वैज्ञानिक ब्रह्मांड की उत्पत्ति के रहस्य को जानने से ज्यादा उसके अंत में उत्सुक हैं। वे बताते रहते हैं कि धरती पर जीवन का खात्मा इस तरह होगा। सूर्य ठंडा हो जाएगा। ग्रह-नक्षत्र आपस में टकरा जाएंगे। तब क्या होगा? इसलिए मानव को अभी से ही दूसरे ग्रहों को तलाश करना चाहिए।
अधिकतर वैज्ञानिक शायद यह मान ही बैठे हैं ‍कि उत्पत्ति का रहस्य तो हम जान चुके हैं। बिग बैंग का सिद्धांत अकाट्य है। लेकिन कई ऐसे वैज्ञानिक हैं, जो यह कहते हैं कि हमने अभी भी ब्रह्मांड की उत्पत्ति और धरती पर जीवन की उत्पत्ति के रहस्य को नहीं सुलझाया है। अभी तक जितने भी सिद्धांत बताए जा रहे हैं वे सभी तर्क से खारिज किए जा सकते हैं।
 
हिन्दू धर्म अनुसार ब्रह्मांड की उत्पत्ति का रहस्य...
 
ब्रह्मांड की उत्पत्ति के सबसे ज्यादा मान्य सिद्धांत को महाविस्फोट (The Big Bang) कहते हैं। इसके अनुसार अब से लगभग 14 अरब वर्ष पहले एक बिंदु से ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई है। फिर उस बिंदु में महाविस्फोट हुआ और असंख्य सूर्य, ग्रह, नक्षत्र आदि का जन्म होता गया। 
 
वैज्ञानिक मानते हैं कि बिंदु के समय ब्रह्मांड के सभी कण एक-दूसरे के एकदम पास-पास थे। वे इतने ज्यादा पास-पास थे कि वे सभी एक ही जगह थे, एक ही बिंदु पर। सारा ब्रह्मांड एक बिंदु की शक्ल में था।
 
यह बिंदु अत्यधिक घनत्व का, अत्यंत छोटा बिंदु था। ब्रह्मांड का यह बिंदु रूप अपने अत्यधिक घनत्व के कारण अत्यंत गर्म रहा होगा। इस स्थिति में भौतिकी, गणित या विज्ञान का कोई भी नियम काम नहीं करता है। यह वह स्थिति है, जब मनुष्य किसी भी प्रकार अनुमान या विश्लेषण करने में असमर्थ है। काल या समय भी इस स्थिति में रुक जाता है, दूसरे शब्दों में काल या समय के कोई मायने नहीं रहते हैं। इस स्थिति में किसी अज्ञात कारण से अचानक ब्रह्मांड का विस्तार होना शुरू हुआ। एक महाविस्फोट के साथ ब्रह्मांड का जन्म हुआ और ब्रह्मांड में पदार्थ ने एक-दूसरे से दूर जाना शुरू कर दिया।
 
हालांकि ब्रह्मांड की उत्पत्ति और प्रलय के बारे में अभी भी प्रयोग और शोध जारी है। सबसे बड़े प्रयोग की चर्चा करें तो महाप्रयोग सर्न के वैज्ञानिक कर रहे हैं। ये वैज्ञानिक उस खास कण को ढूंढने में लगे हैं जिसके कारण ब्रह्मांड बना होगा। दावा किया जाता है कि फ्रांस और स्विट्जरलैंड की बॉर्डर पर बनी दुनिया की सबसे बड़ी प्रयोगशाला में दुनियाभर के वैज्ञानिकों ने वो कण ढूंढ लिया है जिसे गॉड पार्टिकल यानी भगवान का कण कहा जाता है। इसे उन्होंने 'हिग्स बोसन' नाम दिया है। सर्न के वैज्ञानिकों को 99 फीसदी यकीन है कि गॉड पार्टिकल का रहस्य सुलझ गया है। मतलब 1 प्रतिशत संदेह है? 
 
हमारा ब्रह्मांड रहस्य-रोमांच और अनजानी-अनसुलझी पहेलियों से भरा है। सदियों से इंसान सवालों की भूलभुलैया में भटक रहा है कि कैसे बना होगा ब्रह्मांड, कैसे बनी होगी धरती, कैसे बना होगा फिर इंसान। हालांकि धर्मग्रंथों में रेडीमेड उत्तर लिखे हैं कि भगवान ने इसे बनाया और फिर 7वें दिन आराम किया।
 

 

5. बिगफुट का रहस्य : अमेरिका, अफ्रीका, चीन, रूस और भारत में बिगफुट की खोज जारी है। कई लोग बिगफुट को देखे जाने का दावा करते हैं। पूरे विश्व में इन्हें अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है। तिब्बत और नेपाल में इन्हें 'येती' का नाम दिया जाता है तो ऑस्ट्रेलिया में 'योवी' के नाम से जाना जाता है। भारत में इसे 'यति' कहते 
ज्यादा बालों वाले इंसान जंगलों में ही रहते थे। जंगल में भी वे वहां रहते थे, जहां कोई आता-जाता नहीं था। माना जाता था कि ज्यादा बालों वाले इंसानों में जादुई शक्तियां होती हैं। ज्यादा बालों वाले जीवों में बिगफुट का नाम सबसे ऊपर आता है। बिगफुट के बारे में आज भी रहस्य बरकरार है।
 

 

6. एलियंस का रहस्य : वर्षों के वैज्ञानिक शोध से यह पता चला कि 10 हजार ईपू धरती पर एलियंस उतरे और उन्होंने पहले इंसानी कबीले के सरदारों को ज्ञान दिया और फिर बाद में उन्होंने राजाओं को अपना संदेशवाहक बनाया और अंतत: उन्होंने इस तरह धरती पर कई प्रॉफेट पैदा कर दिए। क्या इस बात में सच्चाई है?
डार्क मैटर : अंतरिक्ष में 80 फीसदी से ज्यादा पदार्थ दिखाई नहीं देता इसे डार्क मैटर कहते हैं। वैज्ञानिक अभी तक इसकी खोज में लगे हुए हैं। आज तक यह रहस्य बना हुआ है कि डार्क मैटर किस चीज से बना है।  

 
7कैसे काम करता है गुरुत्वाकर्षण : न्यूटन ने यह तो कह दिया की धरती में गुरुत्वाकर्षण बल है जिसके कारण चीजें टीकी रहती है लेकिन यह बल कहां से आया, कैसे काम करता है यह नहीं बताया। हालांकि न्यूटन से पहले भास्कराचार्य ने भी गुरुत्वाकर्षण बल की चर्चा की लेकिन उन्होंने भी यह नहीं बताया कि यह बल काम कैसे करता है।
8पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल उसे सूर्य के कक्ष में स्थिर रखता है अन्यथा पृथ्वी किसी अंधकार में खो जाती। चंद्रमाका गुरुत्वबल धरती पर फैला समुद्र है। लेकिन यह गुरुत्वाकर्षण बल असल में कहां से आया, वैज्ञानिक इसे पूरी तरह से स्पष्ट नहीं कर पाए हैं। यह गुरुत्वाकर्षण अन्य कणों के गुरुत्व केंद्र के साथ कैसे संतुलन बनाता है?
 
खगोल विज्ञान को वेद का नेत्र कहा गया, क्योंकि सम्पूर्ण सृष्टियों में होने वाले व्यवहार का निर्धारण काल से होता है और काल का ज्ञान ग्रहीय गति से होता है। अत: प्राचीन काल से खगोल विज्ञान वेदांग का हिस्सा रहा है। ऋग्वेद, शतपथ ब्राहृण आदि ग्रथों में नक्षत्र, चान्द्रमास, सौरमास, मल मास, ऋतु परिवर्तन, उत्तरायन, दक्षिणायन, आकाशचक्र, सूर्य की महिमा, कल्प का माप आदि के संदर्भ में अनेक उद्धरण मिलते हैं।  
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रविवार, 2 जुलाई 2023

AI का भविष्य क्या है? दायरे और विचारों के बारे में जानें

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इस दुनिया ने चार बड़ी क्रांतियाँ देखी हैं जिन्होंने इसका पूरा चेहरा बदल दिया। पहली क्रांति 1784 में हुई जब पहला भाप इंजन पेश किया गया। 1870 में दूसरी क्रांति में बिजली का आविष्कार हुआ। तीसरा 1969 में जब सूचना प्रौद्योगिकी शब्द दुनिया में पेश किया गया था। और चौथी है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की क्रांति जिसे हम अभी अनुभव कर रहे हैं। एआई के भविष्य में और अधिक आविष्कार होंगे जो हमें एक अद्वितीय भविष्य के करीब लाएंगे। इस लेख में, हम निम्नलिखित विषयों को कवर करेंगे: एआई का विकास एआई क्रांति की शुरुआत हाल के एआई आविष्कार एआई का भविष्य एआई का विकास कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) मशीनों के लिए अनुभव से सीखना, नए इनपुट के साथ तालमेल बिठाना और मानव जैसे कार्य करना संभव बनाती है। सोच मशीनों पर सबसे पहला शोध उन विचारों के संगम से प्रेरित था जो 1930 के दशक के अंत, 1940 के दशक और 1950 के दशक की शुरुआत में प्रचलित हुए थे। तो आइए 50 के दशक की शुरुआत से लेकर आज तक जीवन बदलने वाली इस तकनीक के विकास पर एक नज़र डालें: एआई का विकास- एआई का भविष्य - एडुरेका 1950 में एलन ट्यूरिंग ने ट्यूरिंग परीक्षण तैयार किया । यदि कोई मशीन ऐसी बातचीत कर सकती है जो किसी इंसान के साथ बातचीत से अलग नहीं हो सकती, तो यह कहना उचित होगा कि मशीन सोच रही थी। 1956 से 74 को AI के लिए स्वर्ण युग कहा जाता है । 1967 में वाबोट परियोजना ने एक रोबोट बनाया जो बाहरी रिसेप्टर्स, कृत्रिम आंखों और कानों का उपयोग करके वस्तुओं की दूरी और दिशाओं को माप सकता था। और इसकी वार्तालाप प्रणाली ने इसे कृत्रिम मुँह वाले व्यक्ति से जापानी भाषा में संवाद करने की अनुमति दी। 1980 के दशक में विशेषज्ञ प्रणाली नामक एआई कार्यक्रम का एक रूप दुनिया भर के निगमों द्वारा अपनाया गया और ज्ञान मुख्यधारा एआई अनुसंधान का केंद्र बन गया। 1990 के दशक के दौरान इंटेलिजेंट एजेंट्स नामक एक नया प्रतिमान व्यापक रूप से स्वीकार किया गया । यह एक ऐसी प्रणाली है जो अपने वातावरण को समझती है और ऐसे कार्य करती है जिससे उसकी सफलता की संभावना अधिकतम हो जाती है। 21वीं सदी के पहले दशकों में , बड़ी मात्रा में डेटा तक पहुंच, तेज़ कंप्यूटर और उन्नत मशीन लर्निंग तकनीकों को पूरी अर्थव्यवस्था में कई समस्याओं पर सफलतापूर्वक लागू किया गया था। 2016 तक , AI-संबंधित उत्पादों , हार्डवेयर और सॉफ़्टवेयर का बाज़ार 8 बिलियन डॉलर से अधिक तक पहुँच गया। साथ ही, न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया कि एआई में रुचि उथल-पुथल तक पहुंच गई है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणालियों पर दुनिया भर में खर्च 2019 में $35.8 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है , जो 2018 की तुलना में 44% की वृद्धि है । और 2022 में दोगुना से अधिक $79.2 बिलियन हो जाएगा एआई का विकास और विकास एक सतत प्रक्रिया है। अब, इससे पहले कि हम AI के भविष्य के बारे में बात करना शुरू करें, आइए अतीत में किए गए रचनात्मक आविष्कारों पर एक नज़र डालें जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शामिल है। एआई क्रांति की शुरुआत 1950 के दशक से , कई वैज्ञानिकों, प्रोग्रामर, तर्कशास्त्रियों और सिद्धांतकारों ने समग्र रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता की आधुनिक समझ को मजबूत करना शुरू कर दिया। प्रत्येक नए दशक के साथ, नए नवाचार और निष्कर्ष हुए जिन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में लोगों के बुनियादी ज्ञान को बदल दिया। साथ ही, इसने दिखाया कि कैसे ऐतिहासिक प्रगति ने एआई को एक अप्राप्य कल्पना से वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक मूर्त वास्तविकता में बदल दिया है। AI के इतिहास में कुछ महत्वपूर्ण प्रगतियाँ हैं: 1950 के दशक सूचना सिद्धांत के जनक क्लॉड शैनन ने " शतरंज खेलने के लिए एक कंप्यूटर प्रोग्रामिंग " प्रकाशित किया, जो शतरंज खेलने वाले कंप्यूटर प्रोग्राम के विकास पर चर्चा करने वाला पहला लेख था। 1950 के दशक में जॉर्ज डेवोल द्वारा आविष्कार किया गया एक औद्योगिक रोबोट , यूनिमेट , न्यू जर्सी में जनरल मोटर्स असेंबली लाइन पर काम करने वाला पहला रोबोट बन गया। इसने असेंबली लाइन से डाई कास्टिंग के परिवहन और कारों पर भागों की वेल्डिंग पर ध्यान केंद्रित किया, यह कार्य मनुष्यों के लिए खतरनाक माना जाता है। 1960 के दशक 1965 में , एक कंप्यूटर वैज्ञानिक और प्रोफेसर जोसेफ वेइज़ेनबाम ने एलिज़ा नामक एक इंटरैक्टिव कंप्यूटर प्रोग्राम विकसित किया , जो किसी व्यक्ति के साथ अंग्रेजी में कार्यात्मक रूप से बातचीत कर सकता है। इसने प्रोग्राम की गई स्क्रिप्ट का उपयोग करके कुछ कीवर्ड के लिए डिब्बाबंद लाइनों को धुंधला कर दिया। 1970 के दशक इस चरण में प्रगति देखी गई, विशेष रूप से रोबोट और ऑटोमेटन पर ध्यान केंद्रित किया गया। WABOT-1, पहला मानवरूपी रोबोट, जापान में वासेदा विश्वविद्यालय में बनाया गया था। इसकी विशेषताओं में चलने योग्य अंग, देखने की क्षमता और बातचीत करने की क्षमता शामिल है। 1980 के दशक कृत्रिम बुद्धिमत्ता का तीव्र विकास 1980 के दशक तक जारी रहा। WABOT-2 का निर्माण वासेदा विश्वविद्यालय में किया गया था। WABOT की इस शुरुआत ने ह्यूमनॉइड को लोगों के साथ संवाद करने के साथ-साथ संगीत स्कोर पढ़ने और इलेक्ट्रॉनिक ऑर्गन पर संगीत बजाने की अनुमति दी। 1990 के दशक 1995 में , कंप्यूटर वैज्ञानिक रिचर्ड वालेस ने वेइज़ेनबाम के एलिज़ा से प्रेरित होकर चैटबॉट A.LICE (कृत्रिम भाषाई इंटरनेट कंप्यूटर इकाई) विकसित किया। प्राकृतिक भाषा नमूना डेटा संग्रह को शामिल करने से एलिस को एलिज़ा से अलग किया गया। आईबीएम द्वारा 1997 में विकसित शतरंज खेलने वाला कंप्यूटर डीप ब्लू , शतरंज का खेल जीतने और मौजूदा विश्व चैंपियन के खिलाफ मैच जीतने वाला पहला सिस्टम बन गया। -2000 2000 में , प्रोफेसर सिंथिया ब्रेज़ील ने किस्मत नाम का एक रोबोट विकसित किया, जो अपने चेहरे से भावनाओं को पहचान और अनुकरण कर सकता था। इसकी संरचना आंखें, होंठ, पलकें और भौंहों के साथ एक मानव चेहरे की तरह थी। इस दुनिया ने चार बड़ी क्रांतियाँ देखी हैं जिन्होंने इसका पूरा चेहरा बदल दिया। पहली क्रांति 1784 में हुई जब पहला भाप इंजन पेश किया गया। 1870 में दूसरी क्रांति में बिजली का आविष्कार हुआ। तीसरा 1969 में जब सूचना प्रौद्योगिकी शब्द दुनिया में पेश किया गया था। और चौथी है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की क्रांति जिसे हम अभी अनुभव कर रहे हैं। एआई के भविष्य में और अधिक आविष्कार होंगे जो हमें एक अद्वितीय भविष्य के करीब लाएंगे। इस लेख में, हम निम्नलिखित विषयों को कवर करेंगे: एआई का विकास एआई क्रांति की शुरुआत हाल के एआई आविष्कार एआई का भविष्य एआई का विकास कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) मशीनों के लिए अनुभव से सीखना, नए इनपुट के साथ तालमेल बिठाना और मानव जैसे कार्य करना संभव बनाती है। सोच मशीनों पर सबसे पहला शोध उन विचारों के संगम से प्रेरित था जो 1930 के दशक के अंत, 1940 के दशक और 1950 के दशक की शुरुआत में प्रचलित हुए थे। तो आइए 50 के दशक की शुरुआत से लेकर आज तक जीवन बदलने वाली इस तकनीक के विकास पर एक नज़र डालें: एआई का विकास- एआई का भविष्य - एडुरेका 1950 में एलन ट्यूरिंग ने ट्यूरिंग परीक्षण तैयार किया । यदि कोई मशीन ऐसी बातचीत कर सकती है जो किसी इंसान के साथ बातचीत से अलग नहीं हो सकती, तो यह कहना उचित होगा कि मशीन सोच रही थी। 1956 से 74 को AI के लिए स्वर्ण युग कहा जाता है । 1967 में वाबोट परियोजना ने एक रोबोट बनाया जो बाहरी रिसेप्टर्स, कृत्रिम आंखों और कानों का उपयोग करके वस्तुओं की दूरी और दिशाओं को माप सकता था। और इसकी वार्तालाप प्रणाली ने इसे कृत्रिम मुँह वाले व्यक्ति से जापानी भाषा में संवाद करने की अनुमति दी। 1980 के दशक में विशेषज्ञ प्रणाली नामक एआई कार्यक्रम का एक रूप दुनिया भर के निगमों द्वारा अपनाया गया और ज्ञान मुख्यधारा एआई अनुसंधान का केंद्र बन गया। 1990 के दशक के दौरान इंटेलिजेंट एजेंट्स नामक एक नया प्रतिमान व्यापक रूप से स्वीकार किया गया । यह एक ऐसी प्रणाली है जो अपने वातावरण को समझती है और ऐसे कार्य करती है जिससे उसकी सफलता की संभावना अधिकतम हो जाती है। 21वीं सदी के पहले दशकों में , बड़ी मात्रा में डेटा तक पहुंच, तेज़ कंप्यूटर और उन्नत मशीन लर्निंग तकनीकों को पूरी अर्थव्यवस्था में कई समस्याओं पर सफलतापूर्वक लागू किया गया था। 2016 तक , AI-संबंधित उत्पादों , हार्डवेयर और सॉफ़्टवेयर का बाज़ार 8 बिलियन डॉलर से अधिक तक पहुँच गया। साथ ही, न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया कि एआई में रुचि उथल-पुथल तक पहुंच गई है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणालियों पर दुनिया भर में खर्च 2019 में $35.8 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है , जो 2018 की तुलना में 44% की वृद्धि है । और 2022 में दोगुना से अधिक $79.2 बिलियन हो जाएगा एआई का विकास और विकास एक सतत प्रक्रिया है। अब, इससे पहले कि हम AI के भविष्य के बारे में बात करना शुरू करें, आइए अतीत में किए गए रचनात्मक आविष्कारों पर एक नज़र डालें जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शामिल है। एआई क्रांति की शुरुआत 1950 के दशक से , कई वैज्ञानिकों, प्रोग्रामर, तर्कशास्त्रियों और सिद्धांतकारों ने समग्र रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता की आधुनिक समझ को मजबूत करना शुरू कर दिया। प्रत्येक नए दशक के साथ, नए नवाचार और निष्कर्ष हुए जिन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में लोगों के बुनियादी ज्ञान को बदल दिया। साथ ही, इसने दिखाया कि कैसे ऐतिहासिक प्रगति ने एआई को एक अप्राप्य कल्पना से वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक मूर्त वास्तविकता में बदल दिया है। AI के इतिहास में कुछ महत्वपूर्ण प्रगतियाँ हैं: 1950 के दशक सूचना सिद्धांत के जनक क्लॉड शैनन ने " शतरंज खेलने के लिए एक कंप्यूटर प्रोग्रामिंग " प्रकाशित किया, जो शतरंज खेलने वाले कंप्यूटर प्रोग्राम के विकास पर चर्चा करने वाला पहला लेख था। 1950 के दशक में जॉर्ज डेवोल द्वारा आविष्कार किया गया एक औद्योगिक रोबोट , यूनिमेट , न्यू जर्सी में जनरल मोटर्स असेंबली लाइन पर काम करने वाला पहला रोबोट बन गया। इसने असेंबली लाइन से डाई कास्टिंग के परिवहन और कारों पर भागों की वेल्डिंग पर ध्यान केंद्रित किया, यह कार्य मनुष्यों के लिए खतरनाक माना जाता है। 1960 के दशक 1965 में , एक कंप्यूटर वैज्ञानिक और प्रोफेसर जोसेफ वेइज़ेनबाम ने एलिज़ा नामक एक इंटरैक्टिव कंप्यूटर प्रोग्राम विकसित किया , जो किसी व्यक्ति के साथ अंग्रेजी में कार्यात्मक रूप से बातचीत कर सकता है। इसने प्रोग्राम की गई स्क्रिप्ट का उपयोग करके कुछ कीवर्ड के लिए डिब्बाबंद लाइनों को धुंधला कर दिया। 1970 के दशक इस चरण में प्रगति देखी गई, विशेष रूप से रोबोट और ऑटोमेटन पर ध्यान केंद्रित किया गया। WABOT-1, पहला मानवरूपी रोबोट, जापान में वासेदा विश्वविद्यालय में बनाया गया था। इसकी विशेषताओं में चलने योग्य अंग, देखने की क्षमता और बातचीत करने की क्षमता शामिल है। 1980 के दशक कृत्रिम बुद्धिमत्ता का तीव्र विकास 1980 के दशक तक जारी रहा। WABOT-2 का निर्माण वासेदा विश्वविद्यालय में किया गया था। WABOT की इस शुरुआत ने ह्यूमनॉइड को लोगों के साथ संवाद करने के साथ-साथ संगीत स्कोर पढ़ने और इलेक्ट्रॉनिक ऑर्गन पर संगीत बजाने की अनुमति दी। 1990 के दशक 1995 में , कंप्यूटर वैज्ञानिक रिचर्ड वालेस ने वेइज़ेनबाम के एलिज़ा से प्रेरित होकर चैटबॉट A.LICE (कृत्रिम भाषाई इंटरनेट कंप्यूटर इकाई) विकसित किया। प्राकृतिक भाषा नमूना डेटा संग्रह को शामिल करने से एलिस को एलिज़ा से अलग किया गया। आईबीएम द्वारा 1997 में विकसित शतरंज खेलने वाला कंप्यूटर डीप ब्लू , शतरंज का खेल जीतने और मौजूदा विश्व चैंपियन के खिलाफ मैच जीतने वाला पहला सिस्टम बन गया। -2000 2000 में , प्रोफेसर सिंथिया ब्रेज़ील ने किस्मत नाम का एक रोबोट विकसित किया, जो अपने चेहरे से भावनाओं को पहचान और अनुकरण कर सकता था। इसकी संरचना आंखें, होंठ, पलकें और भौंहों के साथ एक मानव चेहरे की तरह थी। पाठ्यक्रम पाठ्यक्रम पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कोर्स 2009 में , Google ने गुप्त रूप से एक ड्राइवर रहित कार विकसित की । 2014 तक इसने नेवादा का सेल्फ-ड्राइविंग टेस्ट पास कर लिया। ये अतीत में AI की कुछ प्रगति और उपलब्धियाँ थीं। मौजूदा दशक एआई इनोवेशन के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा है। तो आइए देखें कि मौजूदा दशक में एआई हमारे जीवन को कैसे बदलता है। चैटजीपीटी के साथ जानकारी खोजने के तरीके में खुद को बदलें। अधिक जानने के लिए चैटजीपीटी प्रमाणन प्रशिक्षण के लिए नामांकन करें । हाल के एआई आविष्कार मौजूदा दशक एआई इनोवेशन के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा है। हाल के वर्षों में, कृत्रिम बुद्धिमत्ता हमारे दिन-प्रतिदिन के अस्तित्व में शामिल हो गई है। हम ऐसे स्मार्टफोन का उपयोग करते हैं जिनमें वॉयस असिस्टेंट होते हैं और ऐसे कंप्यूटर का उपयोग करते हैं जिनमें खुफिया कार्य होते हैं। AI अब कोई कोरा सपना नहीं रह गया है और इस दशक में इसकी कुछ उपलब्धियाँ इस प्रकार हैं: 2010 इमेजनेट ने अपनी वार्षिक एआई ऑब्जेक्ट रिकग्निशन प्रतियोगिता, इमेजनेट लार्ज स्केल विज़ुअल रिकग्निशन चैलेंज (आईएलएसवीआरसी) लॉन्च की । माइक्रोसॉफ्ट ने Xbox 360 के लिए Kinect लॉन्च किया , जो पहला गेमिंग डिवाइस था जो 3D कैमरा और इन्फ्रारेड डिटेक्शन का उपयोग करके मानव शरीर की गतिविधि को ट्रैक करता था। 2011 Apple ने Apple iOS ऑपरेटिंग सिस्टम पर एक वर्चुअल असिस्टेंट Siri जारी किया। सिरी अपने मानव उपयोगकर्ता को चीजों का अनुमान लगाने, निरीक्षण करने, उत्तर देने और अनुशंसा करने के लिए प्राकृतिक भाषा उपयोगकर्ता इंटरफ़ेस पर निर्भर करता है। यह वॉयस कमांड को अनुकूलित करता है और उपयोगकर्ताओं के लिए एक व्यक्तिगत अनुभव पेश करता है। 2012 Google के दो शोधकर्ताओं ने YouTube वीडियो से 10 मिलियन बिना लेबल वाली छवियां दिखाकर बिल्लियों की छवियों को पहचानने के लिए 16,000 प्रोसेसर के एक बड़े तंत्रिका नेटवर्क को प्रशिक्षित किया। 2014 माइक्रोसॉफ्ट ने आईओएस पर सिरी के समान वर्चुअल असिस्टेंट का अपना संस्करण कॉर्टाना जारी किया। इसके अलावा, अमेज़ॅन ने अमेज़ॅन एलेक्सा बनाया , एक घरेलू सहायक जो स्मार्ट स्पीकर में विकसित हुआ जो व्यक्तिगत सहायक के रूप में कार्य करता है। 2015-2017 Google DeepMind का AlphaGo , एक कंप्यूटर प्रोग्राम जो बोर्ड गेम गो खेलता है, ने विभिन्न (मानव) चैंपियनों को हराया। 2016 में, हैनसन रोबोटिक्स द्वारा सोफिया नामक एक ह्यूमनॉइड रोबोट बनाया गया था। वह पहली रोबोट नागरिक हैं । देखने (छवि पहचानने), चेहरे के भाव बनाने और एआई के माध्यम से संवाद करने की क्षमता के साथ, सोफिया में अन्य ह्यूमनॉइड्स की तुलना में अधिक मानव जैसी विशेषताएं हैं। 2018 Google ने BERT विकसित किया, जो पहला द्विदिशात्मक, अप्रशिक्षित भाषा प्रतिनिधित्व है जिसका उपयोग स्थानांतरण शिक्षण का उपयोग करके विभिन्न प्राकृतिक भाषा कार्यों में किया जा सकता है। सैमसंग ने एक वर्चुअल असिस्टेंट बिक्सबी पेश किया । इसके कार्यों में वॉयस शामिल है, जहां उपयोगकर्ता बात कर सकता है और प्रश्न, सिफारिशें और सुझाव पूछ सकता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता की प्रगति अभूतपूर्व दर से हो रही है। इस प्रकार, हम उम्मीद कर सकते हैं कि पिछले दशक के रुझान आने वाले वर्षों में भी ऊपर की ओर बढ़ते रहेंगे। अब आइए एआई के भविष्य की ओर बढ़ते हैं और पता लगाते हैं कि यह एक तकनीकी नवप्रवर्तक के रूप में कैसे कार्य करता है। एआई का भविष्य “मानव जाति के इतिहास में एआई दुनिया को किसी भी चीज़ से अधिक बदलने जा रहा है। बिजली से भी अधिक।"- एआई ओरेकल और उद्यम पूंजीपति डॉ. काई-फू ली" पिछले दस वर्षों में, कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने दुनिया को सूक्ष्म लेकिन व्यापक तरीकों से बदल दिया है। प्रत्येक स्मार्टफ़ोन पर ध्वनि पहचान अवधारणा का एक सरल प्रमाण था। अगले 10 वर्षों में, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, संयुक्त रूप से, इससे पहले के पचास वर्षों की तुलना में अधिक प्रगति करेगी। व्यवसाय, सरकार और व्यक्तिगत जीवन में अनगिनत तेजी से आने वाले अनुप्रयोगों के साथ, इसका प्रभाव जल्द ही हमारे जीवन के हर पहलू को प्रभावित करेगा। चिकित्सा निदान मेडिकल - एआई - एडुरेका का भविष्य एक डॉक्टर के मानवीय अंतर्ज्ञान को एआई की सटीकता और पूर्णता के साथ लागू करना स्वास्थ्य देखभाल में सबसे बड़ी क्रांतियों में से एक हो सकता है। साधारण तथ्य यह है कि मानव जाति ने मानव स्वास्थ्य के बारे में इतनी अधिक समझ पैदा कर ली है जितनी कोई भी मानव मस्तिष्क उपयोगी रूप से समाहित नहीं कर सकता है। इस प्रकार, एआई सर्वश्रेष्ठ मानव डॉक्टरों से भी बेहतर प्रदर्शन करना शुरू कर सकता है। वित्तीय सेवाएं बैंकरों को बेरोज़गारी में स्वचालित होते देखना मज़ेदार है, लेकिन असली जीत तब होती है जब AI कार्यभार संभाल लेता है। अभी, वित्तीय सेवा क्षेत्र का इस बात से बहुत लेना-देना है कि अमीर और अमीर क्यों होते जा रहे हैं। वे अपने पास मौजूद धन का प्रबंधन करने के लिए अधिक और बेहतर वित्तीय सहायता ले सकते हैं। एआई, विशेष रूप से ओपन सोर्स फिनटेक समाधानों के साथ, व्यक्तिगत वित्त को और भी अधिक समान अवसर पर लाना संभव हो सकता है। अनुवाद और भाषा विज्ञान अनुवाद - एआई का भविष्य - एडुरेका कुछ हद तक, स्काइप और माइक्रोसॉफ्ट जैसी प्रमुख तकनीकी कंपनियों में रीयल-टाइम मशीन अनुवाद पहले से ही मौजूद है। लेकिन Google और यहां तक ​​कि DARPA जैसी अन्य शोध संस्थाएं इस विचार को आगे बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। वर्तमान में, मशीनें दुनिया की 7000 से अधिक भाषाओं में से केवल 100 का ही अनुवाद करने का प्रयास कर सकती हैं। चाहे वह सेना हो या अंतरराष्ट्रीय निगम या सिर्फ नियमित पुरानी शिक्षा, कोई वास्तविक समय अनुवाद को आगे बढ़ाने के लिए एआई का उपयोग करने जा रहा है ताकि हम बेहतर संचार कर सकें। खेल प्रशिक्षण एआई सटीक आक्रामक संरचना तैयार कर सकता है, लेकिन उस योजना को लागू करने वाले मानव खिलाड़ियों के पास आवश्यक कौशल होना चाहिए। यहां, आधुनिक मशीन लर्निंग एल्गोरिदम मदद कर सकते हैं। आंशिक रूप से, यह स्मार्ट गोल्फ क्लब और बास्केटबॉल और बेसबॉल बैट के माध्यम से व्यापक और व्यापक संदर्भों में डेटा एकत्र करने का मामला है। इसके अलावा, एआई सुधार की पेशकश करने के लिए आपके स्विंग को देखकर अधिक सक्रिय प्रतिक्रिया प्रदान कर सकता है। चीज़ों के लिए भुगतान करना यह तकनीक अविश्वसनीय समय बचा सकती है। उन्नत एआई फेस रिकग्निशन एल्गोरिदम जल्द ही इतने तेज और सस्ते होंगे कि प्रतिदिन लाखों लेनदेन का समर्थन कर सकें, लेकिन मशीन लर्निंग कंप्यूटर को चेहरों से ज्यादा पहचानना सिखा सकता है। उदाहरण के लिए, वेल्स फ़ार्गो और अन्य ने उपयोगकर्ता की आवाज़ के समान रूप से उन्नत बायोमेट्रिक विश्लेषण के साथ कुछ वित्तीय लेनदेन को सुरक्षित करने की योजना बनाई है। खरीदारी अमेज़ॅन भौतिक खरीदारी को ऑनलाइन की तुलना में और भी कम परेशानी वाला बनाने के लिए काम कर रहा है। यह केवल कृत्रिम तकनीक की सहायता से ही संभव है। ऑनलाइन शॉपिंग एल्गोरिदम इन दिनों एक दर्जन से अधिक हैं, लेकिन Pinterest का एक आकर्षक प्रोजेक्ट इस विचार को भौतिक दुनिया तक विस्तारित कर सकता है। भविष्यवाणी भी पहले से कहीं बड़ी भूमिका निभाएगी, क्योंकि कंपनियां खरीदारों को सही उत्पाद का सुझाव देने और यह सुनिश्चित करने के लिए एआई का उपयोग करती हैं कि उत्पाद गोदाम में वापस स्टॉक में है। पीछे घर श्रेणियाँ ऑनलाइन पाठ्यक्रम वेबिनार ई-पुस्तकनया समुदाय श्रेणियाँ कृत्रिम होशियारी बीआई और विज़ुअलाइज़ेशन बड़ा डेटा ब्लॉकचेन क्लाउड कम्प्यूटिंग साइबर सुरक्षा डेटा विज्ञान डेटा वेयरहाउसिंग और ईटीएल डेटाबेस DevOps फ्रंट एंड वेब डेवलपमेंट मोबाइल विकास ऑपरेटिंग सिस्टम प्रोग्रामिंग और फ्रेमवर्क परियोजना प्रबंधन और पद्धतियाँ रोबोटिक प्रक्रिया स्वचालन सॉफ़्टवेयर परीक्षण पीजीपी एआई और एमएल एनआईटीडब्ल्यू AI का भविष्य क्या है? दायरे और विचारों के बारे में जानें अंतिम बार मार्च 03,2023 को अद्यतन किया गया7.2K दृश्य सायन्तिनी प्रोग्रामिंग भाषाओं में कौशल के साथ एक डेटा साइंस उत्साही... इस दुनिया ने चार बड़ी क्रांतियाँ देखी हैं जिन्होंने इसका पूरा चेहरा बदल दिया। पहली क्रांति 1784 में हुई जब पहला भाप इंजन पेश किया गया। 1870 में दूसरी क्रांति में बिजली का आविष्कार हुआ। तीसरा 1969 में जब सूचना प्रौद्योगिकी शब्द दुनिया में पेश किया गया था। और चौथी है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की क्रांति जिसे हम अभी अनुभव कर रहे हैं। एआई के भविष्य में और अधिक आविष्कार होंगे जो हमें एक अद्वितीय भविष्य के करीब लाएंगे। इस लेख में, हम निम्नलिखित विषयों को कवर करेंगे: एआई का विकास एआई क्रांति की शुरुआत हाल के एआई आविष्कार एआई का भविष्य एआई का विकास कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) मशीनों के लिए अनुभव से सीखना, नए इनपुट के साथ तालमेल बिठाना और मानव जैसे कार्य करना संभव बनाती है। सोच मशीनों पर सबसे पहला शोध उन विचारों के संगम से प्रेरित था जो 1930 के दशक के अंत, 1940 के दशक और 1950 के दशक की शुरुआत में प्रचलित हुए थे। तो आइए 50 के दशक की शुरुआत से लेकर आज तक जीवन बदलने वाली इस तकनीक के विकास पर एक नज़र डालें: एआई का विकास- एआई का भविष्य - एडुरेका 1950 में एलन ट्यूरिंग ने ट्यूरिंग परीक्षण तैयार किया । यदि कोई मशीन ऐसी बातचीत कर सकती है जो किसी इंसान के साथ बातचीत से अलग नहीं हो सकती, तो यह कहना उचित होगा कि मशीन सोच रही थी। 1956 से 74 को AI के लिए स्वर्ण युग कहा जाता है । 1967 में वाबोट परियोजना ने एक रोबोट बनाया जो बाहरी रिसेप्टर्स, कृत्रिम आंखों और कानों का उपयोग करके वस्तुओं की दूरी और दिशाओं को माप सकता था। और इसकी वार्तालाप प्रणाली ने इसे कृत्रिम मुँह वाले व्यक्ति से जापानी भाषा में संवाद करने की अनुमति दी। 1980 के दशक में विशेषज्ञ प्रणाली नामक एआई कार्यक्रम का एक रूप दुनिया भर के निगमों द्वारा अपनाया गया और ज्ञान मुख्यधारा एआई अनुसंधान का केंद्र बन गया। 1990 के दशक के दौरान इंटेलिजेंट एजेंट्स नामक एक नया प्रतिमान व्यापक रूप से स्वीकार किया गया । यह एक ऐसी प्रणाली है जो अपने वातावरण को समझती है और ऐसे कार्य करती है जिससे उसकी सफलता की संभावना अधिकतम हो जाती है। 21वीं सदी के पहले दशकों में , बड़ी मात्रा में डेटा तक पहुंच, तेज़ कंप्यूटर और उन्नत मशीन लर्निंग तकनीकों को पूरी अर्थव्यवस्था में कई समस्याओं पर सफलतापूर्वक लागू किया गया था। 2016 तक , AI-संबंधित उत्पादों , हार्डवेयर और सॉफ़्टवेयर का बाज़ार 8 बिलियन डॉलर से अधिक तक पहुँच गया। साथ ही, न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया कि एआई में रुचि उथल-पुथल तक पहुंच गई है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणालियों पर दुनिया भर में खर्च 2019 में $35.8 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है , जो 2018 की तुलना में 44% की वृद्धि है । और 2022 में दोगुना से अधिक $79.2 बिलियन हो जाएगा एआई का विकास और विकास एक सतत प्रक्रिया है। अब, इससे पहले कि हम AI के भविष्य के बारे में बात करना शुरू करें, आइए अतीत में किए गए रचनात्मक आविष्कारों पर एक नज़र डालें जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शामिल है। एआई क्रांति की शुरुआत 1950 के दशक से , कई वैज्ञानिकों, प्रोग्रामर, तर्कशास्त्रियों और सिद्धांतकारों ने समग्र रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता की आधुनिक समझ को मजबूत करना शुरू कर दिया। प्रत्येक नए दशक के साथ, नए नवाचार और निष्कर्ष हुए जिन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में लोगों के बुनियादी ज्ञान को बदल दिया। साथ ही, इसने दिखाया कि कैसे ऐतिहासिक प्रगति ने एआई को एक अप्राप्य कल्पना से वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक मूर्त वास्तविकता में बदल दिया है। AI के इतिहास में कुछ महत्वपूर्ण प्रगतियाँ हैं: 1950 के दशक सूचना सिद्धांत के जनक क्लॉड शैनन ने " शतरंज खेलने के लिए एक कंप्यूटर प्रोग्रामिंग " प्रकाशित किया, जो शतरंज खेलने वाले कंप्यूटर प्रोग्राम के विकास पर चर्चा करने वाला पहला लेख था। 1950 के दशक में जॉर्ज डेवोल द्वारा आविष्कार किया गया एक औद्योगिक रोबोट , यूनिमेट , न्यू जर्सी में जनरल मोटर्स असेंबली लाइन पर काम करने वाला पहला रोबोट बन गया। इसने असेंबली लाइन से डाई कास्टिंग के परिवहन और कारों पर भागों की वेल्डिंग पर ध्यान केंद्रित किया, यह कार्य मनुष्यों के लिए खतरनाक माना जाता है। 1960 के दशक 1965 में , एक कंप्यूटर वैज्ञानिक और प्रोफेसर जोसेफ वेइज़ेनबाम ने एलिज़ा नामक एक इंटरैक्टिव कंप्यूटर प्रोग्राम विकसित किया , जो किसी व्यक्ति के साथ अंग्रेजी में कार्यात्मक रूप से बातचीत कर सकता है। इसने प्रोग्राम की गई स्क्रिप्ट का उपयोग करके कुछ कीवर्ड के लिए डिब्बाबंद लाइनों को धुंधला कर दिया। 1970 के दशक इस चरण में प्रगति देखी गई, विशेष रूप से रोबोट और ऑटोमेटन पर ध्यान केंद्रित किया गया। WABOT-1, पहला मानवरूपी रोबोट, जापान में वासेदा विश्वविद्यालय में बनाया गया था। इसकी विशेषताओं में चलने योग्य अंग, देखने की क्षमता और बातचीत करने की क्षमता शामिल है। 1980 के दशक कृत्रिम बुद्धिमत्ता का तीव्र विकास 1980 के दशक तक जारी रहा। WABOT-2 का निर्माण वासेदा विश्वविद्यालय में किया गया था। WABOT की इस शुरुआत ने ह्यूमनॉइड को लोगों के साथ संवाद करने के साथ-साथ संगीत स्कोर पढ़ने और इलेक्ट्रॉनिक ऑर्गन पर संगीत बजाने की अनुमति दी। 1990 के दशक 1995 में , कंप्यूटर वैज्ञानिक रिचर्ड वालेस ने वेइज़ेनबाम के एलिज़ा से प्रेरित होकर चैटबॉट A.LICE (कृत्रिम भाषाई इंटरनेट कंप्यूटर इकाई) विकसित किया। प्राकृतिक भाषा नमूना डेटा संग्रह को शामिल करने से एलिस को एलिज़ा से अलग किया गया। आईबीएम द्वारा 1997 में विकसित शतरंज खेलने वाला कंप्यूटर डीप ब्लू , शतरंज का खेल जीतने और मौजूदा विश्व चैंपियन के खिलाफ मैच जीतने वाला पहला सिस्टम बन गया। -2000 2000 में , प्रोफेसर सिंथिया ब्रेज़ील ने किस्मत नाम का एक रोबोट विकसित किया, जो अपने चेहरे से भावनाओं को पहचान और अनुकरण कर सकता था। इसकी संरचना आंखें, होंठ, पलकें और भौंहों के साथ एक मानव चेहरे की तरह थी। पाठ्यक्रम पाठ्यक्रम पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कोर्स 2009 में , Google ने गुप्त रूप से एक ड्राइवर रहित कार विकसित की । 2014 तक इसने नेवादा का सेल्फ-ड्राइविंग टेस्ट पास कर लिया। ये अतीत में AI की कुछ प्रगति और उपलब्धियाँ थीं। मौजूदा दशक एआई इनोवेशन के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा है। तो आइए देखें कि मौजूदा दशक में एआई हमारे जीवन को कैसे बदलता है। चैटजीपीटी के साथ जानकारी खोजने के तरीके में खुद को बदलें। अधिक जानने के लिए चैटजीपीटी प्रमाणन प्रशिक्षण के लिए नामांकन करें । हाल के एआई आविष्कार मौजूदा दशक एआई इनोवेशन के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा है। हाल के वर्षों में, कृत्रिम बुद्धिमत्ता हमारे दिन-प्रतिदिन के अस्तित्व में शामिल हो गई है। हम ऐसे स्मार्टफोन का उपयोग करते हैं जिनमें वॉयस असिस्टेंट होते हैं और ऐसे कंप्यूटर का उपयोग करते हैं जिनमें खुफिया कार्य होते हैं। AI अब कोई कोरा सपना नहीं रह गया है और इस दशक में इसकी कुछ उपलब्धियाँ इस प्रकार हैं: 2010 इमेजनेट ने अपनी वार्षिक एआई ऑब्जेक्ट रिकग्निशन प्रतियोगिता, इमेजनेट लार्ज स्केल विज़ुअल रिकग्निशन चैलेंज (आईएलएसवीआरसी) लॉन्च की । माइक्रोसॉफ्ट ने Xbox 360 के लिए Kinect लॉन्च किया , जो पहला गेमिंग डिवाइस था जो 3D कैमरा और इन्फ्रारेड डिटेक्शन का उपयोग करके मानव शरीर की गतिविधि को ट्रैक करता था। 2011 Apple ने Apple iOS ऑपरेटिंग सिस्टम पर एक वर्चुअल असिस्टेंट Siri जारी किया। सिरी अपने मानव उपयोगकर्ता को चीजों का अनुमान लगाने, निरीक्षण करने, उत्तर देने और अनुशंसा करने के लिए प्राकृतिक भाषा उपयोगकर्ता इंटरफ़ेस पर निर्भर करता है। यह वॉयस कमांड को अनुकूलित करता है और उपयोगकर्ताओं के लिए एक व्यक्तिगत अनुभव पेश करता है। 2012 Google के दो शोधकर्ताओं ने YouTube वीडियो से 10 मिलियन बिना लेबल वाली छवियां दिखाकर बिल्लियों की छवियों को पहचानने के लिए 16,000 प्रोसेसर के एक बड़े तंत्रिका नेटवर्क को प्रशिक्षित किया। 2014 माइक्रोसॉफ्ट ने आईओएस पर सिरी के समान वर्चुअल असिस्टेंट का अपना संस्करण कॉर्टाना जारी किया। इसके अलावा, अमेज़ॅन ने अमेज़ॅन एलेक्सा बनाया , एक घरेलू सहायक जो स्मार्ट स्पीकर में विकसित हुआ जो व्यक्तिगत सहायक के रूप में कार्य करता है। 2015-2017 Google DeepMind का AlphaGo , एक कंप्यूटर प्रोग्राम जो बोर्ड गेम गो खेलता है, ने विभिन्न (मानव) चैंपियनों को हराया। 2016 में, हैनसन रोबोटिक्स द्वारा सोफिया नामक एक ह्यूमनॉइड रोबोट बनाया गया था। वह पहली रोबोट नागरिक हैं । देखने (छवि पहचानने), चेहरे के भाव बनाने और एआई के माध्यम से संवाद करने की क्षमता के साथ, सोफिया में अन्य ह्यूमनॉइड्स की तुलना में अधिक मानव जैसी विशेषताएं हैं। 2018 Google ने BERT विकसित किया, जो पहला द्विदिशात्मक, अप्रशिक्षित भाषा प्रतिनिधित्व है जिसका उपयोग स्थानांतरण शिक्षण का उपयोग करके विभिन्न प्राकृतिक भाषा कार्यों में किया जा सकता है। सैमसंग ने एक वर्चुअल असिस्टेंट बिक्सबी पेश किया । इसके कार्यों में वॉयस शामिल है, जहां उपयोगकर्ता बात कर सकता है और प्रश्न, सिफारिशें और सुझाव पूछ सकता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता की प्रगति अभूतपूर्व दर से हो रही है। इस प्रकार, हम उम्मीद कर सकते हैं कि पिछले दशक के रुझान आने वाले वर्षों में भी ऊपर की ओर बढ़ते रहेंगे। अब आइए एआई के भविष्य की ओर बढ़ते हैं और पता लगाते हैं कि यह एक तकनीकी नवप्रवर्तक के रूप में कैसे कार्य करता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रशिक्षण एआई का भविष्य “मानव जाति के इतिहास में एआई दुनिया को किसी भी चीज़ से अधिक बदलने जा रहा है। बिजली से भी अधिक।"- एआई ओरेकल और उद्यम पूंजीपति डॉ. काई-फू ली" पिछले दस वर्षों में, कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने दुनिया को सूक्ष्म लेकिन व्यापक तरीकों से बदल दिया है। प्रत्येक स्मार्टफ़ोन पर ध्वनि पहचान अवधारणा का एक सरल प्रमाण था। अगले 10 वर्षों में, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, संयुक्त रूप से, इससे पहले के पचास वर्षों की तुलना में अधिक प्रगति करेगी। व्यवसाय, सरकार और व्यक्तिगत जीवन में अनगिनत तेजी से आने वाले अनुप्रयोगों के साथ, इसका प्रभाव जल्द ही हमारे जीवन के हर पहलू को प्रभावित करेगा। चिकित्सा निदान मेडिकल - एआई - एडुरेका का भविष्य एक डॉक्टर के मानवीय अंतर्ज्ञान को एआई की सटीकता और पूर्णता के साथ लागू करना स्वास्थ्य देखभाल में सबसे बड़ी क्रांतियों में से एक हो सकता है। साधारण तथ्य यह है कि मानव जाति ने मानव स्वास्थ्य के बारे में इतनी अधिक समझ पैदा कर ली है जितनी कोई भी मानव मस्तिष्क उपयोगी रूप से समाहित नहीं कर सकता है। इस प्रकार, एआई सर्वश्रेष्ठ मानव डॉक्टरों से भी बेहतर प्रदर्शन करना शुरू कर सकता है। वित्तीय सेवाएं बैंकरों को बेरोज़गारी में स्वचालित होते देखना मज़ेदार है, लेकिन असली जीत तब होती है जब AI कार्यभार संभाल लेता है। अभी, वित्तीय सेवा क्षेत्र का इस बात से बहुत लेना-देना है कि अमीर और अमीर क्यों होते जा रहे हैं। वे अपने पास मौजूद धन का प्रबंधन करने के लिए अधिक और बेहतर वित्तीय सहायता ले सकते हैं। एआई, विशेष रूप से ओपन सोर्स फिनटेक समाधानों के साथ, व्यक्तिगत वित्त को और भी अधिक समान अवसर पर लाना संभव हो सकता है। अनुवाद और भाषा विज्ञान अनुवाद - एआई का भविष्य - एडुरेका कुछ हद तक, स्काइप और माइक्रोसॉफ्ट जैसी प्रमुख तकनीकी कंपनियों में रीयल-टाइम मशीन अनुवाद पहले से ही मौजूद है। लेकिन Google और यहां तक ​​कि DARPA जैसी अन्य शोध संस्थाएं इस विचार को आगे बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। वर्तमान में, मशीनें दुनिया की 7000 से अधिक भाषाओं में से केवल 100 का ही अनुवाद करने का प्रयास कर सकती हैं। चाहे वह सेना हो या अंतरराष्ट्रीय निगम या सिर्फ नियमित पुरानी शिक्षा, कोई वास्तविक समय अनुवाद को आगे बढ़ाने के लिए एआई का उपयोग करने जा रहा है ताकि हम बेहतर संचार कर सकें। खेल प्रशिक्षण एआई सटीक आक्रामक संरचना तैयार कर सकता है, लेकिन उस योजना को लागू करने वाले मानव खिलाड़ियों के पास आवश्यक कौशल होना चाहिए। यहां, आधुनिक मशीन लर्निंग एल्गोरिदम मदद कर सकते हैं। आंशिक रूप से, यह स्मार्ट गोल्फ क्लब और बास्केटबॉल और बेसबॉल बैट के माध्यम से व्यापक और व्यापक संदर्भों में डेटा एकत्र करने का मामला है। इसके अलावा, एआई सुधार की पेशकश करने के लिए आपके स्विंग को देखकर अधिक सक्रिय प्रतिक्रिया प्रदान कर सकता है। चीज़ों के लिए भुगतान करना यह तकनीक अविश्वसनीय समय बचा सकती है। उन्नत एआई फेस रिकग्निशन एल्गोरिदम जल्द ही इतने तेज और सस्ते होंगे कि प्रतिदिन लाखों लेनदेन का समर्थन कर सकें, लेकिन मशीन लर्निंग कंप्यूटर को चेहरों से ज्यादा पहचानना सिखा सकता है। उदाहरण के लिए, वेल्स फ़ार्गो और अन्य ने उपयोगकर्ता की आवाज़ के समान रूप से उन्नत बायोमेट्रिक विश्लेषण के साथ कुछ वित्तीय लेनदेन को सुरक्षित करने की योजना बनाई है। खरीदारी अमेज़ॅन भौतिक खरीदारी को ऑनलाइन की तुलना में और भी कम परेशानी वाला बनाने के लिए काम कर रहा है। यह केवल कृत्रिम तकनीक की सहायता से ही संभव है। ऑनलाइन शॉपिंग एल्गोरिदम इन दिनों एक दर्जन से अधिक हैं, लेकिन Pinterest का एक आकर्षक प्रोजेक्ट इस विचार को भौतिक दुनिया तक विस्तारित कर सकता है। भविष्यवाणी भी पहले से कहीं बड़ी भूमिका निभाएगी, क्योंकि कंपनियां खरीदारों को सही उत्पाद का सुझाव देने और यह सुनिश्चित करने के लिए एआई का उपयोग करती हैं कि उत्पाद गोदाम में वापस स्टॉक में है। तस्वीरें जो खरीदारी बन जाती हैं क्या आपने कभी किसी उत्पाद की तस्वीर खींची है ताकि आप दुकानों में वैसा ही कुछ देख सकें? विशाल ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अमेज़ॅन ने पहले ही अपने मोबाइल एप्लिकेशन पर एक विज़ुअल सर्च विकल्प शामिल कर लिया है। बस अपनी इच्छित वस्तु का एक फोटो लें, और यह आपको बिल्कुल समान या समरूप कुछ दिखाएगा। आप इसे केवल एक तस्वीर के साथ तुरंत खरीद सकते हैं। एक व्यापार चला रहा है आने वाले दशकों में, दुनिया के सर्वश्रेष्ठ सीईओ सिर्फ रोबोट हो सकते हैं। यदि प्रबंधन प्रतिभा को पहचानने और उचित ढंग से नियुक्त करने की प्रक्रिया है, तो एक एआई ऐसा करने में बेहतर सक्षम हो सकता है। एक और सिद्धांत है कि एआई लोगों को अपने दम पर संगठित होने में इतना सक्षम बना सकता है कि प्रबंधक कम महत्वपूर्ण हो जाएंगे और कोई भी केवल प्रौद्योगिकी के साथ अपना व्यवसाय चला सकता है। राजनीतिक विश्लेषण एआई का लाभ भविष्य की भविष्यवाणी करने की क्षमता में निहित है। राजनीतिक जीत और हार से परे, एआई का बड़ा प्रभाव निर्णय और नीति निर्माण में निहित है। एआई स्टार्टअप के उदय और नीति-निर्माण के आसपास बढ़ती बातचीत के साथ, एआई राजनेताओं का आगमन कोई बड़ा आश्चर्य नहीं है। जबकि दुनिया भर के संविधान और कानून गैर-मानवों को चुनाव लड़ने से रोकते हैं, राजनीतिक और सार्वजनिक स्थान पर एआई के उपयोग के नैतिक और नैतिक प्रभावों को परिभाषित करने वाले कानूनों की भारी कमी है। मैदान और रिंक पर मानव व्यवहार और सरलता की लगभग अनंत परिवर्तनशीलता को ध्यान में रखते हुए, ऐसा लगता है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता जल्द ही दुनिया के सबसे अच्छे अध्ययन वाले खेलों के लिए भी सभी नई रणनीतियों को डिजाइन कर सकती है। मशीन लर्निंग एल्गोरिदम द्वारा इस खूबसूरत खेल को इसके बुनियादी सिद्धांतों में सफलतापूर्वक तोड़ दिया गया है और समझा गया है, और उस एल्गोरिदम के आविष्कारक के अनुसार, इसे बास्केटबॉल और हॉकी जैसे अन्य खेलों पर भी अच्छी तरह से लागू होना चाहिए। ये उन कई क्षेत्रों में से कुछ ही थे जिन पर आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का कब्जा हो जाएगा। इसके साथ, हम एआई के भविष्य के इस लेख के अंत पर आ गए हैं। मुझे आशा है कि आप पिछले कुछ वर्षों में एआई के योगदान को समझ गए होंगे और यह कैसे हर क्षेत्र पर राज करेगा। sabhar https://www.edureka.co/blog/future-of-ai/

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शुक्रवार, 30 जून 2023

जजों और वकीलों की जगह क्या आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस ले लेगा?

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आपको याद होगा कि इस साल फरवरी महीने में महाराष्ट्र में चली राजनीतिक खींचतान का मुद्दा जब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो उस बहस को ट्रांसक्राइब करने के लिए एआई का इस्तेमाल किया. वहीं भारत सरकार अदालतों को डिजिटल बनाने के लिए ई-कोर्ट्स प्रोजक्ट की शुरुआत कर चुकी है जिसके लिए 7000 करोड़ रुपए आवंटित भी किए गए हैं और अब काम तीसरे चरण में है, जिसका एक अहम हिस्सा एआई है. ऐसे में हम सब के ज़हन में एक सवाल ये उठता है कि क्या जजों की जगह एआई ले सकता है? sabhar BBC.com

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शुक्रवार, 23 जून 2023

भारत आए पहले अमेरिकी राष्ट्रपति को नेहरू ने आम खिलाए:मोदी ने ओबामा को परोसा गाजर का हलवा; भारत ने अमेरिकी राष्ट्रपतियों को क्या खिलाया

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 मोदी ने ओबामा को परोसा गाजर का हलवा; भारत ने अमेरिकी राष्ट्रपतियों को क्या खिलाया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 दिन के दौरे पर अमेरिका में हैं। गुरुवार को स्टेट डिनर के दौरान मोदी के सामने शुद्ध शाकाहारी भोजन पेश किया गया। इसमें नींबू-डिल दही सॉस, कुरकुरा बाजरा केक, मसालेदार बाजरा, कम्प्रेस्ड तरबूज, भरवां पोर्टोबेलो मशरूम, मलाईदार केसर वाला रिसोट्टो, गुलाब और इलायची वाला स्ट्रॉबेरी शॉर्टकेक शामिल रहे।

भारत आए पहले अमेरिकी राष्ट्रपति को नेहरू ने आम खिलाए:मोदी ने ओबामा को परोसा गाजर का हलवा; भारत ने अमेरिकी राष्ट्रपतियों को क्या खिलाया




प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 दिन के दौरे पर अमेरिका में हैं। गुरुवार को स्टेट डिनर के दौरान मोदी के सामने शुद्ध शाकाहारी भोजन पेश किया गया। इसमें नींबू-डिल दही सॉस, कुरकुरा बाजरा केक, मसालेदार बाजरा, कम्प्रेस्ड तरबूज, भरवां पोर्टोबेलो मशरूम, मलाईदार केसर वाला रिसोट्टो, गुलाब और इलायची वाला स्ट्रॉबेरी शॉर्टकेक 


इससे पहले भारत आए अमेरिकी राष्ट्रपतियों के स्टेट डिनर का मेन्यू भी कई बार चर्चा का विषय रहा है। डिनर और ऑफिशियल लंच के जरिए हर बार अमेरिका के सामने पूरे भारत की झलक पेश की गई। भारत आए पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ड्वाइट आइजनहावर के लिए अमेरिका से बार्ले वॉटर और दूसरे देशों से स्टेक मंगवाया गया था। वहीं रिचर्ड निक्सन तो वेजिटेरियन खाना देखकर नाराज होकर लौट गए थे।


आज हम आपको बताएंगे कि अब तक कौन-कौन अमेरिकी राष्ट्रपति भारत आ चुके हैं, उनकी यात्रा का मकसद क्या रहा है और इस दौरान उनके सामने खाने के लिए क्या-क्या पेश किया गया…


ड्वाइट आइजनहावर (दिसंबर 1959)- ताजे फल और अमेरिका का बार्ले वॉटर

अमेरिका के ड्वाइट आइजनहावर वो पहले राष्ट्रपति थे जो भारत दौरे पर आए थे। ये दौरा ऐसे वक्त पर हुआ था जब भारत भयंकर सूखे से उबर रहा था और देश में महंगाई अपने चरम पर थी। इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन और फॉरेन एक्सचेंज बेहद कम था। इसके अलावा भारत को लोकतांत्रिक देश के तौर पर उभरता देख अमेरिका, रूस के प्रभाव को भी कम करना चाहता था। जब ड्वाइट राष्ट्रपति भवन पहुंचे थे तो उन्हें सबसे पहले द्वारका सुइट के सिटिंग रूम में कॉफी पिलाई गई थी।

ड्वाइट स्टेक और डीकैफ कॉफी के शौकीन थे। उस वक्त भारत में ये सामान नहीं मिलता था। विदेश मंत्रालय ने इसे खास दूसरे देशों से मंगवाया था। अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए खाना बनाने वाले शेफ को सख्त हिदायत दी गई थी कि उनके खाने में फैटी ऐसिड बिलकुल भी मौजूद न हो। ड्वाइट को ताजे फल और खासकर आम काफी पसंद थे, इसलिए उनके लिए सबसे बेहतरीन क्वालिटी के आमों की व्यवस्था की गई थी। जिस रूम में वो ठहरे थे वहां भी आम रखे गए थे ताकि वो बीच में भी उसे खा सकें।


साथ ही राष्ट्रपति के लिए अमेरिका से खास बार्ले वॉटर भी मंगवाया गया था। ड्वाइट पूरी व्यवस्था से काफी खुश हुए थे और उन्होंने राष्ट्रपति भवन के स्टाफ का शुक्रियादा भी किया था।


रिचर्ड निक्सन (अगस्त, 1969)- शाकाहारी खाना देख नाराज हुए

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन भारत में सिर्फ 23 घंटे रुके थे। निक्सन पाकिस्तानी सपोर्टर थे और वो भारत की गुटनिरपेक्ष नीति के खिलाफ थे। उस वक्त अमेरिका का मानना था कि भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में लगातार तनाव बढ़ता जा रहा है। वो भारत को सोवियत संघ की कठपुतली मानते थे। अल जजीरा के मुताबिक, रिचर्ड के इस दौरे का फोकस इंदिरा गांधी से रिश्ते सुधारना था। दरअसल, वो भारत और इंदिरा गांधी को लेकर कई मौकों पर रेसिस्ट कमेंट कर चुके थे।

भारत आए थे तब नेहरू सरकार के सीनियर मिनिस्टर मोरारजी देसाई ने उनका स्वागत किया था। देसाई ने निक्सन के लिए खाने में सिर्फ वेजिटेरियन डिश ही रखी थीं, जबकि निक्सन नॉन-वेज और अल्कोहल के खासा शौकीन थे। देसाई की खातिरदारी से नाराज होकर निक्सन भारत से चले गए थे। उनके दौरे में अगला स्टॉप पाकिस्तान था। यहां उनके स्वागत में कई तरह के गोश्त और दूसरी नॉन-वेज डिश रखी गई थीं। इससे निक्सन पाकिस्तान से और प्रभावित हो गए थे।


इसके बाद जब बांग्लादेश के पाकिस्तान से अलग होने पर 1971 में जंग हुई तो अमेरिका में रिचर्ड निक्सन राष्ट्रपति बन चुके थे। उन्होंने इस वॉर में पाकिस्तान का साथ दिया था।


बिल क्लिंटन (मार्च, 2000)- ITC मौर्या होटल का प्रेसिडेंट प्लैटर

रिचर्ड निक्सन के बाद 1978 में जिमी कार्टर भारत आए थे। उनके बाद अगले 20 सालों तक किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत यात्रा नहीं की। साल 2000 में इस ब्रेक को तोड़ते हुए तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन अपनी बेटी के साथ 5 दिन के दौरे पर भारत आए थे। उनकी यात्रा का मकसद भारत और अमेरिका के रिश्तों को नए सिरे से लिखना था।

1991 में सोवियत संघ के टूटने के बाद ग्लोबल पॉलिटिक्स में कई बदलाव आए थे। टाइम के मुताबिक, ग्लोबल फोरम में पाकिस्तान का साथ देने वाले अमेरिका ने पहली बार 1999 में करगिल युद्ध के दौरान भारत का साथ दिया था। जंग के खत्म होने के बाद 2000 में क्लिंटन भारत आए। अटल बिहारी वाजपेयी के अध्यक्षता में क्लिंटन का धूमधाम से स्वागत हुआ। भारत की संसद में उनकी स्पीच को भी काफी सराहना मिली। क्लिंटन सबसे ज्यादा दिनों तक भारत दौरे पर रहने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति बने।


क्लिंटन के सम्मान में दिल्ली के मशहूर ITC मौर्या होटल ने पहली बार अपने 2 प्लैटर किसी अमेरिकी राष्ट्रपति को डेडिकेट किए। इनमें से एक प्लैटर का नाम प्रेसिडेंट प्लैटर है जिसमें वो नॉन-वेज डिश हैं जिन्हें क्लिंटन ने खुद पसंद किया था। इसमें मुर्ग तंदूरी, मुर्ग मलाई, सीख कबाब, दाल बुखारा, रायता और कुल्फी शामिल हैं। वहीं एक दूसरे प्लैटर को क्लिंटन की बेटी चेल्सी के नाम पर रखा गया। चेल्सी प्लैटर में सभी वेजिटेरियन डिश शामिल हैं।


जॉर्ज बुश (मार्च, 2006)- डिनर में फिश टिक्का, खीरे का रायता

क्लिंटन के दौरे के 6 साल बाद राष्ट्रपति जॉर्ज बुश भारत आए थे। इसी यात्रा के दौरान भारत और अमेरिका के बीच सिविल न्यूक्लियर एग्रीमेंट हुआ था। इसके बाद भारत इकलौता ऐसा देश बन गया जो न्यूक्लियर प्रॉलिफेरेशन ट्रीटी का हिस्सा नहीं होने के बावजूद न्यूक्लियर ट्रेड करने वाला देश बन गया। इस अग्रीमेंट के तहत भारत ने अमेरिका की 2 शर्तें मानी थीं।

पहली- भारत अपनी नागरिक और सैन्य परमाणु गतिविधियों को अलग-अलग स्थापित करेगा। दूसरी- न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी मिलने के बाद अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी IAEA भारत के परमाणु केंद्रों की निगरानी करेगी। इसके बदले अमेरिका ने भारत पर न्यूक्लियर ट्रेड को लेकर लगे बैन को हटा दिया। 2008 में न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप' ने अमेरिका के कहने पर भारत को परमाणु व्यापार के लिए विशेष छूट देने का ऐलान कर दिया था। इसके बाद बुश और तत्कालीन PM मनमोहन सिंह ने न्यूक्लियर डील पर ऑफिशियली साइन किया था।


भारत दौरे के वक्त जॉर्ज के सम्मान में राष्ट्रपति भवन में स्टेट डिनर आयोजित किया था। इसकी मेजबानी तत्कालीन राष्ट्रपति APJ अब्दुल कलाम ने की थी। उस वक्त बर्ड फ्लू काफी तेजी से फैल रहा था। ऐसे में मेन्यू से चिकन से जुड़ी सभी डिश को हटा दिया गया था। उसकी जगह मटन कोरमा और फिश तंदूरी को शामिल किया गया था। इसके अलावा राष्ट्रपति बुश के लिए पनीर तंदूरी, डोसा, खीरे का रायता, फिश टिक्का, ताजे फल और मीठे में मूंग दाल का हलवा बनाया गया था।


बराक ओबामा (नवंबर, 2010 और जनवरी, 2015)- कम मसाले का खाना, डेजर्ट में मालपुआ

बराक ओबामा इकलौते ऐसे अमेरिकी राष्ट्रपति हैं जो 2 बार भारत दौरे पर आ चुके हैं। 2010 में भारत यात्रा के दौरान ओबामा ने युनाइटेड नेशन्स सिक्योरिटी काउंसिल (UNSC) भारत की परमानेंट मेंबरशिप का समर्थन किया। इसके अलावा दोनों देशों के बीच 10 अरब डॉलर की ट्रेड डील भी हुई थी। साथ ही डिफेंस और नेशनल सिक्योरिटी को लेकर कई समझौते हुए थे।

भारत आए पहले अमेरिकी राष्ट्रपति को नेहरू ने आम खिलाए:मोदी ने ओबामा को परोसा गाजर का हलवा; भारत ने अमेरिकी राष्ट्रपतियों को क्या खिलाया


34 मिनट पहले


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 दिन के दौरे पर अमेरिका में हैं। गुरुवार को स्टेट डिनर के दौरान मोदी के सामने शुद्ध शाकाहारी भोजन पेश किया गया। इसमें नींबू-डिल दही सॉस, कुरकुरा बाजरा केक, मसालेदार बाजरा, कम्प्रेस्ड तरबूज, भरवां पोर्टोबेलो मशरूम, मलाईदार केसर वाला रिसोट्टो, गुलाब और इलायची वाला स्ट्रॉबेरी शॉर्टकेक 


इससे पहले भारत आए अमेरिकी राष्ट्रपतियों के स्टेट डिनर का मेन्यू भी कई बार चर्चा का विषय रहा है। डिनर और ऑफिशियल लंच के जरिए हर बार अमेरिका के सामने पूरे भारत की झलक पेश की गई। भारत आए पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ड्वाइट आइजनहावर के लिए अमेरिका से बार्ले वॉटर और दूसरे देशों से स्टेक मंगवाया गया था। वहीं रिचर्ड निक्सन तो वेजिटेरियन खाना देखकर नाराज होकर लौट गए थे।


आज हम आपको बताएंगे कि अब तक कौन-कौन अमेरिकी राष्ट्रपति भारत आ चुके हैं, उनकी यात्रा का मकसद क्या रहा है और इस दौरान उनके सामने खाने के लिए क्या-क्या पेश किया गया…


ड्वाइट आइजनहावर (दिसंबर 1959)- ताजे फल और अमेरिका का बार्ले वॉटर

अमेरिका के ड्वाइट आइजनहावर वो पहले राष्ट्रपति थे जो भारत दौरे पर आए थे। ये दौरा ऐसे वक्त पर हुआ था जब भारत भयंकर सूखे से उबर रहा था और देश में महंगाई अपने चरम पर थी। इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन और फॉरेन एक्सचेंज बेहद कम था। इसके अलावा भारत को लोकतांत्रिक देश के तौर पर उभरता देख अमेरिका, रूस के प्रभाव को भी कम करना चाहता था। जब ड्वाइट राष्ट्रपति भवन पहुंचे थे तो उन्हें सबसे पहले द्वारका सुइट के सिटिंग रूम में कॉफी पिलाई गई थी।


देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के न्योते पर ड्वाइट आइजनहावर भारत आने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति थे।

देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के न्योते पर ड्वाइट आइजनहावर भारत आने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति थे।

ड्वाइट स्टेक और डीकैफ कॉफी के शौकीन थे। उस वक्त भारत में ये सामान नहीं मिलता था। विदेश मंत्रालय ने इसे खास दूसरे देशों से मंगवाया था। अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए खाना बनाने वाले शेफ को सख्त हिदायत दी गई थी कि उनके खाने में फैटी ऐसिड बिलकुल भी मौजूद न हो। ड्वाइट को ताजे फल और खासकर आम काफी पसंद थे, इसलिए उनके लिए सबसे बेहतरीन क्वालिटी के आमों की व्यवस्था की गई थी। जिस रूम में वो ठहरे थे वहां भी आम रखे गए थे ताकि वो बीच में भी उसे खा सकें।


साथ ही राष्ट्रपति के लिए अमेरिका से खास बार्ले वॉटर भी मंगवाया गया था। ड्वाइट पूरी व्यवस्था से काफी खुश हुए थे और उन्होंने राष्ट्रपति भवन के स्टाफ का शुक्रियादा भी किया था।


रिचर्ड निक्सन (अगस्त, 1969)- शाकाहारी खाना देख नाराज हुए

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन भारत में सिर्फ 23 घंटे रुके थे। निक्सन पाकिस्तानी सपोर्टर थे और वो भारत की गुटनिरपेक्ष नीति के खिलाफ थे। उस वक्त अमेरिका का मानना था कि भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में लगातार तनाव बढ़ता जा रहा है। वो भारत को सोवियत संघ की कठपुतली मानते थे। अल जजीरा के मुताबिक, रिचर्ड के इस दौरे का फोकस इंदिरा गांधी से रिश्ते सुधारना था। दरअसल, वो भारत और इंदिरा गांधी को लेकर कई मौकों पर रेसिस्ट कमेंट कर चुके थे।


बतौर राष्ट्रपति भारत आने के बाद रिचर्ड निक्सन सिर्फ 23 घंटे ही यहां रुके थे। वो इससे पहले भी 1960 में भारत आए थे।

बतौर राष्ट्रपति भारत आने के बाद रिचर्ड निक्सन सिर्फ 23 घंटे ही यहां रुके थे। वो इससे पहले भी 1960 में भारत आए थे।

राष्ट्रपति बनने से पहले 1960 के दशक में जब निक्सन भारत आए थे तब नेहरू सरकार के सीनियर मिनिस्टर मोरारजी देसाई ने उनका स्वागत किया था। देसाई ने निक्सन के लिए खाने में सिर्फ वेजिटेरियन डिश ही रखी थीं, जबकि निक्सन नॉन-वेज और अल्कोहल के खासा शौकीन थे। देसाई की खातिरदारी से नाराज होकर निक्सन भारत से चले गए थे। उनके दौरे में अगला स्टॉप पाकिस्तान था। यहां उनके स्वागत में कई तरह के गोश्त और दूसरी नॉन-वेज डिश रखी गई थीं। इससे निक्सन पाकिस्तान से और प्रभावित हो गए थे।


इसके बाद जब बांग्लादेश के पाकिस्तान से अलग होने पर 1971 में जंग हुई तो अमेरिका में रिचर्ड निक्सन राष्ट्रपति बन चुके थे। उन्होंने इस वॉर में पाकिस्तान का साथ दिया था।


बिल क्लिंटन (मार्च, 2000)- ITC मौर्या होटल का प्रेसिडेंट प्लैटर

रिचर्ड निक्सन के बाद 1978 में जिमी कार्टर भारत आए थे। उनके बाद अगले 20 सालों तक किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत यात्रा नहीं की। साल 2000 में इस ब्रेक को तोड़ते हुए तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन अपनी बेटी के साथ 5 दिन के दौरे पर भारत आए थे। उनकी यात्रा का मकसद भारत और अमेरिका के रिश्तों को नए सिरे से लिखना था।


पूर्व राष्ट्रपति जिम्मी कार्टर के 20 साल बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के न्योते पर बिल क्लिंटन भारत आए थे।

पूर्व राष्ट्रपति जिम्मी कार्टर के 20 साल बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के न्योते पर बिल क्लिंटन भारत आए थे।

1991 में सोवियत संघ के टूटने के बाद ग्लोबल पॉलिटिक्स में कई बदलाव आए थे। टाइम के मुताबिक, ग्लोबल फोरम में पाकिस्तान का साथ देने वाले अमेरिका ने पहली बार 1999 में करगिल युद्ध के दौरान भारत का साथ दिया था। जंग के खत्म होने के बाद 2000 में क्लिंटन भारत आए। अटल बिहारी वाजपेयी के अध्यक्षता में क्लिंटन का धूमधाम से स्वागत हुआ। भारत की संसद में उनकी स्पीच को भी काफी सराहना मिली। क्लिंटन सबसे ज्यादा दिनों तक भारत दौरे पर रहने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति बने।


क्लिंटन के सम्मान में दिल्ली के मशहूर ITC मौर्या होटल ने पहली बार अपने 2 प्लैटर किसी अमेरिकी राष्ट्रपति को डेडिकेट किए। इनमें से एक प्लैटर का नाम प्रेसिडेंट प्लैटर है जिसमें वो नॉन-वेज डिश हैं जिन्हें क्लिंटन ने खुद पसंद किया था। इसमें मुर्ग तंदूरी, मुर्ग मलाई, सीख कबाब, दाल बुखारा, रायता और कुल्फी शामिल हैं। वहीं एक दूसरे प्लैटर को क्लिंटन की बेटी चेल्सी के नाम पर रखा गया। चेल्सी प्लैटर में सभी वेजिटेरियन डिश शामिल हैं।


जॉर्ज बुश (मार्च, 2006)- डिनर में फिश टिक्का, खीरे का रायता

क्लिंटन के दौरे के 6 साल बाद राष्ट्रपति जॉर्ज बुश भारत आए थे। इसी यात्रा के दौरान भारत और अमेरिका के बीच सिविल न्यूक्लियर एग्रीमेंट हुआ था। इसके बाद भारत इकलौता ऐसा देश बन गया जो न्यूक्लियर प्रॉलिफेरेशन ट्रीटी का हिस्सा नहीं होने के बावजूद न्यूक्लियर ट्रेड करने वाला देश बन गया। इस अग्रीमेंट के तहत भारत ने अमेरिका की 2 शर्तें मानी थीं।


जॉर्ज बुश की भारत यात्रा के वक्त ही दोनों देशों के बीच सिविल न्यूक्लियर एग्रीमेंट हुआ था।

जॉर्ज बुश की भारत यात्रा के वक्त ही दोनों देशों के बीच सिविल न्यूक्लियर एग्रीमेंट हुआ था।

पहली- भारत अपनी नागरिक और सैन्य परमाणु गतिविधियों को अलग-अलग स्थापित करेगा। दूसरी- न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी मिलने के बाद अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी IAEA भारत के परमाणु केंद्रों की निगरानी करेगी। इसके बदले अमेरिका ने भारत पर न्यूक्लियर ट्रेड को लेकर लगे बैन को हटा दिया। 2008 में न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप' ने अमेरिका के कहने पर भारत को परमाणु व्यापार के लिए विशेष छूट देने का ऐलान कर दिया था। इसके बाद बुश और तत्कालीन PM मनमोहन सिंह ने न्यूक्लियर डील पर ऑफिशियली साइन किया था।


भारत दौरे के वक्त जॉर्ज के सम्मान में राष्ट्रपति भवन में स्टेट डिनर आयोजित किया था। इसकी मेजबानी तत्कालीन राष्ट्रपति APJ अब्दुल कलाम ने की थी। उस वक्त बर्ड फ्लू काफी तेजी से फैल रहा था। ऐसे में मेन्यू से चिकन से जुड़ी सभी डिश को हटा दिया गया था। उसकी जगह मटन कोरमा और फिश तंदूरी को शामिल किया गया था। इसके अलावा राष्ट्रपति बुश के लिए पनीर तंदूरी, डोसा, खीरे का रायता, फिश टिक्का, ताजे फल और मीठे में मूंग दाल का हलवा बनाया गया था।


बराक ओबामा (नवंबर, 2010 और जनवरी, 2015)- कम मसाले का खाना, डेजर्ट में मालपुआ

बराक ओबामा इकलौते ऐसे अमेरिकी राष्ट्रपति हैं जो 2 बार भारत दौरे पर आ चुके हैं। 2010 में भारत यात्रा के दौरान ओबामा ने युनाइटेड नेशन्स सिक्योरिटी काउंसिल (UNSC) भारत की परमानेंट मेंबरशिप का समर्थन किया। इसके अलावा दोनों देशों के बीच 10 अरब डॉलर की ट्रेड डील भी हुई थी। साथ ही डिफेंस और नेशनल सिक्योरिटी को लेकर कई समझौते हुए थे।


बराक ओबामा 2 बार भारत का दौरा करने वाले इकलौते अमेरिकी राष्ट्रपति हैं।

बराक ओबामा 2 बार भारत का दौरा करने वाले इकलौते अमेरिकी राष्ट्रपति हैं।

दूसरी बार ओबामा 2015 में रिपब्लिक डे पर बतौर गेस्ट शामिल हुए थे। शुरुआती दौर में ये यात्रा काफी अच्छी रही थी। लोगों को संबोधित करते हुए ओबामा ने हिन्दी शब्दों का इस्तेमाल किया था जो भारत के लोगों को काफी पसंद आया था। हालांकि, बाद में उन्होंने कहा था कि भारत तब तक सफल रहेगा जब तक वो धर्म के आधार पर भी जुड़ा रहेगा। अमेरिका लौटने पर भी उन्होंने भारत की एकता पर सवाल उठाए थे। इसके बाद उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था।


राष्ट्रपति भवन में स्टेट डिनर के दौरान ओबामा के सामने नॉर्थ से लेकर साउथ तक की कई मशहूर डिश रखी गई थीं। इन्हें इंडिया ऑन अ प्लैटर नाम दिया गया था। इस मेन्यू में गलौटी कबाब, फिश टिक्का, चिकन मलाई टिक्का, पनीर टिक्का, चिकन कोरमा, दाल, पुलाओ, कढ़ी, छोले, पापड़, तंदूरी रोटी, नान जैसी कई डिश शामिल थीं। इसके अलावा मीठे में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति को मालपुआ और रबड़ी खिलाई गई थी।


इसके अलावा PM मोदी के साथ लंच के दौरान ओबामा को पनीर लबाबदार, गुलाब जामुन और गाजर का हलवा खिलाया गया था। वो एसिड रिफलक्स से परेशान थे इसलिए उन्होंने तीखा खाना नहीं खाया था।


डोनाल्ड ट्रम्प (फरवरी 2020)- पहले समोसा, फिर आलू टिक्की चाट और पालक पापड़ी

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प फरवरी 2020 में 2 दिन के दौरे पर भारत आए थे। इस दौरान वो 3 शहर गए थे। इनमें अहमदाबाद, आगरा और नई दिल्ली शामिल थे। ट्रम्प की भारत दौरे की शुरुआत अहमदाबाद से हुई थी, जिसे नमस्ते ट्रम्प नाम दिया गया था। उनकी यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच 3 अरब डॉलर की डिफेंस डील हुई थी। भारत ने अमेरिका से 24 MH-60 रोमियो हेलीकॉप्टर सहित 6 AH-64E अपाचे हेलीकॉप्टर खरीदने का समझौता किया था।

अहमदाबाद के गांधी आश्रम में ट्रम्प के सामने शुद्ध शाकाहारी खाना रखा गया था। इसमें नारियल का पानी, ऑरेंज जूस, लेमन और ग्रीन टी, असॉर्टेड कुकीज, भुने हुए काजू-बादाम, छुआरा, खमन, ब्रॉकली और कॉर्न की फिलिंग वाला समोसा, ताजे फल, एप्पल पाई और काजू कतली शामिल थी।


हालांकि, ट्रम्प नॉन-वेज और खासकर बीफ-हैमबर्गर के शौकीन है। वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रम्प और उनकी पत्नी मिलानिया ट्रम्प ने गांधी आश्रम में कुछ भी खाने से इनकार कर दिया था।


इसके बाद राष्ट्रपति भवन में स्टेट डिनर के दौरान उनके सामने आलू टिक्की चाट, पालक पापड़ी, अंजीर मलाई कोफ्ता, दाल, बिरयानी, तंदूरी-मिस्सी रोटी, दम गोश्त, मटन, मिन्ट रायता, मालपुआ-रबड़ी रोल रखा गया था। हालांकि, स्टेट डिनर में उन्होंने सभी डिश में से क्या खाया, इसकी जानकारी सामने नहीं आई थी। sabharhttps://www.bhaskar.com

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गुरुवार, 25 मई 2023

Vatsyayana's Kama Sutra

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Vatsyayana, an ancient Indian scholar, is known for his work called the Kama Sutra. The Kama Sutra is an ancient Indian text that provides insights into the art of living and the pursuit of pleasure. While it is often associated with sexual positions, the Kama Sutra encompasses a broader range of topics related to relationships, love, and human behavior.


Here are some key aspects of Vatsyayana's work, the Kama Sutra:


Relationships and Love: Vatsyayana discusses the various types of relationships, including marriage, courtesans, and extramarital affairs. He emphasizes the importance of mutual respect, understanding, and emotional connection in relationships.


Sexual Pleasure: The Kama Sutra explores different sexual techniques, positions, and acts. However, it's important to note that the Kama Sutra is not merely a manual of sexual positions but also a guide to achieving pleasure and intimacy through communication, foreplay, and understanding.


Seduction and Attraction: Vatsyayana delves into the art of seduction and provides guidance on how to attract and win over a partner. He discusses the importance of physical appearance, grooming, and personal charm.


Marriage and Household Management: The Kama Sutra provides advice on choosing a suitable life partner, maintaining a happy and fulfilling marriage, and managing the affairs of a household. It discusses topics like the duties of a wife, the role of a husband, and the importance of fidelity.


Social Norms and Ethics: Vatsyayana touches upon social norms, ethics, and moral conduct. He emphasizes the importance of conducting oneself with integrity, honesty, and respect for others.


Arts and Sciences: The Kama Sutra also explores various arts and sciences, including music, dance, painting, and cooking. It acknowledges the role of aesthetics and creativity in enhancing sensual experiences.


It's worth noting that the Kama Sutra is more than just a guide to sexual practices. It offers a comprehensive view of human relationships, intimacy, and personal fulfillment. Vatsyayana's work aims to provide guidance for individuals seeking to lead a balanced and enjoyable life in both the physical and emotional realms.










Vatsyayana, an ancient Indian scholar, is known for his work called the Kama Sutra. The Kama Sutra is an ancient Indian text that provides insights into the art of living and the pursuit of pleasure. While it is often associated with sexual positions, the Kama Sutra encompasses a broader range of topics related to relationships, love, and human behavior.


Here are some key aspects of Vatsyayana's work, the Kama Sutra:


Relationships and Love: Vatsyayana discusses the various types of relationships, including marriage, courtesans, and extramarital affairs. He emphasizes the importance of mutual respect, understanding, and emotional connection in relationships.


Sexual Pleasure: The Kama Sutra explores different sexual techniques, positions, and acts. However, it's important to note that the Kama Sutra is not merely a manual of sexual positions but also a guide to achieving pleasure and intimacy through communication, foreplay, and understanding.


Seduction and Attraction: Vatsyayana delves into the art of seduction and provides guidance on how to attract and win over a partner. He discusses the importance of physical appearance, grooming, and personal charm.


Marriage and Household Management: The Kama Sutra provides advice on choosing a suitable life partner, maintaining a happy and fulfilling marriage, and managing the affairs of a household. It discusses topics like the duties of a wife, the role of a husband, and the importance of fidelity.


Social Norms and Ethics: Vatsyayana touches upon social norms, ethics, and moral conduct. He emphasizes the importance of conducting oneself with integrity, honesty, and respect for others.


Arts and Sciences: The Kama Sutra also explores various arts and sciences, including music, dance, painting, and cooking. It acknowledges the role of aesthetics and creativity in enhancing sensual experiences.


It's worth noting that the Kama Sutra is more than just a guide to sexual practices. It offers a comprehensive view of human relationships, intimacy, and personal fulfillment. Vatsyayana's work aims to provide guidance for individuals seeking to lead a balanced and enjoyable life in both the physical and emotional realms..

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