नारी को शक्ति कहा गया शक्ति मतलब पावर ऊर्जा
अब ऊर्जा का वेग कितना है ये पुरुष समझ नही पाते नाही उस उर्जाके प्रभाव की सहन करने की स्कक्ति व समर्थ्य रखते है और चाहते है कि स्त्री आधीन होकर रहे स्तरीय सर्वश्रेस्ठ गुणवत्ता वालेपुरुष के प्रति समर्पित होती है जब आप सर्वश्रेस्ठ होते है तो आप उनके ह्रदय व मस्तिस्क में विराजमान होते है प्राचीन काल के स्वयम्बर प्रथा ही आज का कन्वर्जन लव मैरिज जो बहिर्मुखी वासना आधारित है आंतरिक गुणवत्ता आधार नही
जबकि आंतरिक व बाहरी शशक्त परुष ही स्त्री को अपने अधीन करने में सक्षम है
प्राचीन शिक्षा पद्धति ज्ञान व विज्ञान आधारित योगिग क्रियाएं थी जो कि गूढ़ साधनापथ होते थे
आज भी आप कर्मयोगी बनकर सफल व सार्थक जीवन जी सकते है किंतु दिनचर्य ही व्यवस्थित नही जबकि प्रकर्ति आधारित जीवन शैली ही सर्वोत्तम है
इसमें मानव हिट व कल्याण निहित है लेखक:ऋतु सिसौदिया

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